काकोली घोष ने इमरान पर लगाए गंभीर आरोप, सीएम शुभेंदु अधिकारी और विदेश मंत्रालय से जांच की मांग
नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की बागी सांसद काकोली घोष ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर पार्टी नेता इमरान के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। काकोली ने दावा किया है कि इमरान के कथित संबंध बांग्लादेश के कुछ कट्टरपंथी संगठनों से रहे हैं और मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है।
अपने पत्र में काकोली घोष ने कहा कि यदि इमरान पर लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो इसका असर राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक प्रशासन और पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंधों पर पड़ सकता है। उन्होंने मामले को गंभीर बताते हुए संबंधित एजेंसियों से जांच कराने का आग्रह किया है।
पत्र में क्या कहा?
काकोली घोष ने अपने पत्र में लिखा कि इमरान के बांग्लादेश में सक्रिय कुछ चरमपंथी संगठनों से कथित संबंधों की खबरें सामने आई हैं। हालांकि इन दावों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन उनकी सत्यता की जांच आवश्यक है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में चिटफंड घोटालों से जुड़े धन का इस्तेमाल पड़ोसी देशों में लोकतांत्रिक सरकारों को अस्थिर करने वाली गतिविधियों में किए जाने की आशंका है। काकोली ने कहा कि ऐसे आरोपों की गंभीरता को देखते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।
गौरतलब है कि इमरान को पश्चिम बंगाल की पूर्व सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी के समर्थन से राज्यसभा भेजा गया था और वह पहले भी सांसद रह चुके हैं।
TMC में बढ़ता संकट
इस बीच टीएमसी में जारी राजनीतिक उठापटक के बीच काकोली घोष ने दावा किया है कि पार्टी के करीब 20 सांसद बागी गुट के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि कई अन्य सांसद भी उनके संपर्क में हैं और आने वाले दिनों में यह संख्या बढ़ सकती है।
काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि इन सांसदों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन करने का फैसला किया है और अपनी स्थिति से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को अवगत करा दिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि वह अब भी लोकसभा में टीएमसी की मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) हैं और यह फैसला पार्टी के असंतुष्ट सांसदों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद लिया गया है।
काकोली के इन दावों और आरोपों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि टीएमसी नेतृत्व और संबंधित एजेंसियां इन आरोपों पर क्या रुख अपनाती हैं।





