किराने वाले से रेजर खरीदने गया । साफ साफ लिखा था 3 पर 1 फ्री, अगले ने नहीं दिया । पूछने पर बोला, भैया, अभी स्कीम खत्म हो गई है इसलिए नहीं दे पा रहा । मैं कुछ नहीं बोला, लेकिन अगली बार से उस दुकान पर जाना बंद ।
कल बेटा बोला, पापा बर्गर खाना है । ले गया उसे पास के ही एक आउटलेट पर, बर्गर दिलाने । मैंने 2 बर्गर ऑर्डर कर दिए, अगले ने एक पर्ची फाड़ के दे दी । इतने में ही बेटा बोला, पापा पिज्जा, मैंने भी आउटलेट वाले को बोला भाई, एक बर्गर और एक पिज्जा कर दे । बोला भैया बिल तो कट किया, ये चेंज नहीं हो सकता, पिज्जा आपको अलग से ही लेना पड़ेगा । मैंने उस समय तक उसे पैसे भी नहीं दिए थे और उसके लिए वो बिल चेंज करना आसान था लेकिन अगले ने नहीं किया ।
कहीं ऊंघते दुकानदार, ग्राहक को सामान दिखाना ही नहीं चाहते, कहीं जरा सी बात पर झुंझला जाते हैं, कहीं कहीं तो ऊंची आवाज में भी दुकानदार को बात करते देखा है, दुकानदार को ग्राहक पर व्यंग्य करते देखा है ।
हमारी बिल्डिंग के सामने एक जनरल स्टोर है जो दूध भी बेचता है । दूध की जरूरत इंसान को सुबह सुबह 7- 8 बजे तक होती है और उनकी दुकान खुलती है सुबह 9 बजे । तो क्यों कोई मिल्कबास्केट जैसे प्लेटफार्म पर डायवर्ट नहीं होगा । एक सामान्य दवाई का दुकान वाला दुकान 9- 9.30 बजे खोलता है और अपोलो फार्मेसी वाला 7.30 से पहले । इस स्थिति में सुबह जल्दी दवाई की आवश्यकता होने पर आप अपोलो ही जाओगे।
कस्टमर आपको छोड़ना नहीं चाहता, लेकिन ट्रेडिशनल दुकानदारी में आपके कर्म ही ऐसे हैं कि वो आपको छोड़ कर कोई दूसरी दुकान देखे और आप बदनाम करते हो कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स ने धंधे की वाट लगा दी, ये बड़े बड़े उद्योगपति, रिलायंस, अडानी भी भिंडी टमाटर बेचने लग गए, धंधा कैसे करें ।
अरे भैया कोई वाट नहीं लगाई है, वाट आपने खुद लगाई है अपने कर्मों से, छोटे मोटे मुनाफे में आपका काम चलता नहीं, ग्राहक से बात आपको ढंग से करनी नहीं, स्कीम आपको देनी नहीं, 10 बजे दुकान खोलनी है, कैसे चलेगा । अगर वो होम डिलीवरी दे रहे हैं तो आप भी दो, व्यवहार सुधारो, टेक्नोलॉजी का प्रयोग करो, दुकान को कंप्यूटराइज्ड करो, 24×7 लगो काम पर, आदमी बढ़ाओ, मुनाफा ज्यादा मत लेने की सोचो, झक मारेंगे ये ऑनलाइन प्लेटफॉर्म आपके आगे । सुधरो तो सही, बदलाव तो करो अपने आप में ।
आपके पास रोने के 20 बहाने हो सकते हैं, हमारे पास तो आदमी नहीं है, दुकान छोड़कर कैसे जायेंगे, अकेले आदमी हैं, ऐसे ही किसी को कैश काउंटर पर कैसे बिठा देंगे, लेकिन काम करने के लिए बहाने नहीं, अपग्रेडेशन चाहिए । करिए तो सही, नहीं तो किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को, किसी बड़े कॉरपोरेट को गरियाना बंद कीजिए और मस्त रहिए अपनी घटती सेल्स के साथ ।
कितने ही ट्रेडिशनल बिजनेस हैं, जिनके धंधे में साल दर साल ग्रोथ है, क्योंकि उन्होंने समय के साथ अपने को अपग्रेड किया है ।
वैसे भी ऑनलाइन सेल्स या प्लेटफार्म एक सुविधा मात्र है उन लोगों के लिए जिनके पास समय नहीं है और जो ज्यादा कीमत देकर घर बैठे ही काम करवाना चाहते हैं । ट्रेडिशनल व्यापार का भारत जैसे देश में आज भी कोई तोड़ नहीं है, जरूरत है आपमें बदलाव की ।






