दिसपुर: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। उन्होंने घोषणा की कि असम देश का पहला राज्य होगा, जो 8वें राज्य वेतन आयोग का गठन करेगा। मुख्यमंत्री ने इसे कर्मचारी कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि यह असम की संवेदनशील और प्रगतिशील शासन व्यवस्था को दर्शाता है।
कर्मचारियों के हित में सरकार की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि असम सरकार अपने कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा, सम्मान और जीवन स्तर में सुधार के लिए निरंतर काम कर रही है। 8वें राज्य वेतन आयोग के गठन का फैसला इसी सोच का परिणाम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग की भूमिका केवल वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं होगी, बल्कि भत्तों, पेंशन और कर्मचारियों की भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भी सिफारिशें की जाएंगी।
सोशल मीडिया पर किया आधिकारिक ऐलान
सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “असम देश का पहला राज्य होगा जो 8वें राज्य वेतन आयोग का गठन करेगा। यह कर्मचारी कल्याण और प्रगतिशील शासन की दिशा में एक अहम कदम है।”
समयबद्ध तरीके से लागू होंगी सिफारिशें
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य की प्रगति उसके कर्मचारियों के समर्पण और मेहनत पर निर्भर करती है। जब कर्मचारी सुरक्षित और प्रेरित होते हैं, तो शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वेतन आयोग की सिफारिशों को समय पर लागू किया जाएगा, ताकि कर्मचारियों को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।
किन कर्मचारियों पर लागू होता है स्टेट पे कमीशन
स्टेट पे कमीशन का गठन राज्य सरकार द्वारा किया जाता है और यह राज्य के सरकारी कर्मचारियों पर लागू होता है। इसके दायरे में विभिन्न सरकारी विभागों के कर्मचारी, राज्य पुलिस, राज्य सरकार के अधीन कार्यरत स्टाफ और पेंशनधारी शामिल होते हैं। यह आयोग कर्मचारियों के वेतनमान, भत्तों और पेंशन से जुड़ी सिफारिशें तय करता है।






