भारत की जेलों से — अमेरिका में हत्या का नेटवर्क
एक सवाल।
लॉरेंस बिश्नोई 10 साल से भारत की जेल में है।
तो अमेरिका, कनाडा और यूरोप में उसका हत्या का नेटवर्क कैसे चल रहा है?
इस सवाल का जवाब FBI ने दिया।
भारत सरकार ने नहीं।
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Operation Hard Ball
FBI ने अमेरिका, कनाडा और यूरोप की एजेंसियों के साथ मिलकर एक ऑपरेशन चलाया।
नाम — Operation Hard Ball।
तीन महाद्वीप। कई देश। एक साथ।
नतीजा —
24 गिरफ्तारियां।
तीन गैंग बेनकाब हुए —
लॉरेंस बिश्नोई।
जग्गू भगवानपुरिया।
रविंद्र ढांडा।
तीनों के सरगना — भारत की जेलों में बंद।
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FBI ने जो कहा — वह शर्मनाक है
FBI ने साफ कहा —
“भारत की जेलों में बंद इन गैंगस्टरों को जेल के भीतर फोन और इंटरनेट उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं।”
“यह भारत के अधिकारियों को रिश्वत देकर संभव होता है।”
यानी —
साबरमती जेल में बंद बिश्नोई हत्या के आदेश दे रहा है।
सिलचर जेल में बंद भगवानपुरिया दुनिया भर में 1,000 से अधिक गुर्गों का नेटवर्क चला रहा है।
और भारत की पुलिस देखती रही।
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पंजाब पुलिस का वह अधिकारी
होशियारपुर जिले के टांडा थाने का एक SAO — गुरिंदरजीत सिंह नागरा।
भगवानपुरिया गैंग के निर्देश पर —
अमेरिका में रहने वाले एक परिवार से ₹4 करोड़ की फिरौती मांगी गई।
धमकी दी गई —
“पैसे नहीं दिए तो पंजाब में रहने वाले तुम्हारे रिश्तेदारों को हत्या के मामले में फंसा देंगे।”
यह खुलासा किसने किया?
पंजाब पुलिस ने नहीं।
FBI ने।
अब अमेरिका का Attorney इस पुलिस अधिकारी के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है।
भारत का एक पुलिस अधिकारी अमेरिका की जेल जा सकता है।
यह शर्म की बात है।
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वह मामला जिसे FBI ने उजागर किया
जनवरी 2026 में पंजाब के टांडा में AAP नेता बलविंदर सिंह की हत्या हुई।
उसी हत्या के मामले में SAO नागरा एक निर्दोष परिवार को फंसाने की धमकी दे रहा था।
अगर FBI यह मामला सामने नहीं लाती —
तो तीन निर्दोष लोग हत्या के आरोप में जेल में होते।
शायद उनका एनकाउंटर भी हो जाता।
भारत में शिकायत करते रह जाते।
अमेरिका की एजेंसी ने उन्हें बचाया।
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निजर। पन्नू। बाबा सिद्दीकी।
2023 — कनाडा में हरदीप सिंह निजर की हत्या।
2023 — न्यूयॉर्क में पन्नू की हत्या की असफल कोशिश।
2024 — मुंबई में बाबा सिद्दीकी की हत्या।
तीनों मामलों में बिश्नोई गैंग का नाम सामने आया।
तीन साल में भारत सरकार ने क्या किया?
कनाडा से संबंध बिगड़ गए।
अमेरिका से तनाव बढ़ा।
और बिश्नोई जेल में बैठकर अपना नेटवर्क चलाता रहा।
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सवाल जो पूछे जाने चाहिए
गृह मंत्री अमित शाह से —
साबरमती जेल में बंद बिश्नोई तक फोन कौन पहुंचाता है?
BJP शासित राज्य की जेल में यह कैसे संभव है?
असम के मुख्यमंत्री हेमंता विश्वा शर्मा से —
सिलचर जेल से भगवानपुरिया का 1,000 गुर्गों का नेटवर्क कैसे चलता रहा?
प्रधानमंत्री मोदी से —
हर साल पुलिस प्रमुखों के साथ बैठक होती है।
इनकी नाक के नीचे यह सब होता रहा — इसकी जवाबदेही किसकी है?
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भारत की चुप्पी
अमेरिका में इतनी बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई।
भारत से जुड़े एक खतरनाक नेटवर्क की जानकारी सामने आई।
घंटों बाद भी भारत सरकार का कोई बयान नहीं आया।
गृह मंत्रालय चुप।
विदेश मंत्रालय चुप।
कनाडा में भारत के High Commissioner ने केवल इतना कहा —
“गिरफ्तारियों का स्वागत है।”
लेकिन जिनके सरगना आपकी जेलों से नेटवर्क चला रहे हैं —
उनका स्वागत करने से पहले खुद को आईना दिखाइए।
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NRI की छवि दांव पर
अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में लाखों भारतीय रहते हैं।
मेहनत करते हैं।
इज्जत कमाते हैं।
और अब भारत की जेलों से चलने वाले गैंग उनकी छवि पर दाग लगा रहे हैं।
वहां रहने वाले भारतीयों को —
अपनी जमीन की चिंता करनी पड़े।
अपने रिश्तेदारों की सुरक्षा की चिंता करनी पड़े।
और यह सब इसलिए कि भारत की जेलें गैंगस्टरों के लिए ऑफिस बन चुकी हैं।
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एक आखिरी बात
जब पेपर लीक हुआ — शिक्षा मंत्री नहीं हटे।
जब राम मंदिर में घोटाले के आरोप लगे — ट्रस्ट के लोगों ने इस्तीफे दिए।
और जब भारत की जेलों से अमेरिका में हत्याओं का नेटवर्क चलता रहा —
गृह मंत्री अमित शाह मौन रहे।
यह जवाबदेही नहीं है।
यह शर्म है।
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इसे शेयर करें।
क्योंकि जो काम भारत की एजेंसियों को करना था —
वह FBI ने किया।
और यह सवाल हर नागरिक को पूछना चाहिए — आखिर हमारी एजेंसियां कर क्या रही थीं?
गंभीर समस्या है.
साभार: सोशल मीडिया
Diclaimer : इसका हमारी The भारत SSSRK News24x7 समाचार और राष्ट्र दर्शन (सबसे तेज़, सबसे आगे…),
यह एक आंकलन मात्र है…






