???? “ए चाय वाले! बाहर निकल! हमें रॉकेट साइंस मत सिखा! यह 800 करोड़ का प्रोजेक्ट है!”
इसरो (ISRO) के कंट्रोल रूम में हड़कंप मचा था। लॉन्च में सिर्फ 20 मिनट बचे थे और कंप्यूटर ‘ERROR’ दिखा रहा था। देश के 200 सबसे बड़े वैज्ञानिक पसीने से तर-बतर थे। मिशन फेल होने की कगार पर था।
तभी, फटे कपड़ों में चाय बांटने वाला 13 साल का ‘छोटू’ एक बड़े से बोर्ड के सामने रुक गया और बोला: “साहब, वो फॉर्मूला गलत है। वहां ‘प्लस’ (+) नहीं, ‘माइनस’ (-) होना चाहिए। जब आग ऊपर उठती है, तो दबाव पीछे धक्का देता है, बिल्कुल मेरी चाय की केतली की तरह।”
सब वैज्ञानिक हंसे। “यह अनपढ़ बच्चा हमें सिखाएगा?” लेकिन चीफ साइंटिस्ट डॉ. रेड्डी की आंखों में चमक आ गई। उन्होंने चिल्लाया: “रुको! इसकी बात सुनो!” उन्होंने तुरंत कंप्यूटर में वो बदलाव किया… और फिर जो हुआ उसने इतिहास रच दिया!
आखिर एक अनपढ़ बच्चे ने वो गलती कैसे पकड़ ली जो सुपर कंप्यूटर नहीं पकड़ पाया? क्या रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च हो पाया? ???? रोंगटे खड़े कर देने वाली यह कहानी पूरी पढ़ें…






