हम और आप एक-एक रुपये का हिसाब रखते हैं ताकि बच्चों की स्कूल फीस और बूढ़े मां-बाप की दवाइयां समय पर आ सकें।
हम पेट्रोल पंप पर ₹100 का तेल भरवाते हैं, तो उसमें भी आधा टैक्स सरकार को देकर आते हैं।
एक छोटा सा घर या कार लेने के लिए हमें 20-20 साल तक बैंक की EMI के आगे घुटने टेकने पड़ते हैं।
तेलंगाना के जल बोर्ड के एक GM (जनरल मैनेजर) साहब की सरकारी तनख्वाह थी सिर्फ ₹80,000 महीना। लेकिन जब उन्होंने अपनी लाडली की शादी की, तो पंडाल से लेकर पकवानों तक में ₹35 करोड़ पानी की तरह बहा दिए। इतनी भव्य शादी देखकर एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) के कान खड़े हुए और उन्होंने साहब के घर का कोना-कोना खंगाला, तो कुबेर का खजाना भी शर्मा गया
बैंक खातों में ₹100 करोड़ का कैश , 18 एकड़ जमीन के कागजात।
दर्जनों प्लॉट्स और आलीशान फ्लैट्स की रजिस्ट्रियां।
किलो के भाव में सोना, चांदी और चमचमाते हीरे।
सोचिए, यह तो सिर्फ एक है जो जाल में फंस गया… न जाने ऐसे कितने ‘मगरमच्छ’ आज भी सिस्टम के तालाब में चैन की बंशी बजा रहे होंगे!
यह पोस्ट किसी एक अधिकारी के भ्रष्टाचार की रिपोर्ट नहीं है, यह देश के हर उस मिडिल क्लास टैक्सपेयर का दर्द है जो सुबह अलार्म बजने से पहले जागता है और रात को थककर चूर होने तक हाड़-तोड़ मेहनत करता है।
और हमारी इसी गाढ़ी कमाई, हमारे ही खून-पसीने के टैक्स के पैसे से सिस्टम की मलाईदार कुर्सियों पर बैठे ये सफेदपोश लोग रातों-रात अरबपति बन जाते हैं। सरकारी विभागों में बिना ‘सुविधा शुल्क’ (रिश्वत) के एक आम आदमी की फाइल आगे नहीं खिसकती, और दूसरी तरफ ठेकों और टेंडरों में करोड़ो की कमीशनखोरी करके ये लोग अपने लॉकर भरते हैं।
एक आम इंसान पूरी जिंदगी कानून और ईमानदारी के दायरे में रहकर गुजार देता है, और आखिरी में उसे क्या मिलता है? सिर्फ महंगाई और कतारों में खड़े होने की मजबूरी। जबकि ये भ्रष्ट अधिकारी जनता के हक का पैसा खाकर सात पीढ़ियों का इंतजाम कर लेते हैं।
खैर, तसल्ली इस बात की है कि अब जांच एजेंसियां और डिजिटल ट्रैकिंग इन दीमकों को बिलों से बाहर खींच रही हैं। लेकिन सिर्फ सस्पेंड होना या कुछ महीने जेल की हवा खाकर जमानत पर बाहर आ जाना इसका इलाज नहीं है।
ऐसे देशद्रोहियों की (जनता का पैसा खाना देशद्रोह ही है) एक-एक इंच संपत्ति तुरंत कुर्क की जाए और उसे सरकारी खजाने में डाला जाए।
इन्हें ऐसी सख्त और मिसाली सजा मिले कि अगली बार टेबल के नीचे से हाथ फैलाते वक्त किसी भी अफसर की रूह कांप उठे।
जब तक कानून का डंडा इन पर बिना किसी रहम के नहीं चलेगा, तब तक एक आम और ईमानदार नागरिक का इस व्यवस्था पर भरोसा बहाल होना नामुमकिन है।
आपकी क्या राय है दोस्तों? क्या हमारे देश में कभी ऐसा सख्त कानून आएगा जो इन भ्रष्ट मगरमच्छों की रीढ़ की हड्डी तोड़ सके? अपने विचार कमेंट में जरूर लिखें और इस आवाज़ को आगे बढ़ाएं।
साभार : सोशल मिडीया






