नई दिल्ली: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान इस कदर घबरा गया था कि उसने अमेरिका से करीब 60 बार सीजफायर की गुहार लगाई। इतना ही नहीं, ट्रंप प्रशासन तक अपनी बात पहुँचाने के लिए पाकिस्तान ने अलग-अलग 6 लॉबिंग कंपनियों को लगभग 45 करोड़ रुपये का भुगतान किया। यह दावा बीजेपी के नेशनल इंफॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रभारी अमित मालवीय ने किया है।


पाकिस्तान की पैरवी का कैसे हुआ खुलासा?
अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि यह जानकारी अमेरिका के Foreign Agents Registration Act (FARA) के तहत जारी दस्तावेजों से सामने आई है। उन्होंने लिखा, “यह पाकिस्तान के समर्थकों के लिए बुरी खबर है। FARA के दस्तावेज़ साफ़ दिखाते हैं कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर ने पिछले साल पाकिस्तान को पूरी तरह हिला दिया था।”
अमेरिका से 60 बार किया गया संपर्क
मालवीय के मुताबिक, पाकिस्तान ने युद्ध रोकने के लिए अमेरिका में अपने राजनयिक नेटवर्क के जरिए आक्रामक लॉबिंग की। इस दौरान अमेरिकी सांसदों, शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों, पेंटागन और विदेश विभाग के अधिकारियों से करीब 60 बार संपर्क किया गया।
सीजफायर के लिए लगातार कोशिशें
FARA के तहत अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice) में दायर दस्तावेज़ों से पता चलता है कि पाकिस्तानी राजनयिकों ने अप्रैल के अंत से लेकर ऑपरेशन सिंदूर के चार दिनों के बाद तक ईमेल, फोन कॉल और आमने-सामने की बैठकों के जरिए सीजफायर को लेकर बातचीत की।
लॉबिंग पर खर्च किए 45 करोड़ रुपये
दस्तावेज़ों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर को रोकने और ट्रंप प्रशासन तक त्वरित पहुँच बनाने के लिए पाकिस्तान ने 6 लॉबिंग फर्मों पर करीब 45 करोड़ रुपये खर्च किए। अमित मालवीय ने भारत में उन लोगों की पहचान करने की भी बात कही है, जिन्होंने इस दौरान भारतीय सशस्त्र बलों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाए थे, और उन्हें एक बार फिर बेनकाब करने की जरूरत बताई।






