“ऐसा माना जाता है कि माँ सरस्वती आपकी जीभ पर विराजमान होती हैं—
और कभी-कभी, जब आप सच और श्रद्धा के साथ कुछ कहते हैं,
तो वे सुन लेती हैं…और आपके शब्दों को आपकी किस्मत में बदल देती हैं।
यही 1989 में हुआ।
मुझे High School के लिए अपने विषय चुनने थे, जो अमेरिका में जूनियर ईयर के बराबर होता है।
मेरे आसपास हर कोई चाहता था कि मैं नॉन-मेडिकल लूँ, क्योंकि मेरा भाई इंजीनियर था।
मेरे चाचा ने कहा,
“कुक बनने की इतनी ज़िद क्यों?
आख़िर क्या बनेगा- एक बावर्ची?
अमृतसर के मशहूर क्रिस्टल रेस्टोरेंट में काम करेगा?
या फिर, अमेरिका के राष्ट्रपति के लिए खाना पकाएगा?”
बिना एक पल सोचे,
मेरी बीजी ने बस एक शब्द कहा
“तथास्तु।”
हालांकि मैंने नॉन-मेडिकल लिया, मुझे इंजीनियरिंग कॉलेज में दाख़िला भी मिला।
लेकिन मैंने चुना —पाक कला का रास्ता।
क्योंकि उनके विश्वास ने मुझे हिम्मत दी।
और आज चार-चार अमेरिकी राष्ट्रपतियों के लिए खाना बनाने वाला इकलौता शेफ बन पाना, ये सब उस एक शब्द की वजह से संभव हुआ —जो पूरे विश्वास के साथ कहा गया था: तथास्तु।
मुझे लगता है, वो ऊपर से सब देख रही होंगी चुपचाप मुस्कुराती हुई, आज भी जो मैं कर पा रहा हूँ वो उन्हीं की जादूगरी से संभव है।”
-शेफ विकास खन्ना






