जयपुर में 4000+ घर बिना AC के भी ठंडे रह रहे हैं और इसके पीछे कोई हाई-टेक मशीन नहीं, बल्कि एक सस्टेनेबल सोच काम कर रही है।
इस बदलाव की शुरुआत Prateek Tiwari ने की, जिन्होंने अपनी कॉरपोरेट नौकरी छोड़कर शहर की कंक्रीट छतों को ऑर्गेनिक फार्म में बदलने का मिशन शुरू किया।
उनकी पहल Living Greens के जरिए लोगों को एक ऐसा आसान और पोर्टेबल रूफटॉप फार्मिंग सिस्टम दिया गया, जिसे किसी भी छत पर इंस्टॉल किया जा सकता है। इसमें मिट्टी, ग्रो बैग्स और खास डिजाइन के स्ट्रक्चर का इस्तेमाल होता है, जिससे लोग अपने घर की छत पर ही सब्जियां, फल और हरी सब्जियां उगा सकते हैं।
इसका सबसे बड़ा असर गर्मी पर देखने को मिलता है। आमतौर पर कंक्रीट की छतें दिनभर सूरज की गर्मी सोखती हैं और घर को भट्टी जैसा बना देती हैं। लेकिन जब वही छत मिट्टी और पौधों से ढक जाती है, तो यह एक नैचुरल इंसुलेशन की तरह काम करती है। इससे घर के अंदर का तापमान औसतन 2–3°C तक कम हो सकता है, जिससे AC या कूलर पर निर्भरता घटती है और बिजली का बिल भी कम होता है।
आज यह मॉडल सिर्फ जयपुर तक सीमित नहीं है। देश के 25+ शहरों में 4000 से ज्यादा छतों को छोटे-छोटे ऑर्गेनिक खेतों में बदला जा चुका है। यह पहल सिर्फ खेती नहीं, बल्कि एक पूरा लाइफस्टाइल बदलाव है जहां लोग अपनी छत को खाली जगह नहीं, बल्कि “फूड + कूलिंग + ग्रीन स्पेस” के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
तेजी से बढ़ती गर्मी और शहरी हीट वेव के बीच यह उदाहरण दिखाता है कि क्लाइमेट सॉल्यूशन हमेशा महंगे या जटिल नहीं होते। सही सोच और प्रकृति के साथ तालमेल से छोटे-छोटे बदलाव भी बड़े असर ला सकते हैं।
साभार : सोशल मिडिया




