👉 पीपल वृक्ष की विधिवत् पूजा और परिक्रमा करने से अक्षय लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
👉 पीपल वृक्ष का उपनयन संस्कार करने से वह कल्पवृक्ष हो जाता है।
👉 किसी भी शुभ दिन में ‘पुरुष अश्वत्थ’ (पीपल) वृक्ष का आरोपण कर उसे 8 वर्षों तक निरन्तर जल देकर पालन करना चाहिए।
👉 पीपल वृक्ष का रोपण करने से व्यक्ति की वंश परम्परा कभी समाप्त नहीं होती, अपितु अक्षय रहती है।
👉 पीपल वृक्ष के आरोपण से समस्त ऐश्वर्य एवं दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
👉 प्रत्येक शनिवार को पीपल वृक्ष की पूजा और परिक्रमा करने से शनि ग्रह की पीड़ा से मुक्ति मिलती है।
👉 प्रबल वैधव्य योग वाली विवाह योग्य कन्या को अश्वत्थ व्रत का अनुष्ठान करना चाहिए। इसी प्रकार पीपल विवाह का भी विधान है।
👉 पीपल का आरोपण चैत्र, आषाढ़, पौष मास तथा गुरु – शुक्र तारा अस्त रहने पर नहीं करना चाहिए। इसके सिवा शुभ दिन देखकर कभी भी कर सकते हैं।
👉 पीपल व्रत या पीपल की सेवा करते समय विष्णु सहस्रनाम, पुरुष सूक्त तथा अश्वत्थ स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।
👉 अश्वत्थ व्रत और पूजा का विषय वर्णन ब्रह्माण्ड पुराण में है।
👉 पीपल का मुख आग्नेय दिशा की ओर होता है।



