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भारतीय व्हिस्की ने दुनिया में बनाई नई पहचान: ग्लोबल ब्रांड बनने की कहानी

काफ़ी लंबे समय तक हम भारतीयों के मन में एक हल्की सी कसक रही—हमारे पास कोई ऐसा ब्रांड क्यों नहीं है जो अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अपनी पहचान बना सके। एक छोटा सा देश सिंगापुर है, लेकिन Tiger Balm पूरी दुनिया में बिकता है और लोग जानते हैं कि वह सिंगापुर का ब्रांड है। और हम? मसाले, संस्कृति, इतिहास—सब कुछ होने के बावजूद विदेशी दुकानों की शेल्फ़ पर हमारा नाम नदारद रहा।

यह तस्वीर पिछले कुछ वर्षों में बदली है। और मज़े की बात यह है कि वह एक ऐसे प्रोडक्ट निच में बदली, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी—व्हिस्की।

सालों तक भारत का नाम घटिया व्हिस्की के साथ जुड़ा रहा। सच कहें तो भारत में बिकने वाली ज़्यादातर “लोकल व्हिस्की” असल में व्हिस्की थी ही नहीं—वह गन्ने की शीरे से बनी रम होती थी, जिसमें रंग और फ़्लेवर मिलाकर उसे व्हिस्की कह दिया जाता था। यही कारण था कि भारतीय शराब को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कभी गंभीरता से नहीं लिया गया। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में अचानक कुछ भारतीय ब्रांड्स ने गेम ही बदल दिया—Amrut, Indri, Paul John, और Rampur। ये नाम अब सिर्फ़ भारत में नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्हिस्की सर्किट में चर्चा का विषय हैं।

बात यहाँ तक पहुँची कि Indri ने लगातार बड़े-बड़े अवॉर्ड जीत लिए। Rampur अलग ही दुनिया में है—उन्हें अवॉर्ड्स की परवाह भी नहीं, लेकिन हर serious connoisseur जानता है कि भारतीय सिंगल माल्ट आज दुनिया की बेहतरीन व्हिस्कीज़ में गिनी जाती है। दिलचस्प यह है कि “Scotch” शब्द खुद Scotland से निकला है—और सदियों तक यही माना जाता रहा कि अच्छी व्हिस्की सिर्फ़ ठंडे देशों में ही बन सकती है। लेकिन जैसे ही भारतीय व्हिस्की इस सेगमेंट में आई, स्कॉटिश ब्रांड्स ने आपत्ति शुरू कर दी। वजह सीधी थी—खेल के नियम बदल चुके थे।

ठंडे देशों में 12 साल, 18 साल पुरानी व्हिस्की को बेहतर माना जाता है, क्योंकि वहाँ aging धीमी होती है। भारत जैसे गर्म और नमी वाले देश में वही काम कहीं तेज़ी से होता है। यहाँ 3 साल पुरानी व्हिस्की में वही गहराई और ताक़त आ जाती है, जो Scotland में 12 साल में आती है। ऊपर से अच्छी व्हिस्की के लिए ताज़े लकड़ी के बैरल चाहिए होते हैं। भारत के पास जंगल हैं, नए बैरल हैं। एक बैच के बाद इन्हें सस्ते ब्रांड्स को बेच दिया जाता है। कच्चे माल की बात करें तो भारत एक कृषि प्रधान देश है—बेहतरीन अनाज कभी समस्या रहा ही नहीं।

लेकिन सबसे अहम बात यह रही कि भारतीय ब्रांड्स ने Scotland की नकल नहीं की। उन्होंने अपनी राह बनाई। अपने मसाले, अपनी खुशबू, अपने स्वाद। और यही वह मोड़ था जहाँ “new world whisky” की तलाश कर रहे लोगों की नज़र भारत पर पड़ी। जिसने चखा, वह लौटकर गया नहीं। आज अमेरिका में भी कई लोकल लिकर स्टोर्स में भारतीय व्हिस्की का स्टैश मिल जाएगा—और वह सिर्फ़ सजावट के लिए नहीं रखा होता, वह बिकता है।

शायद यही असली बदलाव है। हम अब सिर्फ़ सस्ते विकल्प नहीं बना रहे, हम स्टैंडर्ड सेट कर रहे हैं। और यह बदलाव किसी सरकारी अभियान से नहीं आया, यह आया उस आत्मविश्वास से कि हमें किसी और जैसा बनने की ज़रूरत नहीं—हमें बस अपने जैसा अच्छा बनना है।

एक समय था जब हम पूछते थे—भारत का ब्रांड कहाँ है?
आज सवाल यह है—दुनिया को भारत का स्वाद कब लग गया, पता ही नहीं चला।o

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Author: sssrknews

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