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शनिवार विशेष : पीपल पूजा से कैसे शांत होता है शनि का प्रकोप? जानिए पिपलाद ऋषि की अद्भुत कथा

Daily panchang,शनिवार क़ो पीपल की पूजा करने से क्‍यों मिट जाता है शनि का प्रकोप

🌤️ दिनांक – 09 मई 2026
🌤️ दिन – शनिवार
🌤️ विक्रम संवत 2083
🌤️ शक संवत -1948
🌤️ अयन – उत्तरायण
🌤️ ऋतु – ग्रीष्म ॠतु
🌤️ मास – ज्येष्ठ
🌤️ पक्ष – कृष्ण
🌤️ तिथि – सप्तमी दोपहर 02:02 तक तत्पश्चात अष्टमी
🌤️ नक्षत्र – श्रवण रात्रि 11:24 तक तत्पश्चात धनिष्ठा
🌤️ योग – शुक्ल 10 मई रात्रि 02:36 तक तत्पश्चात ब्रह्म
🌤️*राहुकाल – सुबह 09:19 से सुबह 10:57 तक*
🌤️ सूर्योदय – 06:04
🌤️ सूर्यास्त – 07:05
दिशाशूल – पूर्व दिशा मे

शनिवार क़ो पीपल की पूजा करने से क्‍यों मिट जाता है शनि का प्रकोप कैसे आओ जानें

जब किसी इंसान पर शनिदेव की महादशा चल रही होती है तो उसे पीपल की पूजा का उपाय जरूर बताया जाता है। कई बार मन में यह सवाल उठता है कि ब्रम्‍हांड के सबसे शक्तिशाली और क्रूर ग्रह शनि का क्रोध मात्र पीपल वृक्ष की पूजा करने से कैसे शान्‍त हो जाता है।

आज हम आपको बताने जा रहे हैं शनि और पीपल से सम्‍बंधित वह पौराणिक कथा जिसके बारे में आपने शायद ही पहले कभी सुना हो।

पुराणों की माने तो एक बार त्रेता युग मे अकाल पड़ गया था । उसी युग मे एक कौशिक मुनि अपने बच्चो के साथ रहते थे । बच्चो का पेट न भरने के कारण मुनि अपने बच्चो को लेकर दूसरे राज्य मे रोज़ी रोटी के लिए जा रहे थे।

रास्ते मे बच्चो का पेट न भरने के कारण मुनि ने एक बच्चे को रास्ते मे ही छोड़ दिया था । बच्चा रोते रोते रात को एक पीपल के पेड़ के नीचे सो गया था तथा पीपल के पेड़ के नीचे रहने लगा था। तथा पीपल के पेड़ के फल खा कर बड़ा होने लगा था। तथा कठिन तपस्या करने लगा था।

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एक दिन ऋषि नारद वहाँ से जा रहे थे । नारद जी को उस बच्चे पर दया आ गयी तथा नारद जी ने उस बच्चे को पूरी शिक्षा दी थी तथा विष्णु भगवान की पूजा का विधान बता दिया था।

अब बालक भगवान विष्णु की तपस्या करने लगा था । एक दिन भगवान विष्णु ने आकर बालक को दर्शन दिये तथा विष्णु भगवान ने कहा कि हे बालक मैं आपकी तपस्या से प्रसन्न हूँ। आप कोई वरदान मांग लो।

बालक ने विष्णु भगवान से सिर्फ भक्ति और योग मांग लिया था । अब बालक उस वरदान को पाकर पीपल के पेड़ के नीचे ही बहुत बड़ा तपस्वी और योगी हो गया था।

एक दिन बालक ने नारद जी से पूछा कि हे प्रभु हमारे परिवार की यह हालत क्यो हुई है । मेरे पिता ने मुझे भूख के कारण छोड़ दिया था और आजकल वो कहा है।

नारद जी ने कहा बेटा आपका यह हाल शानिमहाराज ने किया है । देखो आकाश मे यह शनैश्चर दिखाई दे रहा है । बालक ने शनैश्चर को उग्र दृष्टि से देखा और क्रोध से उस शनैश्चर को नीचे गिरा दिया । उसके कारण शनैश्चर का पैर टूट गया । और शनि असहाय हो गया था।

शनि का यह हाल देखकर नारद जी बहुत प्रसन्न हुए। नारद जी ने सभी देवताओ को शनि का यह हाल दिखाया था। शनि का यह हाल देखकर ब्रह्मा जी भी वहाँ आ गए थे । और बालक से कहा कि मैं ब्रह्मा हूँ आपने बहुत कठिन तप किया है।

आपके परिवार की यह दुर्दशा शनि ने ही की है । आपने शनि को जीत लिया है। आपने पीपल के फल खाकर जीवंन जीया है । इसलिए आज से आपका नाम पिपलाद ऋषि के नाम जाना जाएगा।और आज से जो आपको याद करेगा उसके सात जन्म के पाप नष्ट हो जाएँगे।

तथा पीपल की पूजा करने से आज के बाद शनि कभी कष्ट नहीं देगा । ब्रह्मा जी ने पिपलाद बालक को कहा कि अब आप इस शनि को आकाश मे स्थापित कर दो। बालक ने शनि को ब्रह्माण्ड मे स्थापित कर दिया।

तथा पिपलाद ऋषि ने शनि से यह वायदा लिया कि जो पीपल के वृक्ष की पूजा करेगा उसको आप कभी कष्ट नहीं दोगे। शनैश्चर ने ब्रह्मा जी के सामने यह वायदा ऋषि पिपलाद को दिया था।

उस दिन से यह परंपरा है जो ऋषि पिपलाद को याद करके शनिवार को पीपल के पेड़ की पूजा करता है उसको शनि की साढ़े साती , शनि की ढैया और शनि महादशा कष्ट कारी नहीं होती है।

शनि की पूजा और व्रत एक वर्ष तक लगातार करनी चाहिए। शनि कों तिल और सरसो का तेल बहुत पसंद है इसलिए तेल का दान भी शनिवार को करना चाहिए। पूजा करने से तो दुष्ट मनुष्य भी प्रसन्न हो जाता है।

तो फिर शनि क्यो नहीं प्रसन्न होगा ? इसलिए शनि की पूजा का विधान तो भगवान ब्रह्मा ने दिया है।

महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र

मार्तंड भैरव तंत्र मे महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र दिया है, काल की मार से बचने के लिये , अकालमृत्यु अपमृत्यु से बचने के लिये, शनि की पीडा से मुक्ति के लिये, शनि के कारण होने वाली असाध्य बिमारी से बचने के लिये आप प्रत्येक शनिवार को या नित्य पूजा मे इसका पाठ कर सकते है!

मूल स्तोत्र बड़ा है जिसमे समस्त राशि नक्षत्र योग करण के न्यास भी है। मूल स्तोत्र विस्तृत होने से उसका मुख्य अंश यहाँ पर प्रस्तुत कर रहा हूं जो सामान्य साधक को भी पढने मे आसान हो .. आप मूल स्तोत्र भी पढ सकते है और सिर्फ यह मुख्य अंश भी पढ सकते है।

शनिदेव ध्यान

ध्यायेत नीलं शनिं घोरं त्रिपुरारिं त्रिदण्डकं
खडगहस्ते दधानंतं वामदक्षिणयो: क्रमात

गृध्रोपरिगतं शुष्कं दीर्घांगं काललोचनं
महाकालं शनिं शंभुं त्रिपुरारिं त्रिलोचनं

महोग्रं क्रूरकर्माणं देवदेवं शनैश्चरम्
चतुर्भुजे: सूर्यसुत: प्रशांत: योगेश्वरं

महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र

ॐ ह्रीं श्रीकालरुपिं नमस्तेस्तु सर्वपापप्रणाशक: !
त्रिपुरस्य वधार्थाय शंभुजाताय ते नम: !!

ॐ नम: कालशरीराय कालन्नुनाय ते नम: !
कालहेतो नमस्तुभ्यं कालनंदाय वै नम: !!

ॐ अखंडदंडमानाय त्वनाद्यन्ताय वै नम: !
कालदेवाय कालाय कालकालाय ते नम: !!

ॐ निमेषादि महाकल्प कालरुपं च भैरवं
मृत्युंजयं महाकालं नमस्यामि शनैश्चरम् !!

ॐ दातारं सर्वभव्यानां भक्तानां अभयंकरं !
मृत्युंजयं महाकालं नमस्यामि शनैश्चरम् !!

ॐ कर्तारं सर्वदु:खानां दुष्टानां भयवर्धनं
मृत्युंजयं महाकालं नमस्यामि शनैश्चरम् !!

ॐ हर्तारं ग्रहजातानां फलानां अघकारिणां
मृत्युंजयं महाकालं नमस्यामि शनैश्चरम् !!

ॐ सर्वेषामेव भूतानां सुखदं शांतिमव्ययं
मृत्युंजयं महाकालं नमस्यामि शनैश्चरम् !!

ॐ कारणंसुखदु:खानां भावाभावस्वरुपिणं
मृत्युंजयं महाकालं नमस्यामि शनैश्चरम् !!

ॐ अकालमृत्युहरणं अपमृत्युनिवारणं
मृत्युंजयं महाकालं नमस्यामि शनैश्चरम् !!

ॐ कालरुपेण संसारं भक्षयंतं महाग्रहं
मृत्युंजयं महाकालं नमस्यामि शनैश्चरम् !!

ॐ दुर्निरिक्ष्यं स्थूलरोमं भीषणं दीर्घलोचनं
मृत्युंजयं महाकालं नमस्यामि शनैश्चरम् !!

ॐ ग्रहाणं ग्रहभूतं च सर्वग्रह निवारणं
मृत्युंजयं महाकालं नमस्यामि शनैश्चरम् !!

ॐ कालस्यवशगा: सर्वेन काल: कस्यचित वश:
तस्मात्वां कालपुरुषं प्रणतोस्मि शनैश्चरम् !!

ॐ कालदेव जगत्सर्वं कालएव विलीयते
कालरुपं स्वयं शंभु: कालात्मा ग्रहदेवतां !!

ॐ चंडीशो रुद्र डाकिन्याक्रांत: चंडीश उच्यते
विद्युदाकलितो नद्यां समारुढो रसाधिप:!!

ॐ चंडीश: शुकसंयुक्तो जिव्ह्या ललित:पुन:
क्षतजस्तामशी शोभी स्थिरात्मा विद्युतयुत: !!

ॐ ह्रीं नमोन्तो मनुरित्येष शनितुष्टिकर: शिवे
आद्यंते अष्टोत्तरशतं मनुमेनं जपेन्नर: !!

!! इति महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्रं !!

ब्रह्म पुराण’ के 118 वें अध्याय में शनिदेव कहते हैं- ‘मेरे दिन अर्थात् शनिवार को जो मनुष्य नियमित रूप से पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उनके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उनको कोई पीड़ा नहीं होगी। जो शनिवार को प्रातःकाल उठकर पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उन्हें ग्रहजन्य पीड़ा नहीं होगी।’ (ब्रह्म पुराण’)
शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय।’ का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है। (ब्रह्म पुराण’)
हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है ।(पद्म पुराण)

नौकरी मिलने में समस्या
जिनको नौकरी नहीं मिलती या मिलती है पर छूट जाती है .. वे लोग शनिवार या मंगलवार या शनिमंगल दोनों दिन पीपल की परिक्रमा करें …हो सके तो अपने हाथ से जल..सादा जल हो उसमें थोड़े काले तिल और एकाध चम्मच गंगा जल डालदें ..वो पीपल में चढ़ा कर जप करते – करते परिक्रमा करें | थोड़ी देर बैठके ध्यान और प्रार्थना करें| आदित्य ह्रदय स्त्रोत्र का पाठ करें | फिर देखो उनकी नौकरी आदि की समस्या कैसे दूर होती है !!

अचार विशेष
खट्टे आम का अचार खाने से लीवर खराब होता है | नींबू का आचार खाया जा सकता है ..खट्टे आम का अचार ज्यादा नहीं खाना |

9 ग्रह 9 आदतें जिंदगी बर्बाद या आबाद
जो काम रोज करते हो, वही ग्रह तय करता है। समझो एक-एक करके

1. पिता से बहस = सूर्य खराब
सूर्य = पिता, आत्मा, राजा, सरकार
पिता से जुबान लड़ाना = सीधे अपने राजा को गाली।
नतीजा: कॉन्फिडेंस डाउन, बॉस से नहीं बनेगी, सरकारी काम अटकेगा, नाम खराब। सरकारी नौकरी/प्रमोशन भूल जाओ।
सुधार: पिता के पैर छुओ, रोज 1 बार “पापा सही हैं” बोलो। रविवार नमक बंद।

2. मां से अनबन = चंद्रमा खराब
चंद्र = मां, मन, पानी, भावना
मां रोई = तुम्हारा मन रोएगा। मां का दिल दुखाना = अपने समुंदर में जहर डालना।
नतीजा: डिप्रेशन, नींद उड़ी, ओवरथिंकिंग, बीपी हाई। रिश्ते टिकेंगे नहीं।
सुधार: सोमवार मां के हाथ का खाना खाओ। चांदी पहनो, दूध दान करो।

3. बेवजह चिल्लाना = मंगल खराब
मंगल = खून, गुस्सा, हिम्मत, जमीन
फालतू गुस्सा = मंगल का पाइप फट गया। एनर्जी गलत जगह बह रही है।
नतीजा: एक्सीडेंट, ऑपरेशन, झगड़ा, पुलिस केस, प्रॉपर्टी में विवाद। भाई से दुश्मनी।
सुधार: मंगलवार हनुमान जी को लाल फूल। लाल मिर्च, लहसुन कम खाओ।

4. गालियां देना = बुध खराब
बुध = जुबान, बुद्धि, व्यापार, हिसाब
गाली = बुध का मुंह काला। जुबान गंदी = दिमाग गंदा।
नतीजा: डील कैंसल, नौकरी में बॉस से झगड़ा, पढ़ाई में मन नहीं, पैसा फंसना।
सुधार: बुधवार गणेश जी को दूर्वा। हरी मूंग दान। बोलने से पहले 3 सेकंड रुक।

5. व्यर्थ ज्ञान बघारना = बृहस्पति खराब
गुरु = ज्ञान, किस्मत, संतान, इज्जत
“मुझे सब आता है” = गुरु को चैलेंज। ज्ञान का घमंड = सरस्वती नाराज।
नतीजा: किस्मत सो जाएगी, संतान से दुख, बिना बात बदनामी, मोटापा।
सुधार: गुरुवार पीले कपड़े, चने की दाल दान। ज्ञान मुफ्त में मत बांटो।

6. वासना की अधिकता = शुक्र खराब
शुक्र = पत्नी, पैसा, गाड़ी, सुख, प्यार
हद से ज्यादा भोग = शुक्र का दिवाला। शरीर ही मंदिर है, उसे कोठा मत बनाओ।
नतीजा: शादी टूटना, शुगर/गुप्त रोग, पैसा पानी की तरह बहना, कार खराब।
सुधार: शुक्रवार सफेद चीज दान। पत्नी को रिस्पेक्ट, परफ्यूम लगाओ।

7. आलस की अधिकता = शनि खराब
शनि = मेहनत, नौकर, लोहा, समय
“कल कर लूंगा” = शनि का फेवरेट डायलॉग। शनि मेहनत का मजदूर है, आलसी से नफरत।
नतीजा: काम लेट, नौकरी जाना, पैर-जोड़ दर्द, गरीबी, मुकदमा।
सुधार: शनिवार तेल दान, मेहनत करो। लेट उठना बंद। मजदूर को खाना खिलाओ।

8. नशे की लत = राहु खराब
राहु = धुआं, नशा, भ्रम, विदेश, साजिश
सिगरेट-शराब = राहु को शरीर में घुसाना। दिमाग में धुआं = जिंदगी में धुआं।
नतीजा: कैंसर, बदनामी, जेल, धोखा, अचानक एक्सीडेंट। दिमाग हमेशा कन्फ्यूज।
सुधार: राहुवार नारियल बहाओ। नीला काला रंग कम पहनो। सफाई रखो।

9. अध्यात्म का अपमान = केतु खराब
केतु = मोक्ष, कुत्ता, गुरु, झंडा, रहस्य
भगवान/गुरु को गाली = केतु का फ्यूज उड़ गया। जड़ काट दी।
नतीजा: बिना वजह डर, नींद में चौंकना, ऑपरेशन, रीढ़ की हड्डी, संतान कष्ट।
सुधार: मंगलवार कुत्ते को रोटी। केसर तिलक। साधु-संत का अनादर कभी मत करो।

दिग्विजय का फाइनल फॉर्मूला

ग्रह कोई आसमान में नहीं बैठा।
ग्रह = तुम्हारी डेली आदत।

पिता को इज्जत = सूर्य स्ट्रॉन्ग।
मां को प्यार = चंद्र स्ट्रॉन्ग।
मुंह बंद = बुध स्ट्रॉन्ग।
मेहनत = शनि स्ट्रॉन्ग।

उपाय से ज्यादा जरूरी परहेज है।
बीमारी रोक लो, दवा की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

एक लाइन: सुधर जाओ = ग्रह सुधर जाएंगे। कुंडली बदलनी है तो पहले करम बदलो।

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Author: sssrknews

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