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आज का पंचांग: कुलदेवी की कृपा कैसे प्राप्त करें और कामधेनु गऊ माता की उत्पत्ति की अद्भुत कथा

Daily panchang,कुलदेवी कुलदेवता क़ो प्रसन्न(पूजा) कैसे करें एवं गऊ माताजी की उतपत्ति कैसे हुई

🌤️ दिनांक – 08 मई 2026
🌤️ दिन – शुक्रवार
🌤️ विक्रम संवत 2083
🌤️ शक संवत -1948
🌤️ अयन – उत्तरायण
🌤️ ऋतु – ग्रीष्म ॠतु
🌤️ मास – ज्येष्ठ
🌤️ पक्ष – कृष्ण
🌤️ तिथि – षष्ठी दोपहर 12:21 तक तत्पश्चात सप्तमी
🌤️ नक्षत्र – उत्तराषाढा रात्रि 09:20 तक तत्पश्चात श्रवण
🌤️ योग – शुभ 09 मई रात्रि 02:30 तक तत्पश्चात शुक्ल
🌤️*राहुकाल – सुबह 10:58 से दोपहर 12:35 तक*
🌤️ सूर्योदय – 06:05
🌤️ सूर्यास्त – 07:05
दिशाशूल – पश्चिम दिशा मे

कुलदेवी कुलदेवता क़ो प्रसन्न(पूजा) कैसे करें एवं गऊ माताजी की उतपत्ति कैसे हुई आओ जानें

कुलदेवी और कुलदेवता के रुष्ट होने से करना पड़ सकता है कई संकटों का सामना,पूजा करते समय ध्यान रखें ये बातें।

हर समाज या फिर परिवार की एक कुलदेवी या फिर कुलदेवता होते हैं। जिनकी पूजा मांगलिक कार्यों, शुभ कामों में जरूर करना शुभ माना जाता है। जैसे विवाह के बाद दुल्हन के घर आने पर कुलदेवी या कुलदेवता की पूजा अवश्य कराई जाती है या फिर संतान होने पर उसे दर्शन कराए जाते हैं। लेकिन कई लोग मांगलिक कार्यों पर ही नहीं बल्कि नियमित रूप से उनकी पूजा करते हैं।

कुलदेवी को लेकर मान्यता है कि बिना उनकी कृपा के कुल का वंश किसी काम का नहीं रहता है। अधिकतर किसी न किसी परेशानी का सामना करना पड़ता है। माना जाता है कि अगर कुल देवी या देवता रुष्ट हो जाए, तो पूरे कुल के नाश की भी कर सकते हैं। इसलिए उनकी कृपा पाने के लिए पूजा करते समय कुछ चीजों का जरूर ध्यान रखें।

शास्त्रों के अनुसार, कुलदेवी और कुलदेवता की कृपा पाने के लिए रोजाना सुबह और शाम को भोग लगाने के साथ उनके नाम का उच्चारण जरूर करें। अगर उनका नाम नहीं याद है, तो जहां पर आपकी कुलदेवी या कुलदेवता स्थित हो वहां का आप नाम ले सकते हैं।

कुलदेवी के बारे में कुछ न पता हो तो
अगर किसी व्यक्ति को अपनी कुलदेवी या देवता के बारे में कुछ भी नहीं पता है, तो उनका ऐसे ही स्मरण करते हुए मां दुर्गा और भैरव महाराज के नाम पर पूजा कर सकता है।

नींबू उतारे
कुलदेवी या देवता की अपार कृपा पाने के लिए उनके स्थान पर जाएं और एक साबुत नींबू के को अपने ऊपर से 21 बार उतार लें। इसके बाद इसके दो भाग करके अलग-अलग दिशा पर फेंक दें। इसके बाद कुलदेवी या देवता से क्षमा मांग कर पूजा पाठ कर लें।

घी का दीपक
कुलदेवी या देवता की पूजा करते समय शुद्ध घी के साथ धूप और कपूर जलाना चाहिए।

साबुतचावल चढ़ाएं
कुलदेवता को चंदन, अक्षत, सिंदूर आदि जरूर लगाएं। इसके साथ ही हल्दी में लिपटे पीले चावल को भिगोकर अर्पित करना शुभ होता है।

पान के साथ चढ़ाएं ये चीजें
पूजा के समय कुलदेवी या देवता को पान में सुपारी, लौंग, इलायची, दक्षिणा, गुलकंद आदि जरूर चढ़ाएं।

तस्वीर नहीं है, तो करें ये काम
अगर आपके घर में कुलदेवी या देवता की तस्वीर या मूर्ति नहीं है, तो एक सुपारी में अच्छी तरह कलावा लपेट दें। इसे प्रतीकात्मक रूप बांधकर पूजा करें। इससे लाभ मिलेगा।

कुलदेवी के आशीर्वाद क्यों जरूरी हैं ?

विषय बहुत महत्वपूर्ण हैं ।इस विषय को समझते वक़्त सभी साधना , कुण्डलिनी , श्रीविद्या , दसमहाविद्या जो भी कोई साधना आप कर रहे हो , सब एक तरफ़ रखें ।

क्योंकि कुलदेवी की कृपा का अर्थ है , सौ सुनार की एक लोहार की , बिना इसके कृपा से किसीके कुल का वंश ही क्या कोई नाम फेम कुछ भी आगे बढ नहीं सकता ।

लोग भावुक होकर अथवा आकर्षित होकर कई साधनाए तो करते हैं , पर वो जानते नहीं की जब आप अपनी कुलदेवी को पुकारे बिना किसी भी देवी देवता की साधना करते हो , वो साधना कभी यशस्वी नहीं होती ; उलटा कुलदेवी का प्रकोप अथवा रुष्टता और ज्यादा बढ़ती हैं ।

*कई जगहों पर आज भी कुछ परंपरा हैं , घर के पूजा घर में कुलदेवी के रूप में सुपारी अथवा प्रतिमा का पूजन करना , घर से बहार लंबी यात्रा हो तो कुलदेवी को पहले कहना , साल में दो बार कुलदेवी पर लघुरूद्र अथवा नवचंडी करना …… यह सब आज भी हैं ।

हर घर की एक कुलदेवी रहती हैं ।

आज भारत में 70% परिवार अपने कुलदेवी को नहीं जानते । कुछ परिवार बहुत पीढ़ियों से कुलदेवी का नाम तक नहीं जानते ।

इसके कारण , एक निगेटिव दबाव उस घर के कुल के ऊपर बन जाता हैं और अनुवांशिक प्रॉब्लम पैदा होती हैं ।

कुलदेवी की कृपा के बिना अनुवांशिक बीमारी पीढ़ी में आती है , एक ही बीमारी के लक्षण सभी लोगो को दिखते हैं

मनासिक विकृतियाँ अथवा स्ट्रेस पूरे परिवार में आ जाती हैं

कुछ परिवार एय्याशी की ओर इतने जाते है कि सबकुछ गवा देते हैं !बच्चे भी गलत मार्ग पर भटक जाते हैं।शिक्षा* में अड़चनें आती है

किसी परिवार में सभी बच्चे अच्छे पढ़ते हैं फिरभी जॉब ठीक नहीं मिलती!
– कभी तो किसीके पास पैसा बहुत होता है पर मनासिक समाधान नहीं होता !

– यात्राओं में अपघात होते है अथवा अधूरी यात्रा होती हैं
बिजनेस में भी ग्राहक पर प्रभाव नहीं बनता अथवा आवश्यक स्थिरता नहीं आती ।

विदेशों में बहुत भारतिय बसे है , उनके पास पैसा होकर भी एक असमाधानी वृत्ति अथवा कोई न कोई अड़चन आती है , इतने लंबा सफर से भारत में कुलदेवी के दर्शन के लिए नहीं आ सकते ।

यह सब परेशानी हम देख रहे हैं ।
यह सब परेशानी आप किसी हीलिंग अथवा किसी ध्यान अथवा किसी दसमहाविद्या के मंत्रो से कम तो कर सकते हैं।दूर नहीं कर सकते।

बल्कि , अगर और अंदर कहूँ तो कोई भी दसमहाविद्या की दीक्षा में सबसे पहले गुरु उस साधक की कुलदेवी का जागरण करवाने की दीक्षा अथवा साधन पहले देता हैं ।

आजकल महाविद्याओं की साधनाओ को सही तरीके सेकरता नहीं सभी सीधा मंत्र देते है , बाद में उसका फल यह मिलता है कि वो साधक ऐसे जगह पर फेंक दिया जाता है,जहाँ से वो कभी उठ ही नही पाते।

इसलिए,कोई भी महाविद्या के प्रति आकर्षित होने से पहले अपने कुलदेवी को पुकारो ।

अगर आज नहीं तो कल की पीढ़ी के लिए बहुत दिक्कतें होगी ।

कईयों को लगेगा वो श्रीनाथ जी जाते हैं , तिरुपती जाते हैं , चारधाम जाते हैं , ,या हर कहीं माथा रगड़ने जाते हैं।… साल में एक दो बार दर्शन के लिए । इससे कुलदेवी प्रसन्न नहीं होती ।
बल्कि वो शक्तियाँ भी आपको यही कहेंगी की पहले अपने माँ बाप को याद करो फिर मेरे पास आओ।

कुलदेवी के रोष में कई संस्थान , राजवाड़े , महाराजे खत्म हुए । कई परिवार के वंश नष्ट हुए ।
इसलिए कुलदेवी का पूजन पहले करों ।
जय माँ चामुडा जय माँ काली

मकान या जमीन प्राप्त करने का उपाय

हर व्यक्ति चाहता है कि उसके पास उसका खुद का भवन और जमीन हो। किन्तु कुछ व्यक्ति ऐसे भी है जो दिन रात अपना घर बनाने के लिए मेहनत करते है, फिर भी उनकी मेहनत रंग नही लाती और वो निराश हो जाते है। जिसका उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति दोनों पर प्रभाव पड़ता है। और कभी कभी तो ऐसी स्तिथि होती हैं कि हम समर्थ होते हुए भी जिस जमीन की हमें इच्छा हैं, किसी कारणवश नहीं ले पाते। आज हम आपको आपकी इसी परेशानी से मुक्त होने के उपाय बता रहे है, इन उपायों को अपनाकर आप जल्द ही अपनी पसंद की भूमि प्राप्त कर सकते हो।
* जिस जमीन या मकान को आप खरीदना चाहते हैं उस स्थान की थोड़ी सी मिट्टी लाकर एक कांच की शीशी में उसे डालें, उसमे गंगा जल और कपूर डाल कर अपनी पूजा में जौ के ढेर पर स्थापित करें, नवरात्र भर उस शीशी के आगे नवार्ण मन्त्र “ऐं हीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे” की पांच माला जप करें और जौ में रोज गंगा जल डालें। नवमी के दिन थोड़े से अंकुरित जौ निकाल लें और ले जाकर मन चाही जगह पे डाल दें, शेष सामग्री को नदी में डाल दें। कृपा कांच की शीशी को नदी में न डालें। आपको मनचाहा घर मिल जायेगा।

* एक मिट्टी की कोरी हांडी में दूध, दही, घी, शक्कर, मिश्री, कपूर और शहद डाल कर उस हांडी के आगे दुर्गा नवार्ण मन्त्र का जप करें और आज ही वो हांडी किसी नदी या तालाब में ले जा कर जमीन में गाड़ दें तो माता की कृपा से शीघ्र आपको भूमि और भवन प्राप्त होगा।

* अगर आप मकान बनाना चाहते हैं तो एक लाल कपड़े में छ: चुटकी कुमकुम, छ: लौंग, नौ बिंदिया, नौ मुट्ठी साफ़ मिट्टी और छ: कौड़ियाँ लपेट कर नदी में आज ही विसर्जित कर दें। माता की कृपा से आपको जल्द ही अपना मकान मिलेगा।

* यदि किसी कारणवश आप अपना मकान नहीं बनवा पा रहे हैं या नया मकान नहीं खरीद पा रहे है, तो नीम की लकड़ी का एक छोटा सा घर बनवाकर किसी गरीब बच्चे को दान कर दें या किसी मंदिर में रख आएं। ऐसा करने पर शीघ्र ही आपको घर मिलने के योग बनेंगे। ध्यान रहें इसके साथ ही आप अपने प्रयास भी पूरी ईमानदारी से करें

* मिटटी के बर्तन में हनुमान जी को बूंदी का भोग लगाये , फिर गरीबो को दान कर दे प्रोपर्टी जल्दी हो जाएगी ।उनको 2 तुलसी का पत्ता भी जरूर चढ़ाए। लाल रंग की ध्वजा जिसमे राम लिखी हो मंगलवार को हनुमान जी को चढ़ाए। सुबह शाम हनुमान चालीसा जरूर करे।

ज्योतिष शास्त्र
हर व्यक्ति के जीवन में कुछ न कुछ परेशानियां जरूर रहती हैं। उन परेशानियों से छुटकारा पाने के लिेए व्यक्ति हरसंभव कोशिश करता है। कई बार उसे सफलता मिलती है तो कई बार असफलता हाथ लगती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुछ आसान उपाय कर उन परेशानियों को खत्म किया जा सकता है। ये हैं कुछ आसान उपाय-
1. रुका हुआ पैसा पाने के लिए करें ये उपाय
शुक्ल पक्ष के किसी सोमवार से यह उपाय शुरू कर लगातार 21 दिनों तक करें। सुबह जल्दी उठें। स्नान आदि कामों से निपटकर एक लोटे में साफ पानी लेकर उसमें 5 गुलाब के फूल डालकर सूर्य को अर्ध्य दें और भगवान सूर्य से समस्या निराकरण के लिए प्रार्थना करें। शीघ्र ही आपका अटका हुआ पैसा आपको मिल सकता है।
2. सफलता पाने के लिए
किसी भी बुधवार को सूर्य की ओर मुख करके नमस्कार करें। इसके बाद कच्चा सूत लेकर उस पर नीचे लिखा मंत्र पढ़ते हुए सात गठान लगाएं। अब उस सूत को ताबीज में भरकर पहन लें। अब प्रति बुधवार को यह तावीज निकालकर धूप-दीप दिखाकर पुन: धारण कर लिया करें। इस ताबीज को पहनकर आप जिस किसी भी काम को करने जाएंगे उसमें सफलता अवश्य मिलेगी।
मंत्र- ऊं गं गणपतये नम:
3. सुख-समृद्धि के लिए
रोज सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद तुलसी को जल चढ़ाएं और गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं। इस उपाय से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और परिवार में शांति बनी रहती है।
शरीर में ठंडी या गर्मी हो तो
जिसके शरीर में बहुत गर्मी हो …आँखे जलती हों उसको रात को सोते वक्त दायीं करवट लेटकर थोड़ा सोना चाहिए तो शरीर की गर्मी कम हो जाएगी और जिनका शरीर ठंडा पड़ जाता हो और ढीला हो उसको बायीं करवट सोना चाहिए ।

कामधेनु की पौराणिक कथा (पूर्ण विस्तार)

समुद्र मंथन हिंदू पुराणों की सबसे महत्वपूर्ण और भव्य घटनाओं में से एक है। इस महान यज्ञ के दौरान कामधेनु गाय का प्राकट्य हुआ।

कथा का आरंभ
बहुत प्राचीन काल में देवता और असुरों में अमृत प्राप्त करने के लिए युद्ध छिड़ गया। दोनों पक्षों ने मिलकर समुद्र मंथन करने का निर्णय लिया।

-मंदराचल पर्वत को मथनी बनाया गया।
-वासुकि नाग को रस्सी बनाया गया।
– भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार (कछुआ रूप) लेकर पर्वत को अपनी पीठ पर सहारा दिया।
– देवता एक तरफ और असुर दूसरी तरफ खड़े होकर वासुकि नाग को खींचने लगे।

समुद्र मंथन से 14 रत्न निकले,जिनमें से एक था कामधेनु।

कामधेनु का प्राकट्य
जब समुद्र का मंथन जोरों पर था, तो अचानक समुद्र से एक दिव्य, श्वेत रंग की गाय प्रकट हुई। उसकी शोभा अनुपम थी — शरीर से दिव्य ज्योति फूट रही थी, सींगों पर स्वर्ण आभूषण, गले में मंगलसूत्र और फूलों की माला।

यह कोई साधारण गाय नहीं थी। कामधेनु (या सुरभि) इच्छा पूरी करने वाली गाय।

जो भी व्यक्ति इस गाय से प्रार्थना करता, वह अपनी इच्छा के अनुसार दूध, घी, भोजन या कोई भी वस्तु प्राप्त कर सकता था। यह गाय समृद्धि, यज्ञ और धार्मिक कर्मों का प्रतीक थी।

कामधेनु का वितरण
कामधेनु के उदय के बाद देवताओं और असुरों में इसे लेकर विवाद हो सकता था, लेकिन ऋषि-मुनियों और देवताओं ने इसे सप्तर्षियों (सात प्रमुख ऋषियों) को सौंप दिया। बाद में यह गाय वसिष्ठ ऋषि के आश्रम में चली गई, जहां वह उनके यज्ञों में सहायता करती थी।

कामधेनु ने कई राजाओं और ऋषियों की इच्छाएं पूरी कीं। उदाहरण:
– राजा दिलीप ने इसकी पूजा की और पुत्र प्राप्त किया।
– यह गाय लक्ष्मी जी का ही स्वरूप मानी जाती है।

महत्व
कामधेनु समृद्धि, भक्ति और इच्छापूर्ति की देवी है। आज भी हिंदू संस्कृति में “कामधेनु” शब्द का प्रयोग बहुत कुछ पाने वाले स्रोत के लिए किया जाता है।

यह कथा सिखाती है कि सहयोग (देवता-असुर) से महान फल प्राप्त होते हैं, भले ही रास्ता कठिन हो।

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Author: sssrknews

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