राष्ट्रपति के हाथों बहादुरी का मेडल पाने वाला एक पुलिस अधिकारी… लेकिन उसी पर लगा अपनी ही महिला साथी पुलिस अफसर को गायब करने का आरोप।
एक लड़की अचानक ड्यूटी से गायब हो जाती है… परिवार को उसके फोन से मैसेज आते रहते हैं कि वह “मेडिटेशन कैंप” में है… लेकिन महीनों बाद उसके लैपटॉप से जो वीडियो मिले, उन्होंने पूरे महाराष्ट्र पुलिस विभाग को हिला कर रख दिया।
क्या कोई इंसान इतना खतरनाक हो सकता है कि कानून की वर्दी पहनकर ही सबसे बड़ा अपराध कर दे?
यह कहानी है अश्विनी बिद्रे की… एक ईमानदार महिला पुलिस अधिकारी, जिसकी जिंदगी बाहर से बिल्कुल सामान्य दिखती थी। लेकिन उसके आसपास धीरे-धीरे एक ऐसा जाल बुना जा रहा था, जिसका अंदाजा शायद उसे खुद भी नहीं था।
10 मई 2016… महाराष्ट्र के कोल्हापुर में रहने वाले रिटायर्ड टीचर नामदेव बिद्रे के पास अचानक मुंबई पुलिस हेडक्वार्टर से एक कॉल आता है।
फोन पर कहा जाता है —
“आपकी बेटी अश्विनी 15 अप्रैल से ड्यूटी पर नहीं आ रही हैं… उन्होंने बिना बताए ऑफिस छोड़ दिया है।”
यह सुनते ही पिता के पैरों तले जमीन खिसक जाती है।
क्योंकि अश्विनी ऐसी लड़की नहीं थी जो बिना बताए कहीं चली जाए।
अश्विनी बिद्रे बचपन से ही बेहद होशियार और अनुशासित थीं। शादी के बाद भी उन्होंने अपने सपनों को नहीं छोड़ा। उन्होंने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की और पुलिस विभाग में सब-इंस्पेक्टर बनीं। मेहनत और ईमानदारी के दम पर वह लगातार प्रमोशन पाती गईं। विभाग में उनकी पहचान एक सख्त लेकिन काबिल अधिकारी की थी।
लेकिन अब वही अफसर अचानक गायब थी।
परिवार ने तुरंत अश्विनी को फोन करना शुरू किया… लेकिन हर बार फोन स्विच ऑफ मिला।
तभी अश्विनी के भाई आनंद ने बताया कि अप्रैल में उसे बहन के नंबर से मैसेज आए थे। मैसेज में लिखा था कि वह “उत्तराखंड के मेडिटेशन कैंप” में जा रही है और कुछ समय अकेले रहना चाहती है।
शुरुआत में परिवार ने खुद को समझा लिया।
शायद सच में वह तनाव में होगी… शायद कुछ दिन अकेले रहना चाहती हो…
लेकिन जल्द ही चीजें अजीब लगने लगीं।
जब परिवार ने अश्विनी के मकान मालिक से बात की, तो उसने बताया कि अप्रैल का किराया तक नहीं दिया गया था।
और 15 अप्रैल के बाद किसी ने अश्विनी को देखा भी नहीं था।
अब डर बढ़ चुका था।
अश्विनी का भाई आनंद तुरंत नवी मुंबई पहुंचा। फ्लैट बंद पड़ा था। आसपास के लोगों से पूछताछ में एक नाम बार-बार सामने आया —
“अभय कुरुंदकर।”
एक सीनियर पुलिस अधिकारी।
अश्विनी का बॉस।
और विभाग का बेहद सम्मानित चेहरा।
लोगों ने कहा कि अगर किसी को अश्विनी के बारे में पता होगा, तो वो अभय सर ही होंगे।
जब आनंद ने अभय से मुलाकात की, तो उसने बेहद शांत अंदाज में कहा —
“अश्विनी काफी तनाव में थी… उसने खुद मेडिटेशन कैंप जाने की बात कही थी… चिंता मत करो, वह वापस आ जाएगी।”
इतना ही नहीं… अभय ने परिवार को पुलिस में शिकायत दर्ज न कराने की सलाह भी दी।
उस समय किसी को अंदाजा नहीं था कि यही सलाह आगे चलकर सबसे बड़ा शक बनने वाली है।
दिन बीतते गए… लेकिन अश्विनी वापस नहीं लौटी।
फिर एक दिन आनंद ने अपनी बहन के पुराने और नए मैसेज दोबारा पढ़ने शुरू किए।
और तभी उसे कुछ अजीब महसूस हुआ।
मैसेज वही नंबर भेज रहा था… लेकिन लिखने का तरीका अलग था।
शब्द अलग थे।
बात करने का अंदाज अलग था।
जैसे कोई और इंसान अश्विनी बनकर बात कर रहा हो।
अब परिवार डर चुका था।
उन्होंने पुलिस स्टेशन जाकर मिसिंग रिपोर्ट दर्ज करवानी चाही… लेकिन हैरानी की बात यह थी कि पुलिस लगातार रिपोर्ट लेने से बचती रही।
एक-दो दिन नहीं… पूरे तीन महीने तक।
आखिरकार दबाव बढ़ने के बाद जुलाई 2016 में मिसिंग रिपोर्ट दर्ज हुई। लेकिन उसके बाद भी जांच में कोई तेजी नहीं दिखाई गई।
परिवार को लगने लगा कि कहीं कुछ बहुत बड़ा छुपाया जा रहा है।
थक-हारकर आनंद ने खुद जांच शुरू की।
वह दोबारा अश्विनी के फ्लैट पर पहुंचा। इस बार उसने ताला तोड़ दिया।
कमरे के अंदर सब कुछ लगभग वैसा ही था…
लेकिन वहां एक लैपटॉप और कुछ डायरी रखी हुई थीं।
आनंद वह सब अपने साथ घर ले आया।
जब लैपटॉप खुला… तो जो सामने आया, उसने पूरे परिवार को अंदर तक हिला दिया।
स्क्रीन पर वीडियो चल रहे थे…
वीडियो में एक आदमी अश्विनी के साथ बेरहमी से मारपीट कर रहा था।
ऑडियो रिकॉर्डिंग्स में धमकियां थीं।
“करियर खत्म कर दूंगा…”
“जान से मार दूंगा…”
और फिर डायरी का आखिरी हिस्सा…
जहां अश्विनी ने लिखा था —
“अगर मुझे कुछ भी होता है… तो उसका जिम्मेदार अभय कुरुंदकर होगा।”
एक ऐसा नाम… जिसे पूरा पुलिस विभाग सम्मान से देखता था।
लेकिन अब सवाल यह था —
क्या सच में एक राष्ट्रपति मेडल पाने वाला पुलिस अधिकारी… अपनी ही साथी अफसर के गायब होने के पीछे हो सकता है






