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प्रतीक यादव का निधन: फिटनेस, तनाव और टूटते रिश्तों के बीच एक दर्दनाक कहानी

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#पारिवारिक_अवसाद

मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के पुत्र, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सौतेले भाई की #संदिग्ध मृत्यु से सभी हतप्रभ है।

प्रतीक यादव का केवल 38 वर्ष की उम्र में अचानक इस दुनिया से चले जाना बेहद दुखद और चौंकाने वाली खबर है। प्रतीक यादव राजनीति से दूर रहने वाले, पढ़े-लिखे और फिटनेस प्रेमी व्यक्ति माने जाते थे। उन्होंने विदेश से शिक्षा प्राप्त की, लखनऊ में आधुनिक जिम और फिटनेस व्यवसाय खड़ा किया और अपनी अलग पहचान बनाई।

बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से उनकी तबीयत खराब चल रही थी, वह डिप्रेशन में भी थे। उनका इलाज मेदांता अस्पताल में चल रहा था।

आज सुबह 5:55 पर उन्हें केजीएमयू में लाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। मृत्यु को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं जिसमें #जहर खाकर #आत्महत्या करना जैसी चर्चा भी है। मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता #पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।

लेकिन यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि आज की उस भागदौड़ भरी और दिखावे वाली जीवनशैली पर भी बड़ा सवाल है जिसमें शरीर को “परफेक्ट” बनाने की होड़ में लोग अपने स्वास्थ्य की असली जरूरतों को भूलते जा रहे हैं।

आज जिम और बॉडी बिल्डिंग का जुनून युवाओं में तेजी से बढ़ा है। कई लोग भारी प्रोटीन, सप्लीमेंट्स, स्टेरॉयड और अत्यधिक वर्कआउट के सहारे शरीर को जरूरत से ज्यादा बदलने की कोशिश करते हैं। बाहर से शरीर मजबूत दिखता है, लेकिन अंदरूनी अंगों पर उसका कितना दबाव पड़ रहा है, यह समय रहते पता नहीं चलता। लगातार वजन बढ़ाना-घटाना, अत्यधिक मसल्स बनाने की दौड़ और मानसिक तनाव शरीर को धीरे-धीरे कमजोर भी कर सकते हैं। और शरीर के साथ-साथ मानसिक रूप से भी व्यक्ति कमजोर होता है सोचने समझने की शक्ति क्षीण होने लगती है

प्रतीक यादव फिटनेस के प्रति बेहद सजग थे, लेकिन जिंदगी सिर्फ शरीर बनाने का नाम नहीं होती। मानसिक शांति, पारिवारिक संतुलन और भावनात्मक स्थिरता भी उतनी ही जरूरी है। पिछले कुछ समय से परिवार में मतभेदों और तनाव की चर्चाएं भी सामने आती रहीं। सोशल मीडिया पर उनकी कुछ पोस्टों में दर्द और अकेलेपन की झलक भी दिखाई देती थी।

एक महीना पहले अपनी पत्नी को लेकर परिवार तोड़ने जैसी पोस्ट में सभी को इस परिवार के अंदर मच रही उथल-पुथल से परिचित कर दिया था। इसमें कोई शक नहीं उनकी कुछ पोस्ट और वीडियो ने स्पष्ट कर दिया था कि वह अपनी पत्नी की तरफ से बेहद मानसिक अवसाद में है।

सबसे दुखद बात यह है कि एक समय उत्तर प्रदेश की राजनीति और समाज में ताकत और प्रभाव का प्रतीक माना जाने वाला यह परिवार भी अंदर से बिखराव, तनाव और दूरी की खबरों से अछूता नहीं रहा।

पैसा, प्रसिद्धि, बड़ी गाड़ियां, आलीशान जिंदगी और ताकत ये सब होने के बावजूद इंसान अंदर से कितना अकेला हो सकता है, यह ऐसी घटनाएं सोचने पर मजबूर करती हैं।

2015 में लखनऊ के गोमती नगर में मनोज पांडे के आवास व मिठाईवाला चौक के पास जब तीन मंजिला #आयरन_कोर_जिम प्रतीक यादव ने शुरू किया तो उसने इटली और अमेरिका से मशीन मंगवाई थी।

हमारा बेटा चिराग भी उसे वक्त लखनऊ अमेटी यूनिवर्सिटी में पढ़ रहा था। उसने भी वही जिम की सदस्यता ली थी जो ₹20000 सालाना के आसपास थी।

हम लोग उस वक्त अखिलेश यादव के 5 कालिदास मार्ग पर अक्सर चले जाया करते थे और मुलायम सिंह यादव जी के लिए ओमवीर सिंह तोमर द्वारा एक पुस्तक भी लिखी गई थी। उस पुस्तक को लिखते हुए स्वयं मुलायम सिंह यादव जी ने ओमवीर सिंह तोमर और हमें सैफई भिजवाया था। वहीं रुकने की और लोगों को जानने की तमाम व्यवस्था कराई थी।

प्रतीक यादव उस समय केबल व्यवसाय से जुड़ चुके थे। डेन कंपनी के केबल बॉक्स ही सब जगह लगते थे उसके पूरे उत्तर प्रदेश के सप्लायर हो चुके थे।
चिराग बताया करता था कि पापा भैया बहुत ही अच्छी नेचर के हैं यानी प्रदीप यादव। वह जिम में आकर प्रत्येक व्यक्ति से चाहे वह छोटा था या बड़ा सबसे मिला करते थे और उन्हें टिप दिया करते थे। अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री होते हुए भी वह बहुत ज्यादा ताम झाम लेकर नहीं चला करते थे।

उनकी शादी उनकी पसंद से हुई थी परंतु वही शादी बाद में मानसिक परेशानी का कारण भी बनती चली है। अर्पणा बिष्ट यादव के बार-बार के बयान अखिलेश परिवार के लिए और उनकी पार्टी के लिए समस्या बनने लगे भाजपा ने अपर्णा यादव का भरपूर लाभ उठाया इससे प्रतीक यादव अंदर ही अंदर बहुत परेशान थे।

वही जिम में प्रैक्टिस कम करते ही उनका शरीर लटकने लगता था, यानी कहीं ना कहीं संभावना यह थी कि प्रोटीन इत्यादि का अत्यधिक सेवन वह करते थे।

ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दे और परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे। साथ ही युवाओं के लिए भी यह एक संदेश है कि फिटनेस अच्छी बात है, लेकिन शरीर को मशीन बनाना और केवल दिखावे की दौड़ में खुद को झोंक देना कभी-कभी बहुत भारी पड़ सकता है।

कुल मिलाकर प्रतीक यादव बहुत अच्छे व्यक्ति थे। बहुत बड़े रसूखदार परिवार से जुड़े होने के बाद भी उनमें घमंड नहीं था। जब स्ट्रीट डॉग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया और उन्हें स्ट्रीट से हटाने की बात कही तो उन्हें बहुत दुख हुआ था। तब वह खुद अस्पताल में एडमिट थे और उन्होंने वहीं से वीडियो जारी कर सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर सवाल उठाते हुए स्ट्रीट डॉग के प्रति चिंता व्यक्त की थी।

स्वस्थ जीवन का मतलब केवल बड़ी बॉडी नहीं, बल्कि संतुलित शरीर, शांत मन और खुशहाल परिवार भी होता है। 🙏

ॐ शांति

ईश्वर प्रतीक यादव की आत्मा को शांति प्रदान करें

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Author: sssrknews

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