“शादी के लिए अच्छा लड़का नहीं मिलता, तो बॉयफ्रेंड कैसे मिल जाते हैं?”
आजकल बहुत सी लड़कियों के मुँह से एक वाक्य ज़रूर सुनने को मिलता है – ” शादी के लिए अच्छा लड़का नहीं मिल रहा है”।
ये वाक्य सुनते ही मेरे मन में हमेशा एक सीधा सवाल उठता है –
तो फिर बॉयफ्रेंड कैसे मिल जाते हैं?
क्योंकि कॉलेज से लेकर ऑफिस तक, बस स्टॉप से लेकर सोशल मीडिया तक, दोस्त बनाने की प्रक्रिया बहुत तेज़ी से चलती है । फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार की जाती है, इंस्टाग्राम पर लाइक्स का लेन-देन होता है। व्हॉट्सऐप पर गुड मॉर्निंग के फूल खिलते हैं और कुछ ही दिनों में सिर्फ “दोस्त” शब्द “स्पेशल फ्रेंड” तक पहुँच जाता है।
तब कोई ऊँचाई नहीं नापता, सैलरी स्लिप नहीं माँगता, बैंक बैलेंस नहीं चेक करता या खुद का घर है या नहीं, ये पूछताछ नहीं करता।
लेकिन जिस पल शादी का विषय निकलता है,
तभी
अचानक सारे मापदंड जाग जाते हैं।
👉🏻
● लड़का लंबा होना चाहिए,
● सैलरी बड़ी होनी चाहिए,
● खुद का घर होना चाहिए,
● चार पहिया गाड़ी चाहिए,
● आदतें अच्छी होनी चाहिए,
● नशा नहीं होना चाहिए,
● सास-ससुर समझदार होने चाहिए
● परिवार छोटा हो, हो सके तो साथ में कोई न रहे
● घर के सभी काम करने हेतु नौकर होने चाहिए
● हमें पहनने ओढ़ने , घूमने फिरने, देर से उठने की पूर्ण स्वतंत्रता होनी चाहिए
● घर के आसपास ( जबकि संसाधन आज पर्याप्त, दूरियां मायने नहीं रखती) 50 – 100 किलोमीटर में ही चाहिए
और
● सबसे ज़रूरी बात – लड़का हैंडसम होना चाहिए ।
👉🏻 मतलब सीधे शब्दों में कहें तो बॉयफ्रेंड के लिए दिल चलता है
और
पति के लिए हिसाब।👈🏻
प्यार में भावनाएँ होती हैं, लेकिन शादी में ज़िम्मेदारियाँ होती हैं ।
बॉयफ्रेंड चुनते समय अक्सर वर्तमान देखा जाता है,
तो
पति चुनते समय भविष्य देखा जाता है।
इसीलिए प्यार के लिए सही लगने वाला व्यक्ति जीवन भर के साथ के लिए सही लगे, ये ज़रूरी नहीं।
👉🏻 आज की असली समस्या “अच्छा पति नहीं मिल रहा”
ये नहीं है,
बल्कि
“परफेक्ट पति ढूँढने का हठ” ये है ।
क्योंकि परफेक्ट इंसान इस दुनिया में कहीं नहीं है ।
हर किसी में कुछ गुण होते हैं, कुछ कमियाँ होती हैं ।
गृहस्थी गुणों के प्रदर्शन पर नहीं चलती, बल्कि कमियों को स्वीकार करने पर चलती है ।
👉🏻 कभी-कभी जो लोग ( मां बाप) कहते हैं कि अच्छे लड़के नहीं मिलते,
👉🏻 उन्हें खुद से भी एक सवाल पूछना चाहिए –
मैं जिन गुणों वाला पति ढूँढ रही हूँ, वो गुण मुझमें कितने हैं?
हमारा स्वयं का स्तर क्या है ?
क्योंकि रिश्ता खरीद-बिक्री का सौदा नहीं होता । वो दो इंसानों का एक-दूसरे के सुख-दुख में खड़े रहने का करार होता है ।
आज के समय में एक अजीब बात दिखती है ।
बॉयफ्रेंड ढूँढते समय हम हँसता हुआ चेहरा देखते हैं,
लेकिन
पति ढूँढते समय बैंक बैलेंस, मकान, संपत्ति देखते हैं।
प्यार में स्वभाव से ज़्यादा आकर्षण ज़रूरी लगता है, तो शादी में इंसान से ज़्यादा उसकी स्थिति।
फिर बाद में शिकायत की जाती है कि अच्छे लोग नहीं मिलते।
सच तो ये है कि अच्छे लोग आज भी हैं, लेकिन उन्हें देखने का नज़रिया बदल गया है।
जिसके पास महंगी गाड़ी नहीं है, लेकिन दिल बड़ा है, वो अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाता है। जिसके पास खुद का घर नहीं है, लेकिन ज़िम्मेदारी का एहसास है, उसे मौका नहीं मिलता।
और
फिर
सालों-साल “सही इंसान” ढूँढने का सफर चलता ही रहता है।
अच्छा ढूँढ रहते हैं और इस चक्कर में उम्र 40 के पार निकल जाती है ।
आखिर में बस इतना ही कहना चाहूंगा।
बॉयफ्रेंड पाना आसान होता है, क्योंकि वहाँ सपने बेचे जाते हैं।
पति पाना मुश्किल लगता है, क्योंकि वहाँ ज़िंदगी जीनी होती है। सपनों में गलतियाँ चलती हैं, लेकिन गृहस्थी में हकीकत स्वीकारनी पड़ती है और हमें अपनी जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं।
इसलिए
अच्छा पति ढूँढने से ज़्यादा अच्छा इंसान पहचानना सीखो।
क्योंकि सुखी गृहस्थी चेहरे से, सैलरी से या गाड़ी से नहीं टिकती; वो भरोसे, स्वभाव, समझदारी और आपसी सम्मान से टिकती है।
और
इसीलिए सवाल
“अच्छा पति कहाँ मिलेगा?”
ये नहीं होना चाहिए,
बल्कि
अच्छा इंसान पहचानने की हमारी नज़र कितनी अच्छी है? ये होना चाहिए ।
यही सवाल समझ आ गया,
तो
शायद अच्छा लड़का /पति ढूँढने की समस्या अपने आप हल हो जाएगी…
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Diclaimer : इसका हमारी The भारत SSSRK News24x7 समाचार और राष्ट्र दर्शन (सबसे तेज़, सबसे आगे…),
यह एक आंकलन मात्र है…






