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पीएम मोदी ने 28वें कॉमनवेल्थ स्पीकर्स एवं प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स सम्मेलन का उद्घाटन किया, संबोधन में अहम मुद्दों पर रखे विचार

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन परिसर में आयोजित राष्ट्रमंडल देशों के लोकसभा अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस सम्मेलन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने की। कार्यक्रम में 42 राष्ट्रमंडल देशों और 4 अर्ध-स्वायत्त संसदों के कुल 61 लोकसभा अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी शामिल हुए। उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने सभी प्रतिनिधियों को संबोधित किया।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जिस स्थान पर यह सम्मेलन हो रहा है, वह भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण साक्षी रहा है। उन्होंने बताया कि गुलामी के अंतिम वर्षों में इसी सेंट्रल हॉल में संविधान सभा की बैठकें हुई थीं, जहां भारत के संविधान की नींव रखी गई। आजादी के बाद लगभग 75 वर्षों तक यही भवन भारत की संसद रहा और यहीं देश के भविष्य से जुड़े अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। लोकतंत्र के प्रति सम्मान के प्रतीक के रूप में इस स्थान को अब ‘संविधान सदन’ नाम दिया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने एक रोचक बात साझा करते हुए कहा कि स्पीकर का कार्य सबसे अधिक बोलना नहीं, बल्कि दूसरों को ध्यान से सुनना और सभी को अपनी बात रखने का अवसर देना होता है। उन्होंने कहा कि स्पीकर्स में धैर्य एक सामान्य गुण होता है और वे शोर-शराबे व अत्यधिक उत्साह के बीच भी मुस्कान के साथ सदन का संचालन करते हैं।

प्रधानमंत्री ने भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। भारत में यूपीआई दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान प्रणाली बन चुकी है। देश विश्व का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक, दूसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक, तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम और एविएशन बाजार, चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क तथा तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क रखता है। उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की पहचान यह है कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसी लोककल्याण की भावना के कारण बीते वर्षों में करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकल सके हैं।

इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में लोकतांत्रिक संवाद, सहयोग और साझा मूल्यों को मजबूत करने के उद्देश्य से यह सम्मेलन आयोजित किया गया है। उन्होंने बताया कि इस मंच के माध्यम से विभिन्न देशों के प्रतिनिधि संसदीय लोकतंत्र की परंपराओं, पहलों और अनुभवों का आदान-प्रदान करेंगे। ओम बिरला ने कहा कि संसद की सात दशकों से अधिक की यात्रा में जनकल्याणकारी नीतियों के माध्यम से लोकतंत्र को निरंतर सशक्त किया गया है।

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Author: sssrknews

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