Home » ताजा खबर » अग्रवाल भवन में 7 दिन चला ज्ञान यज्ञ सम्पन्न, शिव कथा के अंतिम दिन Work-Life Balance और संस्कारों पर हुई चर्चा

अग्रवाल भवन में 7 दिन चला ज्ञान यज्ञ सम्पन्न, शिव कथा के अंतिम दिन Work-Life Balance और संस्कारों पर हुई चर्चा

॥श्री राज श्यामा जी सदा सहाय॥ 🙏🚩

SSSRK 24×7 E-PORTAL | MEGA EXCLUSIVE

पंचकूला में 7 दिवसीय भगवान शिव कथा का भव्य समापन, Work-Life Balance से गणेश उत्पत्ति और नवरात्रि तक स्वामी डॉ. सर्वेश्वर जी ने दिए आध्यात्मिक संदेश

पंचकूला | अग्रवाल भवन, सेक्टर-16 | 29 सितंबर 2026 | विशेष Mega Coverage

ॐ नमः शिवाय।

पंचकूला के सेक्टर-16 स्थित अग्रवाल भवन में पिछले सात दिनों से चल रही भगवान शिव कथा एवं आध्यात्मिक जागृति कार्यक्रम का मंगलवार को भव्य समापन हुआ। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, शाखा पंचकूला द्वारा 23 से 29 सितंबर 2026 तक आयोजित इस सात दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन Work-Life Balance, गणेश उत्पत्ति, नवरात्रि और तमोगुण से सत्वगुण की ओर बढ़ने जैसे विषयों पर प्रवचन दिया गया।

अंतिम दिवस पर शिव परिवार से जुड़े विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से आधुनिक जीवन, पारिवारिक संबंधों, संस्कार और आत्मचिंतन जैसे विषयों को समझाने का प्रयास किया गया।

🕉️ अंतिम दिवस का प्रमुख विषय: Work-Life Balance

अंतिम दिवस के प्रवचन में स्वामी डॉ. सर्वेश्वर जी, जो दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य एवं शिवपुराण मर्मज्ञ के रूप में कार्यक्रम में प्रवचन कर रहे थे, ने आधुनिक जीवन में बढ़ते कार्य-दबाव और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन के विषय पर विचार रखे।

प्रवचन के दौरान बताया गया कि आज का व्यक्ति नौकरी, व्यवसाय, लक्ष्य और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच लगातार संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में केवल काम के घंटों को कम करना ही समाधान नहीं, बल्कि काम और परिवार दोनों के प्रति सजग एवं गुणवत्तापूर्ण उपस्थिति आवश्यक है।

स्वामी जी ने भगवान शिव के जीवन-स्वरूप को योग, वैराग्य और गृहस्थ जीवन के संतुलन के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।

🔱 Work-Life Balance के तीन प्रमुख सूत्र

1. ध्यान से दिन की शुरुआत

स्वामी डॉ. सर्वेश्वर जी ने कहा कि दिन की शुरुआत केवल बाहरी गतिविधियों से करने के बजाय व्यक्ति को कुछ समय आत्मचिंतन और ध्यान के लिए देना चाहिए।

उनके अनुसार, दिन की शुरुआत शांत मन से करने पर व्यक्ति अपने कार्यों और निर्णयों को अधिक सजगता से देख सकता है।

2. परिवार के साथ Quality Time

प्रवचन में परिवार के साथ बिताए जाने वाले समय की गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया गया।

बताया गया कि केवल परिवार के साथ मौजूद रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस समय मन और ध्यान भी परिवार के साथ होना चाहिए। मोबाइल और काम से कुछ समय अलग रहकर परिवार को वास्तविक समय देना रिश्तों को मजबूत करने में सहायक हो सकता है।

3. कर्म को जिम्मेदारी और साधना की भावना से करना

स्वामी जी ने कर्म को बोझ के बजाय जिम्मेदारी और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ करने का संदेश दिया।

प्रवचन में ईमानदारी से कार्य करने और परिवार के प्रति प्रेम एवं जिम्मेदारी निभाने को जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों से जोड़ा गया।

🐘 गणेश उत्पत्ति का प्रसंग और संस्कार का संदेश

अंतिम दिवस के प्रमुख धार्मिक प्रसंगों में भगवान गणेश की उत्पत्ति का प्रसंग भी शामिल रहा।

प्रवचन के दौरान माता पार्वती द्वारा गणेश जी की उत्पत्ति और द्वारपाल के रूप में उनकी निष्ठा का वर्णन करते हुए संस्कार, कर्तव्यनिष्ठा, आज्ञापालन और समर्पण के महत्व को रेखांकित किया गया।

स्वामी जी ने इस प्रसंग को वर्तमान पीढ़ी से जोड़ते हुए कहा कि शिक्षा और डिग्री के साथ संस्कार एवं चरित्र का भी महत्व है।

प्रवचन में माता-पिता, गुरु और परिवार के वरिष्ठ सदस्यों के प्रति सम्मान को जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों में शामिल करने का संदेश दिया गया।

🦁 महिषासुर का प्रतीकात्मक संदेश: भीतर के अवगुणों पर विजय

कार्यक्रम में महिषासुरमर्दिनी के प्रसंग के माध्यम से व्यक्ति के भीतर मौजूद नकारात्मक प्रवृत्तियों पर भी चर्चा की गई।

स्वामी जी ने महिषासुर को प्रतीकात्मक रूप से आलस्य, अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या, वासना और नशे जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों से जोड़कर समझाया।

उन्होंने कहा कि बाहरी धार्मिक आयोजनों के साथ व्यक्ति के लिए अपने भीतर के अवगुणों पर भी चिंतन करना आवश्यक है।

नवरात्रि के संदर्भ में भी इसी आत्मचिंतन और आत्मसंयम को महत्वपूर्ण बताया गया।

🌺 नवरात्रि को लेकर आध्यात्मिक दृष्टिकोण

आगामी शारदीय नवरात्रि के संदर्भ में प्रवचन के दौरान नवरात्रि के आध्यात्मिक पक्ष पर चर्चा की गई।

स्वामी जी ने नवरात्रि को केवल बाहरी अनुष्ठान के रूप में देखने के बजाय इसे आत्मचिंतन, साधना और आंतरिक ऊर्जा के जागरण से जोड़कर समझाया।

उन्होंने साधना और ध्यान के माध्यम से व्यक्ति को अपने भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाने का संदेश दिया।

🌍 तमोगुण से सत्वगुण की ओर: विश्व शांति का संदेश

सात दिवसीय शिव कथा के अंतिम संदेश में व्यक्तिगत शांति से सामाजिक और वैश्विक शांति की ओर बढ़ने की बात कही गई।

स्वामी डॉ. सर्वेश्वर जी ने अपने प्रवचन में कहा कि विश्व शांति की शुरुआत व्यक्ति के भीतर से होनी चाहिए। उनके अनुसार, जब व्यक्ति अपने भीतर मौजूद नकारात्मक प्रवृत्तियों पर नियंत्रण पाने और सकारात्मक जीवन मूल्यों को अपनाने का प्रयास करता है, तो उसका प्रभाव परिवार और समाज पर भी पड़ सकता है।

प्रवचन में ध्यान और ब्रह्मज्ञान को आत्मचिंतन एवं आंतरिक शांति के साधन के रूप में प्रस्तुत किया गया।

📖 सात दिनों की शिव कथा: एक नजर में

23 से 29 सितंबर 2026 तक आयोजित इस सात दिवसीय कार्यक्रम में अलग-अलग दिनों में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा की गई।

Day 1: विज्ञान की अंधाधुंध प्रगति — शाप या वरदान?
Day 2: क्या मांसाहार शास्त्र सम्मत है?
Day 3: क्या ईश्वर दिखाई देता है?
Day 4: कैसे हो सच्चा नारी सशक्तिकरण?
Day 5: गाय को माता क्यों कहते हैं?
Day 6: राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका?
Day 7: Work-Life Balance के आध्यात्मिक टिप्स

इन विषयों के माध्यम से धार्मिक कथाओं को समकालीन सामाजिक एवं पारिवारिक जीवन से जोड़कर समझाने का प्रयास किया गया।

sssrknews
Author: sssrknews

इस खबर पर अपनी प्रतिक्रिया जारी करें

Leave a Comment

Share This