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नौतपा में कैसे बचना चाहिए और क्या करना आओ जानें

नौतपा कब से शुरू होने जा रहा इस बार नौतपा,इस दौरान किन किन बातों का रखना चाहिए ध्यान,ज्येष्ठ महीना शुरू होने वाला है और ऐसे में अब गर्मी और भी तेज पड़ने वाली है। ऐसे में ज्येष्ठ के महीने में नौतपा भी आता है। सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो इसे नौतपा कहा जाता है।
जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है,नौ दिन तपा देने वाली गर्मी। इस दौरान भीषण गर्मी और लू चलती है। इस अवधि में सूर्य देव की उपासना का विशेष महत्व है। चलिए जानते हैं कि नौपता के 9 दिनों में आपको किन बातों का खासतौर से ध्यान रखना चाहिए।
इस दिन से शुरू होगा नौतपा
साल नौतपा की शुरुआत 25 मई से हो रही है, जो 2 जून तक चलने वाला है। नौतपा में लगभग 9 या 10 दिनों तक भीषण गर्मी पड़ती है, जिसे मानसून के लिए अच्छा माना जाता है।
कर सकते हैं ये काम
सनातन धर्म में नौतपा की अवधि सूर्य देव को प्रसन्न कर कुंडली में सूर्य को मजबूत करने और उत्तम स्वास्थ्य पाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसे में आप इस दौरान सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत होने के बाद सूर्य को अर्घ्य दें और सूर्य देव के मंत्रों का जप करें, जिससे सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। साथ ही इस अवधि में प्याऊ लगवाना और पानी, शरबत, सत्तू, घड़े, छाता, सूती कपड़े, हाथ का पंखा और मौसमी फलों का दान करना विशेष फलदायी माना जाता है।
नौतपा के नियम
नौतपा में मांगलिक कार्यों जैसे शादी, गृह प्रवेश आदि करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे सुख-शांति में बाधा आती है।
इस दौरान जितना हो सके, उतना हल्का भोजन करना चाहिए।
शुभ फलों के लिए आप नौतपा में पक्षियों और पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था कर सकते हैं।
यदि घर के बाहर कोई जरूरतमंद पानी या अन्न मांगे, तो उसे खाली हाथ नहीं लौटाना चाहिए।

▪️︎जीवन का वास्तविक लक्ष्य : हमारे जीवन का एकमात्र लक्ष्य भगवत प्राप्ति और उनकी शरण में रहकर आनंद प्राप्त करना होना चाहिए, न कि केवल सांसारिक सुखों और कामनाओं की पूर्ति।
▪️︎भगवान की शरण का महत्व : भगवान की माया को पार करना कठिन है, लेकिन यदि कोई पूर्ण विश्वास के साथ उनकी शरण में जाता है, तो भगवान स्वयं उसका उद्धार करते हैं।
▪️︎चार प्रकार के भक्त : भगवत गीता में बताया गया है कि चार प्रकार के लोग भगवान का भजन करते हैं—आर्त (संकट में), जिज्ञासु (ज्ञान की इच्छा रखने वाले), अर्थार्थी (धन की इच्छा रखने वाले), और ज्ञानी। भगवान इन सभी को सुकृती मानते हैं क्योंकि वे उनकी शरण में आए हैं।
▪️︎अनुष्ठान और पवित्र आचरण : यदि आपको धन प्राप्ति या संकट से मुक्ति चाहिए, तो भगवान के नाम का जप करें, लेकिन इसके साथ ही आपका आचरण भी पवित्र होना चाहिए। मांस, मदिरा, और पाप-कर्मों का त्याग करना अनिवार्य है। बिना पवित्रता के केवल दिखावे के अनुष्ठान से लाभ नहीं होता।
▪️︎प्रभु पर पूर्ण भरोसा: संकट के समय किसी भी सांसारिक व्यक्ति या शक्ति का सहारा लेने के बजाय एकमात्र प्रभु का भरोसा रखना चाहिए। प्रभु अपने शरणागत भक्तों के संकट दूर करते हैं।

किसी भी व्यक्ति का पीडीऍफ़ मैसेज या लिंक मत खोलें
हम किसी का पीडीऍफ़ मैसेज नहीं खोलते जिनको हम नहीं जानते या बात नहीं होजाए तब तक,क्यों कि
मेरे पास परसों किसी मोबाइल हैकर का पीडीऍफ़ आया,जिसके नंबर से आया मैसेज उसको पता भी नहीं कि उसके नंबर से कोई pdf भेजा है,ज़ब मैंने उसको फ़ोन किया बोला उसको आप खोलना मत मेरा मोबाइल किसी ने हैक करलिया है, इसीलिए किसी भी व्यक्ति का link लिंक पीडीऍफ़ pdf नहीं खोलें और ना किसी क़ो फ़ाइल भेजें ना किसी की खोलें
जो भी आपको किसी क़ो सूचना देनी है या कुछ और भेजना है text मैसेज मेँ लिखें। धन्यवाद 🙏🏻🙏🏻

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Author: sssrknews

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