मॉस्को: जयशंकर और लावरोव की अहम बैठक, भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई दिशा
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर सोमवार को मॉस्को पहुंचकर रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात करेंगे। दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और बदलते भू-राजनीतिक माहौल में रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा करेंगे। यह बैठक एससीओ राष्ट्राध्यक्ष परिषद की बैठक से ठीक पहले होने जा रही है। विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है।
17-18 नवंबर को उच्चस्तरीय वार्ता
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने बताया कि जयशंकर 17-18 नवंबर को होने वाली एससीओ बैठक के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ मॉस्को में मौजूद रहेंगे।
उन्होंने कहा, “17 नवंबर को सर्गेई लावरोव भारतीय विदेश मंत्री के साथ औपचारिक वार्ता करेंगे।”
बैठक में न सिर्फ द्विपक्षीय मुद्दों की समीक्षा की जाएगी, बल्कि एससीओ, ब्रिक्स, संयुक्त राष्ट्र और जी20 जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को भी मजबूत करने पर चर्चा होगी।
यूक्रेन से लेकर इंडो-पैसिफिक तक कई वैश्विक मुद्दे एजेंडे में
दोनों नेताओं की बातचीत के दौरान यूक्रेन संघर्ष, मध्य पूर्व की स्थिति, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों सहित कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा।
ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, व्यापार और आर्थिक साझेदारी भी वार्ता के प्रमुख विषय रहेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच रूस से तेल आयात और रक्षा सौदों से जुड़े मुद्दों पर भी अहम चर्चा होगी।
जयशंकर अपनी यात्रा के दौरान तातारस्तान की राजधानी कजान और यूराल पर्वत क्षेत्र के शहर एकातेरिनबर्ग में दो नए भारतीय वाणिज्य दूतावासों का वर्चुअल उद्घाटन भी करेंगे। यह कदम दोनों देशों के बीच व्यापार, सांस्कृतिक आदान–प्रदान और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देगा।
दिसंबर में पुतिन की भारत यात्रा
जयशंकर की मॉस्को यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्रस्तावित भारत यात्रा से भी जुड़ा है। पुतिन 5 दिसंबर के आसपास नई दिल्ली आ सकते हैं, जहां वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शिखर बैठक करेंगे।
संभावना है कि दोनों देश रक्षा, ऊर्जा और डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़े नए समझौतों पर भी हस्ताक्षर कर सकते हैं।
पुतिन की पिछली भारत यात्रा 2021 में हुई थी और तब दोनों देशों ने विशेष रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने का निर्णय लिया था।
भारत-रूस संबंध 75 वर्षों से अधिक पुराने हैं और यूक्रेन युद्ध के बावजूद वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 65 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है। रूस इस समय भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है।






