ईरान युद्ध के बीच ट्रंप को अपने ही देश में झटका, अमेरिकी सीनेट में अटक गया 96 लाख करोड़ रुपये का डिफेंस बिल
ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने ही देश में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। अमेरिकी सीनेट में ट्रंप प्रशासन द्वारा पेश किया गया करीब 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 96 लाख करोड़ रुपये) का रक्षा विधेयक (डिफेंस बिल) आवश्यक समर्थन हासिल नहीं कर सका। डेमोक्रेट सांसदों ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान का विरोध करते हुए इस बिल को आगे बढ़ने से रोक दिया।
डेमोक्रेट्स ने रोका सालाना रक्षा विधेयक
सीनेट में पेश नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (NDAA) अमेरिका का वार्षिक रक्षा विधेयक है। इसमें सेना के जवानों के वेतन में बढ़ोतरी, पेंटागन के बजट में वृद्धि और रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल थे। हालांकि, डेमोक्रेट्स ने साफ कर दिया कि ईरान के खिलाफ जारी युद्ध के बीच वे इस बिल का समर्थन नहीं करेंगे।
50-46 के वोट से बिल हुआ खारिज
सीनेट में हुई वोटिंग में बिल के पक्ष में 50 और विरोध में 46 वोट पड़े, लेकिन आवश्यक बहुमत नहीं मिलने के कारण यह पारित नहीं हो सका। डेमोक्रेट नेता चक शूमर ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि ईरान के साथ युद्ध अब पांचवें महीने में पहुंच चुका है और ऐसी स्थिति में रक्षा बजट बढ़ाने वाले इस प्रस्ताव का समर्थन करना उचित नहीं है।
चक शूमर ने ट्रंप सरकार पर साधा निशाना
चक शूमर ने कहा कि “नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (NDAA) ईरान में हो रही लापरवाही को मंजूरी देने का माध्यम नहीं बन सकता।”
उन्होंने आगे कहा, “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी जनता को ऐसी जंग में और गहराई तक नहीं धकेल सकते, जिसे वे न तो ठीक से समझा पा रहे हैं और न ही खत्म करने की कोई स्पष्ट रणनीति बता रहे हैं। इसके बावजूद वे कांग्रेस से उम्मीद करते हैं कि वह इन सवालों को नजरअंदाज कर दे।”
मिड-टर्म चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल
यह मतदान ऐसे समय हुआ जब व्हाइट हाउस ने कांग्रेस को औपचारिक रूप से जानकारी दी कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक बार फिर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच लागू युद्धविराम समाप्त हो गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए सैन्य अभियान का असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। पेट्रोल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव, महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता जैसे मुद्दे आगामी मिड-टर्म चुनाव से पहले ट्रंप प्रशासन की चुनौतियां बढ़ा सकते हैं। वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है।
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