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“मध्य प्रदेश के निर्माण में श्रमिकों की भूमिका अहम, उनकी मेहनत ही विकास की नींव है” — सीएम मोहन यादव

भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार (16 दिसंबर) को कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि सरकार गरीबों, श्रमिकों, निराश्रितों और वंचित वर्गों को स्नेह, आत्मनिर्भरता और आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। प्रदेश की जनता के सुख-दुख में सरकार हर समय साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री मंत्रालय में आयोजित मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल 2.0) योजना के अंतर्गत सहायता राशि वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के 55 जिलों के 7,227 संबल हितग्राहियों के बैंक खातों में 160 करोड़ रुपये की अनुग्रह सहायता राशि सीधे अंतरित की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में योजना की शुरुआत से अब तक 7.76 लाख प्रकरणों में कुल 7,383 करोड़ रुपये की सहायता जरूरतमंद हितग्राहियों को प्रदान की जा चुकी है।

श्रमिकों के कठिन समय की सच्ची साथी है संबल योजना

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संबल योजना श्रमिकों के लिए मुश्किल घड़ी में भरोसेमंद सहारा है। सरकार हर परिस्थिति में श्रमिकों के साथ खड़ी है। यह योजना केवल आर्थिक मदद का माध्यम नहीं, बल्कि सरकार और श्रमिकों के बीच विश्वास का मजबूत रिश्ता भी है। उन्होंने कहा कि समय के साथ श्रम के स्वरूप में बदलाव आया है और इसी को ध्यान में रखते हुए गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को असंगठित श्रमिक का दर्जा दिया गया है। एक मार्च 2024 से इन्हें भी संबल योजना के दायरे में शामिल किया गया है। अब तक 1,400 से अधिक गिग वर्कर्स का पंजीकरण किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि संबल हितग्राहियों को आयुष्मान भारत योजना से भी जोड़ा गया है, जिससे उन्हें 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क इलाज मिल रहा है। इसके अलावा 25 लाख से अधिक नए ई-श्रमिक परिवारों को राशन पात्रता देकर मुफ्त राशन की सुविधा दी गई है। गर्भवती श्रमिक महिलाओं को भी सरकार 16 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दे रही है, ताकि वे गर्भावस्था के दौरान काम के दबाव से मुक्त रह सकें और पोषण की कमी न हो।

हर श्रमिक वर्ग तक पहुंच रही है योजना

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पत्थर तोड़ने वाले, ईंट भट्ठों पर काम करने वाले, पापड़-अचार बनाने वाले, रसोइये, घरेलू कामगार और तेंदूपत्ता बीनने वाले श्रमिकों सहित सभी असंगठित श्रमिक और उनके परिवार संबल योजना से जुड़कर लाभ ले रहे हैं। प्रदेश की कुशल श्रम शक्ति को सहकारिता के माध्यम से सशक्त बनाने के लिए “श्रमणा” जैसी योजनाएं भी शुरू की गई हैं, ताकि श्रमिक आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने कहा कि सरकार हर गरीब और श्रमिक परिवार के साथ खड़ी है और कोई भी श्रमिक खुद को असहाय न समझे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में संकट कभी बताकर नहीं आते, ऐसे समय में सरकार की योजनाएं ही संबल बनती हैं। संबल योजना सभी श्रमिकों को एक सूत्र में बांधने का काम कर रही है।

1.83 करोड़ श्रमिकों का पंजीकरण

पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने अमरकंटक से वर्चुअल रूप से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में संबल योजना के तहत सातवीं बार सहायता राशि का अंतरण किया गया है। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत अब तक 1.83 करोड़ से अधिक श्रमिकों का पंजीकरण हो चुका है, जबकि संबल 2.0 में 43 लाख लोग पंजीकृत हैं। पूर्व सरकार का बैकलॉग भी समाप्त कर दिया गया है और अब श्रम विभाग 60 दिनों के भीतर भुगतान करने की स्थिति में है, जो बड़ी उपलब्धि है।

कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई, मुख्यमंत्री के सचिव आलोक सिंह, श्रम सचिव रघुराज एम.आर., मध्य प्रदेश असंगठित शहरी एवं ग्रामीण कर्मकार कल्याण मंडल के सचिव बसंत कुर्रे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। जिलों से जनप्रतिनिधि और संबल हितग्राही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े।

उल्लेखनीय है कि संबल योजना आज श्रमिकों और जरूरतमंद परिवारों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच बन चुकी है। योजना के तहत महिला श्रमिकों को 16 हजार रुपये की प्रसूति सहायता दी जाती है, वहीं श्रमिकों के बच्चों की उच्च शिक्षा का पूरा शुल्क राज्य सरकार वहन करती है। इसके साथ ही सभी पंजीकृत हितग्राहियों को 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क इलाज भी उपलब्ध कराया जा रहा है। संबल योजना आर्थिक मदद के साथ-साथ श्रमिक परिवारों के लिए सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का भरोसा भी बन चुकी है।

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Author: sssrknews

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