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झुग्गी की दीवारों से दुनिया तक: रूबल नागी को Global Teacher Prize

दुबई में 5 फरवरी को आयोजित एक भव्य समारोह में, भारतीय टीचर रूबल नागी को Global Teacher Prize से सम्मानित किया गया।

यह सम्मान उन्हें उन बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने के लिए मिला, जो गरीबी, बाल श्रम या अन्य सामाजिक कारणों से स्कूल से दूर हो चुके थे। रूबल नागी ने पारंपरिक कक्षा की सीमाओं से बाहर निकलकर शिक्षा का एक अनोखा मॉडल विकसित किया। उन्होंने झुग्गी बस्तियों की दीवारों को ही पढ़ाई का माध्यम बना दिया, जहां म्यूरल्स के ज़रिए अक्षर ज्ञान, गणित, विज्ञान और इतिहास सिखाया जाता है।

उनकी पहल से अब तक देशभर में 800 से ज़्यादा लर्निंग सेंटर्स स्थापित किए जा चुके हैं। इन केंद्रों ने हजारों बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा है और स्कूल ड्रॉपआउट दर को कम करने में अहम भूमिका निभाई है।

रूबल ज़मीनी स्तर पर काम करती हैं। वह खुद गांवों और शहरी बस्तियों में जाकर बच्चों से बात-चीत करती हैं और शिक्षकों को ट्रेनिंग देती हैं। अब तक 600 से ज़्यादा टीचर्स और स्वयंसेवकों को उनके मॉडल के तहत प्रशिक्षित किया जा चुका है।

उनका शिक्षा मॉडल बच्चों की पारिवारिक और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखता है। इसमें कौशल आधारित शिक्षा, पुनः उपयोग योग्य सामग्री और परिवारों की आजीविका से जुड़ी सीख शामिल है।

ग्लोबल टीचर प्राइज की शुरुआत 2015 में हुई थी और यह शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण योगदान देने वाले लोगों को दिया जाता है। इस पुरस्कार के साथ 1 मिलियन डॉलर यानी करीब 8.3 करोड़ रुपये की राशि मिलती है।

रूबल नागी इस इनामी राशि से एक ऐसा संस्थान स्थापित करने की योजना बना रही हैं, जहां छात्रों को मुफ्त व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। एक कलाकार, मूर्तिकार और ‘रूबल नागी आर्ट फाउंडेशन’ की संस्थापक के रूप में वह सामाजिक बदलाव की पहचान बन चुकी हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि ज़मीनी स्तर पर की गई पहल और शिक्षा की ओर उठाया गया कदम, समाज को बदल सकता है।

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Author: sssrknews

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