मुंबई के मीरा रोड हमले की जांच गहराई: ‘लोन वुल्फ’ एंगल की आशंका, आरोपी से मिले कट्टरपंथी नोट्स
मुंबई के मीरा रोड के नया नगर इलाके में दो सिक्योरिटी गार्ड्स पर हुए हमले की जांच अब तेज हो गई है। जांच एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार इस मामले में आतंकी कनेक्शन की आशंका जताई जा रही है और इसे ‘लोन वुल्फ’ हमले के रूप में भी देखा जा रहा है। आरोपी के पास से एक नोट बरामद हुआ है, जिसमें ISIS, जिहाद और गाज़ा जैसे शब्द लिखे पाए गए हैं। बताया जा रहा है कि आरोपी ने गार्ड्स से उनका धर्म पूछा और ‘कलमा’ पढ़ने के लिए कहा था।
कट्टरपंथी सामग्री मिलने से बढ़ा संदेह
सूत्रों के मुताबिक आरोपी के पास से मिले नोट में धमकी भरी भाषा और कट्टरपंथी विचारों के संकेत मिले हैं। इसमें अंग्रेज़ी में कुछ पंक्तियां लिखी थीं, जैसे— “Lone wolves will pounce on you…” और “You mushrikeen will see real jihad in bilad Hind…”. इसके अलावा कुछ असंबंधित और बिखरे हुए वाक्य भी लिखे पाए गए, जिनमें परिवार, समाज और गाज़ा का जिक्र था। शुरुआती जांच के बाद मामला एटीएस को सौंप दिया गया है। एजेंसियां अब आरोपी के मोबाइल, इंटरनेट हिस्ट्री और कम्युनिकेशन रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही हैं।
धर्म पूछकर कलमा पढ़ने का दबाव, फिर हमला
पुलिस के अनुसार आरोपी पहले इलाके में आया और मस्जिद का रास्ता पूछकर चला गया। कुछ देर बाद वह वापस लौटा और सिक्योरिटी गार्ड से उसका धर्म पूछा। इसके बाद उसने कथित तौर पर ‘कलमा’ पढ़ने के लिए कहा। जब गार्ड ने इनकार किया, तो आरोपी ने अचानक चाकू से हमला कर दिया। इसके बाद वह सिक्योरिटी केबिन में घुसा और वहां मौजूद दूसरे गार्ड पर भी हमला किया।
घर से भी मिले संदिग्ध दस्तावेज
आरोपी के घर की तलाशी के दौरान कुछ नोट्स और दस्तावेज मिले हैं, जिनमें प्रतिबंधित आतंकी संगठन से जुड़ी विचारधारा के संकेत बताए जा रहे हैं। इनमें ‘लोन वुल्फ’, ‘जिहाद’ और ‘गाज़ा’ जैसे शब्द दर्ज थे।
साइंस ग्रेजुएट, विदेश में रह चुका है आरोपी
आरोपी ज़ुबैर अंसारी साइंस ग्रेजुएट है और कुछ समय तक अमेरिका में भी रह चुका है। भारत लौटने के बाद वह मीरा रोड में अकेले रह रहा था और ऑनलाइन केमिस्ट्री पढ़ाता था। शुरुआती जानकारी के अनुसार, नौकरी की कमी और अकेलेपन के चलते वह धीरे-धीरे ऑनलाइन कट्टरपंथी कंटेंट की ओर आकर्षित हुआ।
एटीएस की जांच जारी, बड़े खुलासों की उम्मीद
अब यह जांच की जा रही है कि आरोपी ने यह हमला अकेले किया या इसके पीछे कोई नेटवर्क सक्रिय है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि हमला पूर्व नियोजित था या अचानक की गई कार्रवाई। यह मामला इस बात की ओर इशारा करता है कि डिजिटल माध्यमों के जरिए कट्टरपंथी विचारधाराएं किस तरह लोगों को प्रभावित कर सकती हैं। एटीएस की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस केस में और अहम खुलासे हो सकते हैं।




