नेशनल कॉलेज, लाहौर की यह दुर्लभ तस्वीर उस वक़्त की है जब भारत के बहादुर नौजवान देश की आज़ादी की लड़ाई के लिए तैयार हो रहे थे।
नेशनल कॉलेज, भारत की आज़ादी के आंदोलन से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थान था; जो सिर्फ़ पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि आज़ादी की सोच को गढ़ने वाला केंद्र था।
असहयोग आंदोलन के दौरान लाला लाजपत राय द्वारा स्थापित यह कॉलेज एक ऐसा परिसर बना, जहाँ किताबों के साथ-साथ देशभक्ति भी सिखाई जाती थी।
ड्रामा क्लब के इन सदस्यों में, दाएँ से चौथे स्थान पर खड़े हैं युवा भगत सिंह; जिनकी सोच में तब से ही साहस और बलिदान की चिंगारी थी। उनके पास खड़े हैं जय देव थापर, जो क्रांतिकारी सुखदेव के भाई थे; और इसी तस्वीर में नज़र आ रहे हैं देश के अन्य बहादुर सेनानी, जो भले ही मशहूर ना हों, लेकिन हमारी स्वतंत्रता के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहे।
यह एक तस्वीर खुद में अपार साहस को समेटे हुए है। यह हमें उस दौर की झलक देती है, जब शिक्षा और क्रांति साथ-साथ चलती थी।
लाला लाजपत राय की जयंती पर, हम उस संस्था और उन विचारों को नमन करते हैं, जिन्होंने ऐसे क्रांतिकारियों को गढ़ा, जिन्होंने भारत की तक़दीर बदल दी। एक पल जो समय में ठहर गया, लेकिन उसकी रौशनी आज भी ज़िंदा है।






