इनका नाम दुर्गा शक्ति नागपाल है।
उम्र सिर्फ 27 साल जब ये ।
एक IAS अधिकारी बनीं।
साल 2012 में ग्रेटर नोएडा में SDM के रूप में तैनात।
उन्होंने देखा
हर रात यमुना और हिंडन नदी के किनारे से
अवैध रूप से रेत का खनन हो रहा था।
हर साल करीब 500 करोड़ रुपये की रेत लूटी जा रही थी।
उन्होंने कार्रवाई शुरू की।
स्पेशल टीमें बनाईं।
खुद आधी रात को छापेमारी की।
297 गाड़ियां जब्त कीं।
60 से ज्यादा FIR दर्ज कराईं।
रेत माफिया घबरा गया।
एक दिन उनका रास्ता रोका गया।
हथियार दिखाए गए।
लेकिन वो नहीं रुकीं।
फिर सिस्टम हरकत में आया।
27 जुलाई 2013 को
उन्हें सस्पेंड कर दिया गया।
आधिकारिक वजह बताई गई
“मस्जिद की दीवार गिराकर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना।”
लेकिन असली वजह सब जानते थे
उन्होंने रेत माफिया को चोट पहुंचाई थी।
और रेत माफिया के तार सत्ता तक जुड़े थे।
इसके बाद कुछ अलग हुआ…
पूरी IAS बिरादरी उनके समर्थन में खड़ी हो गई।
1000 से ज्यादा अधिकारियों ने याचिका दी।
किरण बेदी ने खुलकर विरोध किया।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पूरे देश में अवैध खनन पर सख्ती के आदेश दिए।
57 दिन बाद
उनका सस्पेंशन वापस ले लिया गया।
लेकिन… उन्हें ट्रांसफर कर दिया गया।
क्योंकि इस सिस्टम में
ईमानदारी का इनाम ट्रांसफर होता है।
और भ्रष्टाचार की सजा… प्रमोशन।
साभार स्वतंत्र सागर जी की वाल से






