Daily panchang,स्कन्द षष्ठी व्रत कथा महत्व पूजा विधि एवं आज का आपका राशिफल ज्योतिष के अनुसार आहार
🌤️ दिनांक – 22 मई 2026
🌤️ दिन – शुक्रवार
🌤️ विक्रम संवत 2083
🌤️ शक संवत -1948
🌤️ अयन – उत्तरायण
🌤️ ऋतु – ग्रीष्म ॠतु
🌤️ मास – अधिक ज्येष्ठ
🌤️ पक्ष – शुक्ल
🌤️ तिथि – षष्ठी सुबह 06:24 तक तत्पश्चात सप्तमी
🌤️ नक्षत्र – अश्लेशा 23 मई रात्रि 02:08 तक तत्पश्चात मघा
🌤️ योग – वृद्धि सुबह 08:19 तक तत्पश्चात ध्रुव
🌤️*राहुकाल – सुबह 10:56 से दोपहर 12:35 तक*
🌤️ सूर्योदय – 05:59
🌤️ सूर्यास्त – 07:11
दिशाशूल – पश्चिम दिशा मे
स्कन्द षष्ठी व्रत कथा महत्व पूजा विधि एवं आज का आपका राशिफल ज्योतिष के अनुसार आहार आओ जानें
हिंदू धर्म में षष्ठी तिथि का विशेष महत्व है, और जब यह अधिक मास के विशेष संयोग में आती है, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है. भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र, युद्ध के देवता भगवान कार्तिकेय (स्कन्द) को समर्पित अधिक स्कन्द षष्ठी का व्रत बेहद फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूरी निष्ठा से व्रत और पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।
स्कन्द षष्ठी महत्व
भगवान कार्तिकेय को मुरुगन, सुब्रमण्य और स्कन्द जैसे कई नामों से जाना जाता है. वे देवताओं के सेनापति हैं, इसलिए उन्हें साहस, शक्ति और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है।
स्कन्दषष्ठी पूजा विधि
स्कन्द षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा पूरे विधि-विधान से करनी चाहिए. व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ या नए वस्त्र धारण करें. हाथ में जल और अक्षत लेकर भगवान कार्तिकेय के सामने व्रत रखने का संकल्प लें. घर के मंदिर या साफ चौकी पर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। भगवान कार्तिकेय को गंगाजल, दूध और दही से स्नान कराएं. इसके बाद उन्हें चंदन, कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाएं. भगवान को लाल रंग के फूल, फल, कलावा, और मिठाई अर्पित करें. पूजा के दौरान ओम स्कन्दाय नमः या ओम कार्तिकेयाय नमः मंत्र का जाप करें. आखिर में कपूर और घी के दीपक से भगवान की आरती करें. शाम के समय भगवान कार्तिकेय का स्मरण करते हुए सूर्य देव और चंद्रमा को अर्घ्य दें।
व्रत आध्यात्मिक
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक स्कन्द षष्ठी का व्रत करने से संतान से जुड़ी सभी परेशानियां दूर होती हैं. यदि जीवन में नकारात्मक ऊर्जा या शत्रुओं का भय परेशान कर रहा हो, तो इस दिन भगवान कार्तिकेय की आराधना करने से अद्भुत आत्मबल और साहस मिलता है. इसके अलावा, यह व्रत गंभीर रोगों से मुक्ति दिलाने में भी सहायक माना गया है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
इस दिन तामसिक भोजन का सेवन पूरी तरह वर्जित होता है. व्रत रखने वाले श्रद्धालु को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और मन में किसी के प्रति द्वेष या क्रोध नहीं लाना चाहिए. यदि हो सकता है तो इस दिन जरूरतमंदों को अन्न या वस्त्र का दान अवश्य करें, इससे पूजा का फल दोगुना हो जाता है।
पितरों के लिए श्री मदभागवत कथा वृन्दावन धाम में
विशेष पुण्यशाली पवित्र अधिकमास के महीने में अपने पित्रों क़ो श्री मदभागवत कथा मूल पाठ श्रवण कराने का पुण्य फल करोड़ों गुणा मिलता है,पितृ प्रसन्न होकर हमें अपना आशीर्वाद देकर जाते हैं,अपने घर परिवार में सुख समृद्धि कारोबार वृद्धि पितृदोष निवारण के लिए पूर्वजों पित्रों के निमित्त श्रीमदभागवत मूल पाठ सप्ताह परायण श्री धाम वृन्दावन में 5 जून से 11 जून तक।
स्थान श्री जी निवास वृन्दावन धाम में आप भी इस पावन विशाल यज्ञ महोत्सव में अपने पित्रों के नाम से भागवत जी की पोथी विराजमान करा सकते है यजमान बनने के लिए आप हमें अति शीघ्र सम्पर्क करें। हमें आप अपने घर से संकल्प स्वरूप अपने पितरों की फोटो और परिवाऱ के नाम गोत्र भेजकर,मूल भागवत पोथी के यजमान बन सकते हैं
कथा में रोजाना भंडारा प्रसादी ठंडाई की सेवा चलती रहेगी और साधु संत ब्राह्मणों की नित्य सेवा होगी आप इस सेवा के हिस्सा भी बन सकते हैं
भागवत कथा प्रवक्ता मूल परम् पूज्य आचार्य श्री रमेश कृष्ण बाबाजी महाराज के श्री मुख से रसपान करेंगे।
यजमान बनने के लिए आप हमें व्ट्सप मैसेज पर सम्पर्क कर सकते हैं
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आज का आपका राशिफल
मेष राशि : आज धनलाभ का योग है। कम बोलें पर अच्छा बोलें। सुख-समृद्धि बढ़ेगी। आर्थिक निवेश में सोच-समझकर निर्णय लेने पर लाभ होगा। स्वाध्याय में रुचि बढ़ेगी। परिवार, समाज में आपका महत्व बढ़ेगा।
वृषभ राशि : व्यापार-व्यवसाय में चल रही उलझनों से परेशान रहेंगे। किसी परिजन के साथ अपने विशेष कार्य की पूर्ति के लिए देव स्थलों का भ्रमण करेंगे। लाभ होने की संभावना बनती है। मित्र मिलन संभव है।
मिथुन राशि : दिन की शुरुआत में क्रोध हावी रहेगा। मन माफिक काम न होने से परिजनों पर नाराज होंगे। नौकरी में नया प्रस्ताव मिलेगा। धार्मिक रुचि बढ़ेगी। व्यापारिक प्रतिस्पर्धा में न पड़ें।
कर्क राशि : निवेश किये धन से अर्जित होने वाले लाभ में विलंब होगा। संतान के लिए निर्णय लेने में दुविधा होगी। अर्थ व्यवस्था बिगडऩे से निर्माण कार्य की गति प्रभावित हो सकती है।
सिंह राशि : कम समय में अधिक लाभ अर्जित करने के चक्कर में न उलझें। मेहनत करें, कार्यस्थल पर आपके पराक्रम की प्रशंसा बढ़ेगी। व्यापार में नई योजनाओं का प्रारंभ होगा। जल्दबाजी नुकसानदायक रहेगी।
कन्या राशि : आज विशेष उन्नतिकारक योगों के कारण मन में प्रसन्नता रहेगी। मन को भक्तिभाव में लगाने की कोशिश करेंगे। कार्यस्थल पर अनुकूल परिणाम के लिए सक्रियता आवश्यक है। भवन निर्माण के लिए ऋण लेना पड़ सकता है।
तुला राशि : आलस को त्याग कर काम करें। रुके कार्य में सफलता मिलेगी। पूंजी निवेश में सोच से अधिक लाभ होगा। अपनी कार्ययोजना और निर्णय पर अमल करना जरूरी है। किसी के प्रति आकर्षित होंगे।
वृश्चिक राशि : आज का पूंजी निवेश लाभदायी रहेगा। कार्यस्थल पर मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। व्यापार में वृद्धि होने के कारण काम आपकी योजनाओं के अनुसार होंगे। वायु विकार से पीडि़त रहेंगे।
धनु राशि : समय रहते जरूरी दस्तावेजों को संभाल लें। सामाजिक कार्यों में सम्मान प्राप्त होगा। स्थायी संपत्ति क्रय करने में जल्दी न करें। परिवार की समस्या का समाधान होगा। निजी कार्य की व्यस्तता रहेगी।
मकर राशि : दैवीय कार्यों में दिन बीतेगा। आज रचनात्मक काम होंगे। नवीन अनुबंध व समझौतों के कारण आपके लाभ में वृद्धि होगी। जनकल्याण की भावना के कारण प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
कुम्भ राशि : पारमार्थिक कार्यों में धन लगेगा। सामाजिक कार्यों से सुयश मिलेगा एवं आप के प्रभाव में वृद्धि होगी। व्यापार अच्छा चलेगा। परिवार से सहयोग मिलने से कार्य आसानी से पूरे होंगे। अपनी पारिवारिक जिम्मेदारी की ओर विशेष ध्यान दें।
मीन राशि : कार्य की सफलता से मनोबल मजबूत होगा। कार्य की अधिकता रहेगी। अजनबी व्यक्ति का विश्वास न करें, धोखा मिल सकता है। कार्यक्षेत्र में वृद्धि के योग है। सक्रिय होने के कारण संबंध व परिचय क्षेत्र बढ़ेगा।
पुरुषोत्तम मास में क्या करें, क्या न करें – सीधे पॉइंट में
पुरुषोत्तम मास = अधिक मास = मलमास। हर 32 महीने बाद आता है। 2026 में 17 मई से 15 जून तक है। इसे भगवान श्रीकृष्ण ने अपना नाम दिया था, इसलिए सबसे पवित्र माना जाता है।
✅ क्या करें – 5 सबसे जरूरी काम
1. श्रीकृष्ण/विष्णु पूजा: रोज सुबह “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” 108 बार। पुरुषोत्तम मास की कथा पढ़ो या सुनो। भागवत का 14वां अध्याय खास माना जाता है।
2. दीपदान: रोज शाम तुलसी के पास या मंदिर में घी का दीया जलाओ। कहते हैं 1 दीप = 1000 दीप का फल।
3. व्रत-नियम: पूरे मास सात्विक खाना। प्याज-लहसुन, मांस, शराब बंद। एक समय भोजन या फलाहार सबसे अच्छा।
4. दान: इस महीने दान का 100 गुना फल मिलता है। अन्न, वस्त्र, छाता, जूता, जल का दान श्रेष्ठ। गौ-सेवा करो।
5. जप-तप: पित्रों के लिए मूल भागवत पाठ,”गोपाल सहस्रनाम”, “पुरुषोत्तम सहस्रनाम” पढ़ो। ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करो।
❌ क्या न करें – 4 बड़ी मनाही
1. शुभ काम वर्जित: शादी, गृहप्रवेश, मुंडन, नया व्यापार, नया मकान-दुकान की नींव – ये सब इस महीने नहीं करते। मलमास में ये “निष्फल” माने जाते हैं।
2. तामसिक भोजन: मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन, राई, मसूर दाल, बैंगन, जमींकंद से बचो।
3. निंदा-झूठ: दूसरों की बुराई, चुगली, झूठ, लड़ाई-झगड़ा। इस महीने किया पाप भी 100 गुना हो जाता है।
4. बाल-नाखून: मान्यता है कि इस मास में बाल कटवाना, नाखून काटना, शेव करना वर्जित है। खासकर रविवार, एकादशी, अमावस्या को तो बिल्कुल नहीं।
सबसे जरूरी बात
शास्त्र कहते हैं – “अधिकस्य अधिकं फलं”। यानी इस महीने थोड़ा सा भी जप, तप, दान का फल करोड़ों गुना मिलता है।
और अगर कुछ न कर पाओ तो सिर्फ रोज “गोवर्धनधरं वन्दे गोपालं गोपरूपिणम्। गोकुलोत्सवमीशानं गोविन्दं गोपिकाप्रियम्॥” ये 1 श्लोक बोल दो।
नोट: ये नियम “काम्य कर्म” यानी इच्छा वाले शुभ कामों के लिए हैं। जन्म, मरण, दैनिक पूजा, श्राद्ध, तीर्थ-यात्रा – ये सब चलते रहते हैं।
आहार” ज्योतिष की नजर से
1- प्रतिपदा को कुष्माण्ड (कुम्हड़ा पेठा) न खाएँ क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है।
2. द्वितीया को छोटा बैंगन व कटहल खाना निषेध है।
3. तृतीया को परमल खाना निषेध है क्योंकि यह शत्रुओं की वृद्धि करता है।
4. चतुर्थी के दिन मूली खाना निषेध है, इससे धन का नाश होता है।
5. पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। अत: पंचमी को बेल खाना निषेध है।
6. षष्ठी के दिन नीम की पत्ती खाना, एवं दातुन करना निषेध है। क्योंकि इसके सेवन से एवं दातुन करने से नीच योनि प्राप्त होती है।
7. सप्तमी के दिन ताड़ का फल खाना निषेध है। इसको इस दिन खाने से रोग होता है।
8. अष्टमी के दिन नारियल खाना निषेध है क्योंकि इसके खाने से बुद्धि का नाश होता है।
9. नवमी के दिन लौकी खाना निषेध है क्योंकि इस दिन लौकी का सेवन गौ मांस के समान है।
10. दशमी को कलंबी खाना निषेध है।
11. एकादशी को सेम फली खाना निषेध है।
12. द्वादशी को (पोई) पुतिका खाना निषेध है।
13. तेरस (त्रयोदशी) को बैंगन खाना निषेध है।
14. अमावस्या, पूर्णिमा, सक्रांति, चतुर्दशी और अष्टमी, रविवार श्राद्ध एवं व्रत के दिन स्त्री सहवास तथा तिल का तेल, लाल रंग का साग तथा कांसे के पात्र में भोजन करना निषेध है।
15. रविवार के दिन अदरक भी नहीं खाना चाहिए।
16. कार्तिक मास में बैंगन और माघ मास में मूली का त्याग करना चाहिए।
17. अंजली से या खड़े होकर जल नहीं पीना चाहिए।
18. जो भोजन लड़ाई झगड़ा करके बनाया गया हो, जिस भोजन को किसी ने लाँघा हो तो वह भोजन नहीं करना चाहिए क्योंकि वह राक्षस भोजन होता है।
19. जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए। यह नरक की प्राप्ति कराता है।






