New Year 2026: 1 जनवरी ही सबका न्यू ईयर नहीं! जानिए दुनिया में नया साल कब और कैसे मनाया जाता है
जब दुनिया के ज्यादातर लोग 31 दिसंबर की रात काउंटडाउन करते हैं, पटाखे जलाते हैं और 1 जनवरी को नए साल का स्वागत करते हैं, तब विश्व की आधी से ज्यादा आबादी के लिए यह दिन बिल्कुल सामान्य होता है। इसकी वजह है कि अलग-अलग देशों, धर्मों और संस्कृतियों में न्यू ईयर तय करने का आधार अलग होता है। कहीं यह सूर्य की गति पर निर्भर करता है, कहीं चंद्रमा पर, तो कहीं खेती के चक्र पर। आइए जानते हैं कि चीन, इस्लामी देश, इजरायल, इथियोपिया और भारत में नया साल कब और किस तरह मनाया जाता है।
चीन: चंद्र कैलेंडर से तय होता है नया साल
चीन में न्यू ईयर जनवरी से मार्च के बीच आता है और इसकी तारीख हर साल बदलती रहती है। यह पूरी तरह चंद्र कैलेंडर पर आधारित होता है और इसे स्प्रिंग फेस्टिवल कहा जाता है। यह उत्सव लगभग 15 दिनों तक चलता है। इस दौरान घरों को सजाया जाता है, ड्रैगन डांस होता है और आतिशबाजी की जाती है। चीन के अलावा कोरिया, वियतनाम और ताइवान में भी यह त्योहार बड़े उत्साह से मनाया जाता है।
इस्लामी देश: हिजरी कैलेंडर के अनुसार न्यू ईयर
इस्लामी देशों में नया साल 1 मुहर्रम से शुरू होता है, जो चंद्रमा पर आधारित हिजरी कैलेंडर का पहला दिन होता है। यह तारीख हर साल ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार करीब 10–11 दिन पहले खिसक जाती है। पाकिस्तान, सऊदी अरब और इंडोनेशिया जैसे देशों में इसे माना जाता है। हिजरी कैलेंडर की शुरुआत पैगंबर मोहम्मद की 622 ईस्वी में मक्का से मदीना की हिजरत से जुड़ी है।
इजरायल: रोश हशाना के रूप में न्यू ईयर
इजरायल में यहूदी समुदाय रोश हशाना को नया साल मानता है, जो सितंबर–अक्टूबर के बीच पड़ता है। यह यहूदी लूनिसोलर कैलेंडर पर आधारित होता है। इस अवसर पर सेब को शहद में डुबोकर खाया जाता है, ताकि आने वाला साल मीठा और शुभ हो। यह समय आत्ममंथन, प्रार्थना और क्षमा याचना का माना जाता है।
इथियोपिया: दुनिया से 8 साल पीछे चलता है कैलेंडर
इथियोपिया में नया साल एनकुटाटाश के रूप में 11 या 12 सितंबर को मनाया जाता है। यहां का कैलेंडर अनोखा है, जिसमें 13 महीने होते हैं और यह दुनिया के बाकी कैलेंडरों से लगभग 8 साल पीछे चलता है। नया साल वहां बारिश के मौसम के अंत और फूलों के खिलने के साथ शुरू होता है।
भारत: एक नहीं, कई न्यू ईयर
भारत में नया साल एक तारीख तक सीमित नहीं है। यहां अलग-अलग राज्यों और परंपराओं में अलग न्यू ईयर मनाया जाता है, जो ज्यादातर सौर या कृषि चक्र से जुड़े होते हैं।
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पश्चिम बंगाल में अप्रैल में पोहेला बोइसाख
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तमिलनाडु में जनवरी में पोंगल
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आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में उगादी
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महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा
इन सभी पर्वों का संबंध नई फसल, सूर्य और प्रकृति से होता है।
न्यू ईयर: तारीख नहीं, संस्कृति की पहचान
नया साल सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा की पहचान है। पश्चिमी देशों में 1 जनवरी को न्यू ईयर मनाया जाता है, जबकि एशिया और अफ्रीका के कई हिस्सों में अलग-अलग कैलेंडर अपनाए जाते हैं। कोई सूर्य को मानता है, कोई चंद्रमा को। यही वजह है कि जब आप 1 जनवरी को जश्न मना रहे होते हैं, तब दुनिया के कई हिस्सों में लोग अपने न्यू ईयर का इंतजार कर रहे होते हैं या उसे पहले ही मना चुके होते हैं। यही विविधता हमारी दुनिया को खूबसूरत बनाती है।






