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ब्‍याही बेटियां मायके से भूलकर भी न लाएं ये चीजें, वरना बढ़ सकती हैं समस्याएं

ब्‍याही बेटियां मां-बाप के घर से न लाएं ये चीजें एवं शास्त्रों के अनुसार इन 7 पर कभी भी शक नहीं करना चाहिए आओ जानें

हिंदू धर्म और भारतीय परंपरा में शादीशुदा बेटियों को घर से खाली हाथ नहीं भेजा जाता है. बल्कि बेटी-दामाद को तोहफे दिए जाते हैं. इसमें मां-बाप आमतौर पर कपड़े, पैसे, घर-गृहस्‍थी का सामान देते हैं।

*लेकिन कई बार अनजाने में बेटियां मां-बाप के घर से ऐसी चीजें ले आती हैं, जो उनके मायके और ससुराल दोनों को नुकसान देती हैं।

*लिहाजा मायके से आते समय कभी भी वो चीजें न लाएं, जिनकी वास्‍तु और ज्‍योतिष में मनाही की गई है. वरना मायके-ससुराल के रिश्‍तों में खटास आती है. दोनों घरो में गरीबी और नकारात्‍मकता बढ़ती है।

*शादीशुदा महिलाओं को अपने मायके से कुछ चीजें कभी नहीं लानी चाहिए. जानिए ये कौन-सी चीजें है और इन्‍हें लाना क्‍यों वर्जित है।

अचार/झाड़ू:- शादीशुदा बेटियों को मायके से खट्टी चीजें जैसे अचार नहीं लाना चाहिए. ना ही झाड़ू या साफ-सफाई की चीजें लाना चाहिए. इससे ससुराल में उनके रिश्‍ते बिगड़ते हैं।

लोहे और कांच का सामान:- लोहे की चीजों पर शनि का और कांच के सामान पर राहु का प्रभाव रहता है. शादीशुदा महिलाएं मां-बाप के घर से ये चीजें तोहफे में न लाएं. इससे शनि-राहु उनके दांपत्‍य जीवन पर बुरा असर डालने लगते हैं. यदि लाना जरूरी हो तो पैसे देकर बाजार से खरीदकर लाएं।

चाकू, छुरी या धारदार चीजें:- शादीशुदा महिलाएं मायके से चाकू, छुरी, कैंची जैसी धारदार चीजें न लाएं. इससे ससुराल में गरीबी बढ़ती है. पति की तरक्‍की में रुकावट आती है।

कुलदेवी-देवताओं का प्रसाद:- हिंदू धर्म में विवाह के बाद बेटियों को मायके की कुलदेवी या कुलदेवता का प्रसाद खाना वर्जित किया गया है. लिहाजा कभी भी वह प्रसाद न तो ग्रहण करें और ना ही ससुराल ले जाएं. इससे दोनों घरों पर संकट आ सकता है. साथ ही वैवाहिक जीवन में समस्‍याएं आती हैं।

गैस चूल्‍हा:- अग्नि तत्‍व से संबंधित चूल्‍हा भी मायके से न लाएं. ऐसा करना विवाहित जीवन पर अशुभ असर डालता है. शादी के दहेज में भी चूल्‍हा देने की मनाही की गई है।

*यदि कोई सामान लाना बेहद जरूरी हो तो उसे पैसे देकर खरीदकर लाएं, तोहफे में न लें. बाकी ये बातें ज्‍योतिषीय धारणाओं को परंपराओं के आधार पर बताई गई हैं।

शास्त्रों के अनुसार इन 7 पर कभी भी शक नहीं करना चाहिए

कहा जाता है मनुष्य जैसा सोचता है, उसके साथ वैसा ही होता है। इसलिए हमें अच्छी सोच रखने की बात कही जाती है। शास्त्रों में ऐसे 7 लोगों के बारे में बताया गया है, जिन पर यदि हम भरोसा न रखें या जिनके काम पर शंका करें, तो हमें पॉजिटिव रिजल्ट कभी नहीं मिलता। जानिए कौन हैं ये 7 लोग-

श्लोक
देवे तीर्थे द्विजे मंत्रे दैवज्ञे भेषजे गुरौ।
याद्रशी भावना यस्य सिद्धिर्भवति ताद्रशी

1. भगवान

लोगों में देवी और देवताओं को लेकर दो तरह की सोच पाई जाती है- आस्तिक और नास्तिक। जो लोग देव भक्ति में विश्वास रखते हैं, उन्हें आस्तिक कहा जाता है और जो भगवान में विश्वार नहीं रखते उन्हें नास्तिक। कई बार हमारा कोई काम या मनोकामना पूरी न होने पर हम भगवान पर विश्वास करना छोड़ देते हैं। उन पर से हमारी आस्था खत्म हो जाती है। जो लोग देवी-देवताओं में आस्था नहीं रखते हैं, उन्हें अपनी सोच के मुताबिक ही फल मिलता है। आज हमें परेशानियों का सामना क्यों न करना पड़ रहा हो, लेकिन भगवान के प्रति आस्था रखने पर हमें उसका शुभ परिणाम जरूर मिलेगा। इसलिए भगवान के प्रति हमेशा पॉजिटिव सोच रखनी चाहिए।

2. डॉक्टर

कहते हैं बड़े से बड़े रोग का इलाज किया जा सकता है, जरूरत है तो केवल विश्वास रखने की। कई बार लोगों के कहने पर या किसी भी अन्य कारण से कुछ डॉक्टरों या चिकित्सकों को लेकर हमारी सोच नेगेटिव हो जाती है। ऐसे में उस डॉक्टर से हम कितना भी इलाज करवा लें लेकिन हमें उसका कोई असर नहीं होता। यदि हमें अपने रोग से छुटकाना पाना है तो अपने चिकित्सक पर विश्वार करें।

3. गुरु

जीवन में सफलता पाने के लिए एक श्रेष्ठ गुरु का होना बहुत जरूरी माना गया है। गुरु ही मनुष्य को सही और गलत में फर्क करना और उसकी जिम्मेदारियों का पालन करना सिखाता है। जो व्यक्ति अपने गुरु पर या उसकी दी गई शिक्षा पर विश्वास नहीं रखता, उसे जीवन में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अगर पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ गुरु और उसकी शिक्षा का पालन किया जाए तो जीवन में हर सफलता पाई जा सकती है। यदि गुरु की दी गई शिक्षा पर भरोसा न किया जाए तो हमारी सोच के जैसा ही फल भोगना पड़ता है।

4. तीर्थ

तीर्थ स्थानों में खुद भगवान का निवास माना जाता है। तीर्थ स्थानों पर लगभग हर समय भक्तों की भीड़ लगी रहती है, जिसकी वजह से वहां कई परेशानियों का सामना भी करना पड़ जाता है। ऐसे में कभी-कभी तीर्थों के प्रति मनुष्य की भावना नकारात्मक हो जाती है। ऐसी भावना के साथ तीर्थ की यात्रा करने पर भी मनुष्य को उसका पुण्य नहीं मिलता है। यदि उस तीर्थ के प्रति मनुष्य की भावना अच्छी न रहे तो पूरे विधि-विधान से तीर्थ-दर्शन करने पर भी उसका फल नहीं मिलता। इसलिए तीर्थों के लिए मन में हमेशा ही अच्छी भावना रखनी चाहिए।

5. पंडितज़ी या ज्ञानी

शास्त्रों में ब्राह्मणों और ज्ञानियों का बहुत महत्व बताया गया है। किसी भी शुभ काम में ब्राह्मणों की पूजा करने और उन्हें दान देने का भी परंपरा है। परंपराओं का पालन तो हर कोई करता है, लेकिन बहुत ही कम लोग इसे पूरा सम्मान और आदर देते हैं। जो मनुष्य ब्राह्मणों या पंडितों पर विश्वास नहीं करता या उनके लिए अच्छी भावना नहीं रखता, उसे कभी भी अपने दान कर्मों का फल नहीं मिलता है। इसलिए मनुष्य को कभी भी श्रेष्ठ और योग्य पंडितों की योग्यता पर अविश्वास नहीं करना चाहिए।

6. मंत्र

मंत्रों को देवी-देवताओं के करीब पहुंचने के एक आसान तरीका माना जाता है। जो लोग रोज शांत मन और पवित्र भावनाओं से भगवान के मंत्रों का जाप करते हैं, उनकी सारी परेशानियों का हल निश्चित ही होता जाता है। जो मनुष्य घर वालों के दबाव में बिना मन से या मंत्रों में अविश्वास की भावना के साथ उनका उच्चारण करता है, उसे इनका साकारात्मक फल नहीं मिलता। इसलिए मंत्रों का पाठ हमेशा विश्वास और आस्था के साथ करना चाहिए।

7. ब्राह्मण ज्योतिषी

ग्रहों की दशाओं को देख कर मनुष्य के कुंडली दोष और समस्याओं के समाधान बताने वाले ज्ञाता व्यक्ति को ब्राह्मण ज्योतिषी कहा जाता है। कई लोग किसी और के कहने पर या ब्राह्मण ज्योतिषी पर भरोसा न होने पर भी उनके पास चले जाते है। ऐसे में मनुष्य चाहे कितने ही उपाय क्यों न कर ले, लेकिन उसकी परेशानी का हल नहीं निकलता है। मनुष्य जैसी भावना के साथ यह काम करता है, उसी वैसा ही फल मिलता है।

हिंदू धर्म के खास इन पांच सरोवरों में स्नान करने से मिलती है पाप से मुक्ति।

आज भी आपको धरती पर देवी-देवताओं से संबंधित कोई न कोई साक्ष्‍य जरूर मिल जाएंगें।कलियुग में भी धरती पर ऐसे कई चमत्‍क‍ारिक स्‍थल हैं जो ईश्‍वर के चमत्‍कार को सिद्ध करते हैं।

इसी कड़ी में आगे बढ़ते हुए आज हम आपको धरती के कुछ ऐसे सरावरों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका धार्मिक रूप से बहुत महत्‍व है। कहते हैं कि इन सरोवरों में स्‍नान करने से पाप से मुक्ति मिल जाती है।

तो चलिए जानते हैं इन खास सरावरों के बारे में जहाँ पाप से मुक्ति मिलती है :

1 – पंपा सरोवर धार्मिक और ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध पंपा सरोवर मैसूर के पास अनेगुंदी गांव में स्थित है। इस गांव को प्राचीन काल में किष्किन्धा कहा जाता था। इस गांव में पंपा सरोवर है। इसी सरोवर के पास एक शबरी गुफा भी है। कहते हैं कि इसी गुफा में भगवान राम ने शबरी के झूठे बेर खाए थे। पंपा सरोवर का संबंध रामायण काल से बताया जाता है।

2 – नारायण सरोवर भगवान विष्‍णु को समर्पित नारायण सरोवर गुजरात के कक्ष जिले के तहसील लखपत में स्थित है। किवदंती है कि इस सरोवर में स्‍वयं भगवान विष्‍णु ने स्‍नान किया था। पौराणिक ग्रंथों और शास्‍त्रों में भी इस सरोवर के महत्‍व का उल्‍लेख मिलता है।

3 – पुष्‍कर सरोवर अजमेर से 14 किमी की दूरी पर पुष्‍कर में स्थित इस पवित्र सरोवर के पास ब्रह्मा जी ने अपने यज्ञ को संपन्‍न किया था। मान्‍यता है कि इस सरोवर में स्‍नान करने से मोक्ष की प्राप्‍ति होती है। कहते हैं कि भगवान राम ने भी अपने पिता राजा दशरथ की मृत्‍यु के पश्‍चात् इसी सरोवर में उनका श्राद्ध किया था।

4 – बिंदु सरोवर अहमदाबाद से 130 किमी की दूरी पर स्थित बिंदु सरोवर में स्‍नान करने से पाप से मुक्‍ति मिलती है। मान्‍यता है कि इस सरोवर के पास कर्दम ऋषि ने हज़ारों वर्ष तक तपस्‍या की थी। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि इसी स्‍थान पर भगवान परशुराम ने अपनी माता का श्राद्ध भी किया था। इस कारण इस सरोवर का बहुत महत्‍व है।

5 – कैलाश मानसरोवर मान्‍यता है कि कैलाश मानसरोवर में माता पार्वती स्‍नान किया करती थीं। कहते हैं कि इस सरोवर का निर्माण ब्रह्मा जी ने किया था। इसके पास ही भगवान शिव का निवास स्‍थल कैलाश पर्वत भी है। इस कारण इस सरोवर का आध्‍यात्‍मिक महत्‍व कई गुना बढ़ जाता है।

भारत के इन पवित्र सरोवरों में स्‍नान करने से मनुष्‍य को पाप से मुक्ति मिलती है। हज़ारों की संख्‍या में हर साल श्रद्धालु इन पवित्र सरोवरों में स्‍नान कर अपने पापों से मुक्‍ति पाते हैं।

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Author: sssrknews

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