प्रतापगढ़ के एक मुहल्ले में स्थानीय निवासियों ने मस्जिद से फूट रही अज़ान की तेज़ आवाज़ की शिकायत की। उनका कहना था कि सुबह-शाम के समय वॉल्यूम इतना ऊँचा होता है कि नींद टूट जाती है और दैनिक जीवन प्रभावित होता है। मस्जिद प्रबंधन ने मांग ठुकरा दी, कहते हुए कि यह धार्मिक परंपरा है। इस पर स्थानीय लोगों ने हिंदू संगठनों से मदद मांगी। संघ से जुड़े कार्यकर्ताओं ने इसे ध्वनि प्रदूषण का मुद्दा बनाया और प्रशासन से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर खुद मैदान में उतर आए।
स्पीकर्स पर हनुमान चालीसा का पाठ
चौराहे पर 50 फुट ऊँचे पोल पर 13 हाई-पावर स्पीकर्स लगाकर कार्यकर्ताओं ने हनुमान चालीसा का गुंजायमान पाठ शुरू किया। “जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुं लोक उजागर” की धुन पूरे इलाके में गूंजने लगी। उनका तर्क था कि अगर अज़ान का वॉल्यूम कम न होगा, तो हनुमान चालीसा भी पूरे जोरों पर बजेगी। स्थानीय लोगों ने इसे समर्थन दिया, जबकि विपक्षी पक्ष ने इसे उकसावा बताया। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर स्पीकर्स हटवाने की कोशिश की, लेकिन कार्यकर्ता अड़े रहे।
दोनों पक्षों के तर्क
संघ कार्यकर्ताओं का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के ध्वनि प्रदूषण नियमों का पालन होना चाहिए। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक स्पीकर्स प्रतिबंधित हैं, फिर भी अज़ान नियमित चल रही है। दूसरी ओर, मस्जिद समिति ने कहा कि अज़ान आस्था का प्रतीक है और वॉल्यूम सामान्य है। इलाके में तनाव बढ़ गया है, पड़ोसी राज्य से भी लोग जुट रहे हैं। प्रशासन ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
समाज के लिए सबक
यह घटना धार्मिक सद्भाव की चुनौती दिखाती है। हाईकोर्ट के पुराने फैसलों में स्पीकर्स सीमित करने के आदेश हैं, लेकिन अमल कमजोर है। प्रतापगढ़ जैसे छोटे शहरों में ऐसे विवाद बढ़ रहे हैं। जरूरत है संवाद और कानूनी पालन की। हनुमान चालीसा और अज़ान दोनों आस्था के हैं, लेकिन शांति सर्वोपरि होनी चाहिए। आशा है, शांतिपूर्ण समाधान निकलेगा।
जय हिंद!






