नई दिल्ली: दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में कथित बड़ी साजिश से जुड़े केस में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। दोनों पर गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज है और वे करीब छह साल से न्यायिक हिरासत में हैं।
दूसरी बार नहीं मिली जमानत
उमर खालिद और शरजील इमाम ने अपनी नई जमानत याचिकाओं में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछली याचिका खारिज किए जाने के बाद भी पिछले छह महीनों में मुकदमे की सुनवाई में बहुत कम प्रगति हुई है। उनका तर्क था कि वे लगभग छह वर्ष से जेल में हैं, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए।
यह दूसरी बार था जब दोनों ने इस मामले में जमानत की मांग की। इससे पहले 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। पिछली सुनवाई में ट्रायल कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर नई जमानत याचिकाओं पर जवाब मांगा था। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने जमानत का विरोध किया।
कोर्ट ने क्या कहा?
फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए आदेश से बंधी हुई है और उसके अनुरूप ही फैसला देना होगा।
कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सुरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने या उसके आदेश की तारीख से एक वर्ष पूरा होने—जो भी पहले हो—के बाद ही उमर खालिद और शरजील इमाम नई जमानत याचिका दायर कर सकते हैं। अदालत ने इसी आधार पर मौजूदा याचिकाओं को सुनवाई योग्य नहीं मानते हुए खारिज कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए थे। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल इस मामले की एफआईआर संख्या 59/2020 की जांच कर रही है।
यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) और गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 के तहत दर्ज किया गया है। इस केस में उमर खालिद और शरजील इमाम के अलावा ताहिर हुसैन, खालिद सैफी, इशरत जहां, मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा, शिफा-उर-रहमान, आसिफ इकबाल तन्हा, शादाब अहमद, तस्लीम अहमद, सलीम मलिक, मोहम्मद सलीम खान, अतहर खान, सफूरा जरगर, फैजान खान और नताशा नरवाल समेत कई अन्य लोग भी आरोपी हैं।






