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घर के मंदिर में क्यों नहीं रखते पूर्वजों के फोटो एवं घरेलू नुस्खें उपाय आओ जानें

हमारे हिन्दू धर्म में आस्था का बहुत ही विशेष महत्व है, यहाँ लोग प्रत्येक दिन की पूजा को आवश्यक एवं महत्वपूर्ण मानते है। ऐसा विश्वास है की प्रतिदिन पूजा करने से भगवान प्रसन्न होते है, तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है साथ ही ऐसा करने से मन को शांति प्राप्त होती है।
भगवान की पूजा में उचित एवं उत्तम समानो को प्रयोग में लाना इसका भी ध्यान रखा जाता है, तथा इसके बाद यदि पूजा के लिए कोई महत्वपूर्ण चीज़ होती है तो वह है ऐसा स्थान जंहा पर भगवान की पूजा करी जाती है। जैसे की मंदिर या हमारे घरों में ही बनाए गए भगवान की पूजा के लिए स्थल मंदिर।यह पवित्र हो, कोई अशुद्ध वस्तु यहां ना हो, इस बात का ध्यान रखा जाता है। घर के मंदिर में प्रतदिन परिवार-जन एकत्रित होकर पूजा करना सही मानते हैं और अंत में भगवान को भोग लगाकर सभी में बांटा भी जाता है। हिन्दू घरों में पूजा घर को सदैव स्वच्छ एवं सुगंधित बनाए रखने के प्रयास किए जाते हैं।
किन्तु इसके अतरिक्त भी ऐसी कई बातें हैं जिनसे अनजान हैं लोग। पूजा घर को सजाने के लिए वे हर प्रकार की वस्तुओं का प्रयोग करते हैं, जो उनके हिसाब से तो सही होती हैं किंतु शास्त्रों के अनुसार वे अशुभ हैं। हिन्दू परिवारों के अमूमन पूजा घरों में आप भगवान की मूर्तियों के अतरिक्त कुछ तस्वीरें भी पाएंगे।

जन्मकुंडली में सप्तमेश बाल या मृत अवस्था मे हो तो विवाह में अत्यधिक देरी करता है
जन्मकुंडली में सप्तमेश 0-5 डिग्री में बाल अवस्था एवं 25 – 30 डिग्री में मृत अवस्था मे होता है जिसके कारण वैवाहिक जीवन मे मतभेद रहते है व साझेदारी का व्यवसाय नही फलता
उपाय:- वैवाहिक समस्या हेतु एक गोमती चक्र का ताबीज धारण करे।

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कुछ लोग अपने स्वर्गवासी पूर्वज या फिर परिजनों की तस्वीर भी पूजा घर में लगाते हैं। ऐसा कभी ना करें… शास्त्रों के अनुसार कभी भी मंदिर में स्वर्गवासी हो चुके व्यक्ति की कोई भी वस्तु या तस्वीर तो बिलकुल भी नहीं होनी चाहिए।
यह शास्त्रों की दृष्टि में अशुभ है, इससे आपकी पूजा बेकार होती है और घर-परिवार पर संकट भी आते हैं। कुछ लोग जो अपने स्वर्गवासी परिजनों को बेहद प्रेम करते हैं, वे उनके चले जाने के बाद उन्हें सम्मान देने हेतु मंदिर में उनकी तस्वीर लगाते हैं।
किन्तु वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसा नहीं करना चाहिए। ना केवल पूजा घर में अन्य मूर्तियों के साथ, वरन् पूजा घर की दीवारों पर भी मृत परिजनों की तस्वीर नहीं होनी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से देवी-देवता क्रोधित हो जाते हैं।
वास्तु के अनुसार घर का पूजा स्थल हमें उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए। यदि इसमें नहीं तो आप केवल उत्तर या पूर्व दिशा भी चुन सकते हैं, किंतु उत्तर-पूर्व दिशा पूजा घर के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। वास्तु शास्त्र में मर चुके परिवार के लोगों की तस्वीर कभी भी इन तीन दिशाओं में नहीं लगानी चाहिए।
मृत परिजनों की तस्वीरों को लगाने के लिए घर की दक्षिण,दक्षिण-पश्चिम एवं पश्चिम दिशा ही चुनी जानी चाहिए। यदि इसके अतरिक्त किसी अन्य दिशा में मृत परिजनों की तस्वीर लगाई जाए तो यह घर में नकारात्मक ऊर्जा को लेकर आता है। जो सबसे पहले परिवार के लोगों की मानसिक अवस्था पर अटैक करता है।
अब जब पूजा स्थल उत्तर-पूर्व दिशा में विराजमान हो, तो यहां मृत परिजन की तस्वीर लगाना बिलकुल भी सही नहीं है। यह घर वालों के लिए ही बुरा सिद्ध हो सकता है। लेकिन ना केवल वास्तु शास्त्र में वरन् देवी-देवता से जुड़ी मान्यताओं में भी देव-मूर्तियों के साथ परिवार के सदस्यों की तस्वीर लगाना गलत है।
कुछ लोग जो अपने माता-पिता या अपने से बड़ों से भगवान से भी अधिक प्रेम करते हैं, उन्हें मानते हैं, वे उनकी पूजा करना आरंभ कर देते हैं। उनकी तस्वीर को पूजा घर में स्थापित कर प्रतिदिन उनकी पूजा करते हैं, ऐसा करके वे देवी-देवताओं को क्रोधित करते हैं।
ऐसा कहा गया है कि कोई भी मनुष्य़ देवी-देवताओं से ऊपर नहीं हो सकता। भगवान का स्थान सदैव उच्च है और उच्चतम ही रहेगा। इसलिए उनकी बराबरी में जीवित या फिर मृत हो चुके परिवार के लोगों की तस्वीर रखकर पूजा नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने से देवी-देवता रुष्ट होकर मनोकामना की पूर्ति कभी नहीं करते।
किंतु यह केवल मान्यता है, वास्तु शास्त्र के अनुसार तो पूजा घर में मृत परिजनों की तस्वीर रखनी ही नहीं चाहिए।

घरेलू नुस्खें एवं उपाय

1. चूहों से मुक्ति चूहों को पिपरमिंट की गंध
बिल्कुल पसंद नहीं होती. अगर घर में चूहे उत्पात मचा रहे हैं तो रूई के कुछ फाहों को पिपरमिंट में डाल कर उनके होने की संभावित जगह के पास रख दें. इसकी गंध से उनका दम घुटेगा और वे मर जाएंगे.

2. कॉकरोच से राहत काली-मिर्च, प्याज और
लहसुन को पीसकर मिला लें और इस पेस्ट में
पानी डालकर एक सॉल्यूशन तैयार कर लें. इस
सॉल्यूशन को उन जगहों पर छिड़कें, जहां
कॉकरोच बहुत ज्यादा हैं. इसकी तेज गंध से वे
आपका घर छोड़कर भाग जाएंगे.

3. मक्खी से मुक्ति मक्खियों को दूर रखने के
लिए कोशिश करें कि घर साफ और दरवाजे बंद रहें. बावजूद इसके मक्खियां घर में आ जाएं तो कॉटन बॉल को किसी तेज गंध वाले तेल में डुबोकर दरवाजे के पास रख दें. तेल की गंध से मक्खियां दूर रहती हैं और इस उपाय को आजमाएंगे तो वे आपके घर से तुरंत भाग जाएंगी.

4. खटमल मारो प्याज का रस खटमल को मारने की प्राकृतिक औषधि है. इसकी गंध से उनकी सांस बंद हो जाती है और ये तुरंत मर जाते हैं.

5. छिपकली भगाओ अंडे के खाली छिलकों
को कुछ ऊंचाई पर रख दें. अंडे की गंध से
छिपकली दूर भागती हैं. इनको घर से भगाने का यह एक कारगर उपाय है.

6. अगर आपको कहीं पर भी थूकने की आदत है तो यह निश्चित है कि आपको यश, सम्मान
अगर मुश्किल से मिल भी जाता है तो कभी
टिकेगा ही नहीं . wash basin में ही यह काम
कर आया करें ! यश,मान-सम्मान में अभिवृध्दि
होगी।

7. जब भी हमारे घर पर कोई भी बाहर से आये, चाहे मेहमान हो या कोई काम करने वाला, उसे स्वच्छ पानी ज़रुर पिलाएं !
ऐसा करने से हम राहु का सम्मान करते हैं.! जो
लोग बाहर से आने वाले लोगों को हमेशा स्वच्छ
पानी पिलाते हैं उनके घर में कभी भी राहु का
दुष्प्रभाव नहीं पड़ता.! अचानक आ पड़ने वाले
कष्ट-संकट नहीं आते।

8. घर के पौधे आपके अपने परिवार के सदस्यों जैसे ही होते हैं, उन्हें भी प्यार और थोड़ी देखभाल की जरुरत होती है.!
जिस घर में सुबह-शाम पौधों को पानी दिया
जाता है तो हम बुध, सूर्य और चन्द्रमा का
सम्मान करते हुए परेशानियों का डटकर सामना
कर पाने का सामर्थ्य आ पाता है ! परेशानियां
दूर होकर सुकून आता है। जो लोग नियमित रूप से पौधों को पानी देते हैं, उन लोगों को
depression, anxiety जैसी परेशानियाँ नहीं
पकड़ पातीं.!

9. जो लोग बाहर से आकर अपने चप्पल, जूते, मोज़े इधर-उधर फैंक देते हैं, उन्हें उनके शत्रु बड़ा परेशान करते हैं.!
इससे बचने के लिए अपने चप्पल-जूते करीने से लगाकर रखें, आपकी प्रतिष्ठा बनी रहेगी।

10. उन लोगों का राहु और शनि खराब होगा,
जो लोग जब भी अपना बिस्तर छोड़ेंगे तो
उनका बिस्तर हमेशा फैला हुआ होगा, सिलवटें
ज्यादा होंगी, चादर कहीं, तकिया कहीं,
कम्बल कहीं ?

11. उसपर ऐसे लोग अपने पुराने पहने हुए कपडे़ तकnफैला कर रखते हैं ! ऐसे लोगों की पूरी दिनचर्या कभी भी व्यवस्थित नहीं रहती, जिसकी वजह से वे खुद भी परेशान रहते हैं और दूसरों को भी परेशान करते हैं.!
इससे बचने के लिए उठते ही स्वयं अपना बिस्तर समेट दें.! जीवन आश्चर्यजनक रूप से सुंदर होता चला जायेगा।

12. पैरों की सफाई पर हम लोगों को हर वक्त
ख़ास ध्यान देना चाहिए, जो कि हम में से बहुत
सारे लोग भूल जाते हैं ! नहाते समय अपने पैरों
को अच्छी तरह से धोयें, कभी भी बाहर से आयें तो पांच मिनट रुक कर मुँह और पैर धोयें. आप खुद यह पाएंगे कि आपका चिड़चिड़ापन कम होगा, दिमाग की शक्ति बढे़गी और क्रोध धीरे-धीरे कम होने लगेगा.! आनंद बढ़ेगा।

13. जूठन बिल्कुल न छोड़ें । ठान लें । एकदम तय कर लें। पैसों की कभी कमी नहीं होगी।
अन्यथा नौ के नौ ग्रहों के खराब होने का
खतरा सदैव मंडराता रहेगा। कभी कुछ कभी कुछ करने के काम पड़े रह जायेंगे और समय व पैसा कहां जायेगा पता ही नहीं चलेगा।

पाताल लोक के राजा कौन है

1 अतल👉 अतल लोक मे मयदानव का पुत्र असुरबल निवास करता है जिसने 96 प्रकार की माया रची है।

2 वितल लोक👉 वितल लोक मे हाटकेश्वर महादेव जी अपने सभी पार्षदो और भूतगणो सहित रहते है।वे प्रजापति की सृष्टि की वृद्धि हेतु भवानी के साथ विहार करते रहते है।उन दोनो के प्रभाव से वहा हाट नाम की एक सुंदर नदी भी बहती है।
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3 सुतल लोक👉 वितल लोक के नीचे सुतल लोक है,जहां महायशश्वी,पवित्र कीर्ति भक्त प्रह्लाद के पौत्र और विलोचन के पुत्र राजा बलि निवास करते है , जिनसे वामन अवतार मे भगवान् विष्णु ने तीन पग मे ही तीनो लोक ले लिये थे।

4 तलातल लोक 👉 सुतल लोक से नीचे तलातल लोक है, जहां त्रिपुराधिकारी मयदानव रहता है।मयदानव सभी विषयो का
परम गुरु है।

5 महातल लोक 👉 तलातल लोक से नीचे महातल लोक है , जहां ऋषि कश्यप की पत्नी कद्रू से उत्पन्न अनेक सिरो वाला नागो का एक क्रोधवश नामक एक समुदाय रहता है।उनमे कहुक, तक्षक,कालिया और सुषेण नामक प्रधान
नाग है जिनके बहुत बडे बडे फन है।

6 रसातल लोक 👉 महातल लोक के नीचे रसातल लोक है, जहां पणि नाम के दैत्य और दानव रहते है। ये निवातकवच और कालेय और हिरण्यपुरवासी भी कहे जाते है। इनका देवताओ से सदा ही बैर रहता है।

7 पाताल लोक 👉 सबसे नीचे पाताल लोक है। जहां शंडड, कुलिक,महाशंडड्,धनंजय, श्वेत, धृतराष्ट्र, शंखचूड, कम्बल, अक्षतर और देवदत्त नाम के अत्यंत क्रोधी और बड़े बड़े फनो वाले नाग निवास करते है।जिनमे वासुकि प्रधान है।किसी के 5, 7,10,100 और 1000 तक फन वाले नाग निवास करते है।जिनके चमकते हुए मणि पूरे पाताल लोक को प्रकाशित करती है।

दमा में
आधा ग्राम दालचीनी का चूर्ण शहद या गुड के साथ दिन में १ या २ बार लें | लगातार ३ महीने तक लेने से लाभ होता है |

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देवी-देवताओं की ऐसी मूर्ति या चित्र
देवी-देवताओं की फटी हुई और पुरानी तस्वीरों या खंडित मूर्तियों से भी आर्थिक हानि होती है। उन्हें किसी नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए। इसके अलावा एक ही देवी या देवता की 3-3 मूर्तियां या तस्वीर होने पर वास्तुदोष होता है।

दिमाग कमजोर या पागलपन हो तो
दिमाग कमजोर है अथवा अकेले में मानसिक कल्पनाओ से पागलपन का अंश आ गया है अथवा आलस्य है, चिडचिडा स्वभाव है | ये सब मस्तिष्क.., दिमाग की कमजोरी है, तो ऐसे लोगो को क्या करना चाहिए?
👌🏻 पहली ऊँगली अंगूठे के साथ यूँ मिला दें | ३ ऊँगली सीधी और शवासन में सीधा सो जाये | जीभ थोड़ी बाहर रखे तो बड़े-बड़े इंजेक्शन और दिमाग के जानकर.., स्पेशलिस्ट.. उनसे इतना लाभ नही होगा, जितना ये ज्ञान मुद्रा से हो जायेगा |
चिड़चिड़ापन कंट्रोल | दिमागी.., थोडा पागलपन की शुरुवात हो तो वो कंट्रोल | आलस्य कंट्रोल.., क्रोध कंट्रोल | सुमिरन शक्ति की कमजोरी कंट्रोल और एकाग्रता बढ़ेगी, चंचलता नियंत्रित हो जायेगी | स्नायु में शक्ति बढ़ेगी | लेकिन इसके साथ ममरी बादाम की औषध खा ले तो आये-हाय! कहना ही क्या ||

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Author: sssrknews

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