Home » ताजा खबर » प्रदोष व्रत 2026: जानिए महत्व, पूजा विधि, शुभ उपाय और गुरुवार व्रत के लाभ

प्रदोष व्रत 2026: जानिए महत्व, पूजा विधि, शुभ उपाय और गुरुवार व्रत के लाभ

Daily panchang,प्रदोष व्रत का महत्व क्या है

🌤️ दिनांक – 28 मई 2026
🌤️ दिन – गुरूवार
🌤️ विक्रम संवत 2083
🌤️ शक संवत -1948
🌤️ अयन – उत्तरायण
🌤️ ऋतु – ग्रीष्म ॠतु
🌤️ मास – अधिक ज्येष्ठ
🌤️ पक्ष – शुक्ल
🌤️ तिथि – द्वादशी सुबह 07:56 तक तत्पश्चात त्रयोदशी
🌤️ नक्षत्र – चित्रा सुबह 08:08 तक तत्पश्चात स्वाती
🌤️ योग – वरीयान 29 मई रात्रि 03:25 तक तत्पश्चात परिघ
🌤️*राहुकाल – दोपहर 02:16 से शाम 03:56 तक*
🌤️ सूर्योदय – 05:58
🌤️ सूर्यास्त – 07:13
दिशाशूल – दक्षिण दिशा मे

प्रदोष व्रत का महत्व क्या है आओ जानें

हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महिने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। ये व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। इस बार 28 मई, गुरुवार को प्रदोष व्रत है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। प्रदोष पर व्रत व पूजा कैसे करें और इस दिन क्या उपाय करने से आपका भाग्योदय हो सकता है, जानिए…*
ऐसे करें व्रत व पूजा
– प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शंकर, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराएं।
– इसके बाद बेल पत्र, गंध, चावल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची भगवान को चढ़ाएं।
– पूरे दिन निराहार (संभव न हो तो एक समय फलाहार) कर सकते हैं) रहें और शाम को दुबारा इसी तरह से शिव परिवार की पूजा करें।
– भगवान शिवजी को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं। आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं।
– भगवान शिवजी की आरती करें। भगवान को प्रसाद चढ़ाएं और उसीसे अपना व्रत भी तोड़ें।उस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।
ये उपाय करें
सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद तांबे के लोटे से सूर्यदेव को अर्ध्य देें। पानी में आकड़े के फूल जरूर मिलाएं। आंकड़े के फूल भगवान शिवजी को विशेष प्रिय हैं । ये उपाय करने से सूर्यदेव सहित भगवान शिवजी की कृपा भी बनी रहती है और भाग्योदय भी हो सकता है।
गले की सूझन
*थोडा सा जौ कूटकर थोड़ी देर के लिए पानी में भिगोएँ l फिर पानी को छान के गर्म करें l सहन करने योग्य गर्म पानी से गरारे करने से शीघ्र ही गले की सूझन दूर होती है।

28 मई पुरुषोत्तम मास का दुर्लभ उपाय: शिवलिंग पर चढ़ाएं केसर और पीला चंदन, खुल जाएंगे सफलता के मार्ग

नेत्रज्योति की रक्षा हेतु
भोजन करने के बाद आँखों पर पानी छिडकें तो ठीक हैं, नहीं तो अपनी गीली हथेलियाँ आँखों पर रखें तो भी नेत्र के रोग मिटते हैं |
दोनों हथेलियाँ रगडकर ‘ॐ ॐ ॐ मेरी आरोग्यशक्ति जगे, नेत्रज्योति जगे …. ‘ ऐसा करके आँखों पर रखने से भी आँखों की ज्योति बरकरार रहती है और आँखों के रोग मिटते हैं |

गुरुवार का व्रत
गुरुवार के दिन बेसन , मिश्री ऐसा थोड़ा सा मीठा बना दें ..गुरूजी को भोग लगाया..और थोड़ा खा लिया.. प्रसादके रूप में और पीले वस्त्र अगर हो तो उस दिन पहन सकें तो अच्छा है या पीलेवस्त्र ओढ़ कर सुबह जप करें…शाम को जप करें उस दिन और आम के पेड़ में थोड़ा जल चढ़ा दें | परिक्रमा कर दें | गुरु मंत्र जपे | तो इससे बहुत लाभ होता है
विद्या प्राप्तिमें सहायता
बुद्धि की वृद्धि
धन की स्थिरता
और जो बेटे-बेटी को शादीमें अड़चन आती है…अविवाहित है वो भीये गुरुवार का व्रत करें..वो तो मीठा ही खाये उस दिन नमक-मिर्च ना लें

परिवार में सुख समृद्धि के लिए श्री मदभागवत कथा वृन्दावन धाम में

हमारे द्वारा विशेष पुण्यशाली पवित्र अधिकमास के महीने में अपने पित्रों क़ो श्री मदभागवत कथा मूल पाठ श्रवण कराने का पुण्य फल करोड़ों गुणा मिलता है,पितृ प्रसन्न होकर हमें अपना आशीर्वाद देकर जाते हैं,अपने घर परिवार में सुख समृद्धि कारोबार वृद्धि पितृदोष निवारण के लिए पूर्वजों पित्रों के निमित्त श्रीमदभागवत मूल पाठ सप्ताह परायण श्री धाम वृन्दावन में 5 जून से 11 जून तक।
स्थान श्री जी निवास वृन्दावन धाम में आप भी इस पावन विशाल यज्ञ महोत्सव में अपने पित्रों के नाम से भागवत जी की पोथी विराजमान करा सकते है यजमान बनने के लिए आप हमें अति शीघ्र सम्पर्क करें। हमें आप अपने घर से संकल्प स्वरूप अपने पितरों की फोटो और परिवाऱ के नाम गोत्र भेजकर,मूल भागवत पोथी के यजमान बन सकते हैं

आपके पितरों लिए एक ब्राह्मण देवता द्वारा रोजाना श्रीमदभागवत मूल पाठ और पूजन करेंगे,आपके द्वारा दी हुई सेवा दक्षिणा से उनका सुबह का फलाहार दोपहर और शाम का भोजन प्रसादी,ब्राह्मण वस्त्र और अंतिम दिवस में उनको पाठ करने की दक्षिणा और अधिकमास की वस्तुए देकर विदाई करेंगे।

कथा में रोजाना भंडारा प्रसादी ठंडाई की सेवा चलती रहेगी और साधु संत ब्राह्मणों की नित्य सेवा चलती रहेगी, इस पुण्यकाल महीना पुरुषोत्तम मास में अपने घर बैठे आप भी इन सभी सेवाओं या किसी एक सेवा के सहयोगी बन सकते हैं

भागवत कथा प्रवक्ता मूल परम् पूज्य आचार्य श्री रमेश कृष्ण बाबाजी महाराज के श्री मुख से रसपान करेंगे।

यजमान बनने के लिए आप हमें व्ट्सप मैसेज पर सम्पर्क कर सकते हैं
🙏🏻

sssrknews
Author: sssrknews

इस खबर पर अपनी प्रतिक्रिया जारी करें

Leave a Comment

Share This