सिंधु जल संधि पर भारत का सख्त रुख, पुराने नियम नहीं होंगे लागू; नई जल परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार
नई दिल्ली: सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर भारत ने अपना रुख और अधिक सख्त कर लिया है। केंद्र सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, वर्ष 1960 में हुई यह संधि अपने मौजूदा स्वरूप में दोबारा लागू नहीं होगी। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में इस संधि का पुराना ढांचा अब प्रासंगिक नहीं रह गया है।
सूत्रों के मुताबिक, सिंधु जल संधि उस दौर की परिस्थितियों और तकनीकी क्षमताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई थी, जबकि आज के सुरक्षा और रणनीतिक परिदृश्य में हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। उनका कहना है कि यह समझौता आपसी विश्वास और सहयोग की भावना पर आधारित था, लेकिन सीमा पार से जारी आतंकवाद जैसी चुनौतियों को इसमें शामिल नहीं किया गया था।
पाकिस्तान जल संसाधनों का नहीं कर पा रहा प्रभावी उपयोग
सरकारी सूत्रों का दावा है कि पिछले छह दशकों में पाकिस्तान ने अपने हिस्से के जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए कोई बड़ा बांध विकसित नहीं किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह अपने हिस्से के पानी का केवल लगभग 10 प्रतिशत ही संग्रहित कर पाता है, जबकि करीब 50 प्रतिशत पानी बिना उपयोग के अरब सागर में चला जाता है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि भारत की कई जल परियोजनाओं पर पाकिस्तान लगातार आपत्तियां उठाता रहा, जिससे उनके निर्माण में देरी हुई। कश्मीर की तुलबुल परियोजना भी लंबे समय तक इसी कारण आगे नहीं बढ़ सकी। अब भारत नई जल परियोजनाओं को गति देने की तैयारी कर रहा है और विभिन्न स्थानों पर सर्वेक्षण का कार्य जारी है।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद लिया गया बड़ा फैसला
अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्णय लिया था। कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने स्पष्ट संदेश दिया कि आतंकवाद और द्विपक्षीय सहयोग साथ-साथ नहीं चल सकते।
इसके बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ जल प्रवाह संबंधी आंकड़ों का आदान-प्रदान, वार्षिक बैठकें, परियोजनाओं का संयुक्त निरीक्षण और संधि से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भागीदारी जैसी प्रक्रियाएं रोक दीं। साथ ही, जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा और रतले जैसी जलविद्युत परियोजनाओं के कार्य में भी तेजी लाई गई।
आतंकवाद पर कार्रवाई तक बहाली की संभावना नहीं
सूत्रों के अनुसार, भारत का रुख स्पष्ट है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद पर प्रभावी और स्थायी कार्रवाई नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि को उसके पुराने स्वरूप में बहाल करने का कोई सवाल नहीं है।
उधर, भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान में चिंता बढ़ी है, क्योंकि वहां की बड़ी आबादी, कृषि और पेयजल व्यवस्था पश्चिमी नदियों के जल पर निर्भर है। आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए भारत का यह रुख रणनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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