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मासिक शिवरात्रि 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व और चमत्कारी उपाय

मासिक शिवरात्रि व्रत कथा महत्व पूजा विधि आओ जानें :

भगवान शिव को समर्पित एक मासिक व्रत है, जो कृष्ण पक्ष चतुर्दशी के नाम से जाने जाने वाले घटते चंद्रमा के चौदहवें चंद्र दिन को मनाया जाता है। यह समय स्वयं को ब्रह्मांडीय लय के साथ संरेखित करने का एक पवित्र समय है। यह व्रत भक्तों को उपवास, मंत्र जाप और रात्रि जागरण के माध्यम से नियमित आध्यात्मिक अनुशासन में संलग्न होने में सक्षम बनाता है। ऐसा माना जाता है कि यह अनुष्ठान मन, शरीर और आत्मा को संतुलित करता है, भगवान शिव के प्रति भक्ति को मजबूत करता है और भक्तों को वैराग्य और आध्यात्मिक जागरूकता विकसित करने में मदद करता है।

मासिक शिवरात्रि 2026 13 जून शनिवार को है

आयोजन के लिए 26 दिन शेष हैं।

शिवरात्रि पूजा समय : 14 जून, 12:05 पूर्वाह्न – 14 जून, 12:48 पूर्वाह्न

शिवरात्रि व्रत क्या है?
मासिक शिवरात्रि व्रत महज उपवास और रात्रि जागरण से कहीं अधिक है; यह चंद्र पंचांग पर आधारित एक ब्रह्मांडीय सामंजस्य साधना है, जिसका उद्देश्य भक्तों की आंतरिक लय को शिव के विघटन और नवीकरण के चक्रों के साथ सामंजस्य स्थापित करना है। यह व्रत मन और तंत्रिका तंत्र पर कार्य करता है, तीनों गुणों (सत्व, रजस और तमस) को संतुलित करने और गहरे जड़ जमाए कर्मिक अशुद्धियों को दूर करने में सहायक होता है। मध्यरात्रि का समय अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है और ऐसा माना जाता है कि इस समय शिव की चेतना सबसे अधिक सुलभ होती है। इस दौरान, भक्त ॐ नमः शिवाय का जाप करते हैं, स्तोत्रों का पाठ करते हैं और स्थायी आंतरिक परिवर्तन के लिए जल, दूध और बिल्व पत्र अर्पित करते हैं।

मासिक शिवरात्रि क्या है?
मासिक शिवरात्रि क्या है और शिवरात्रि क्यों मनाई जाती है? एक ही सवाल के दो अलग अलग पक्ष है। जैसा की हमने ऊपर बताया कि शिवरात्रि शिव की महान रात्रि को कहा जाता है, जो हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। मान्यताओं के अनुसार शिवरात्रि को ही भगवान शिव पहली बार शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे, कहा जाता है शिवलिंग के रूप में भगवान शंकर पहली बार प्रकट हुए थे। ईशान पुराण के अनुसार फाल्गुन के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन भगवान शंकर पहली बार प्रकट हुए, जिसे हम महाशिवरात्रि के रूप में मनाते हैं। इसी क्रम को आगे बढ़ाने पर हमारे कुछ ज्योतिष और मुनियों ने यह जाना कि हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी भगवान शिव की आराधना और साधना के लिए सबसे उपयुक्त होता है। हर चंद्र मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है।

शिवरात्रि पूजा विधि
मासिक शिवरात्रि का पूजा विधान इस दिन से एक दिन पहले यानी त्रयोदशी के दिन से शुरू हो जात है। त्रयोदशी के दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा आराधना करें और मासिक शिवरात्रि व्रत का संकल्प लें। चतुर्दशी के दिन निराहार रहकर व्रत करें और भगवान शिव का किसी पवित्र नदी का जल चढ़ाएं। फिर पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें और शिवपंचाक्षर मंत्र ओम नमः शिवाय का जाप करते हुए पूजा करें। दिन बीत जाने के बाद रात्रि के चारों पहर में शिव की पूजा करें और अगले दिन सुबह जरूरतमंद लोगों को भोजन या दान दक्षिण देकर अपना व्रत का पारण करें।

मासिक शिवरात्रि का महत्व
शिव महिमा से संबंधित कई पौराणिक ग्रंथों में मासिक शिवरात्रि के महत्व और उससे संबंधित लाभों का उल्लेख मिलता है। मान्यताओं के अनुसार मासिक शिवरात्रि को बेहद प्रभावशाली माना गया है। इस दिन उपवास रखने और भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा आराधना करने से सारी मनुष्य की सभी मनोमनाएं पूरी होती है। शिवरात्रि व्रत कथा में बताया गया है कि इस व्रत को रखने और विधि विधान के साथ प्रभु की पूजा करने वाले लोगों के जीवन की सभी समस्याएं स्वतः ही दूर हो जाती है। मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत करने वाले लोगों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। यदि किसी व्यक्ति को विवाह में बाधाएं आ रही हो तो उसकी सभी परेशानियां मासिक शिवरात्रि के उपवास से दूर हो जाती हैं। मासिक शिवरात्रि के दिन शिव चालीसा पढ़ने का भी बहुत महत्व होता है। शिव चालीसा के पठन से शरीर में पैदा होने वाली तरंगे व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक समस्याओं से बचाने का काम करती है।

मासिक शिवरात्रि पर करें उपाय

कर्ज-मुक्ति के लिए मासिक शिवरात्रि
13 जून 2026 शनिवार को मासिक शिवरात्रि है।
हर मासिक शिवरात्रि को सूर्यास्‍त के समय घर में बैठकर अपने गुरुदेव का स्मरण करके शिवजी का स्मरण करते- करते ये 17 मंत्र बोलें, जिनके सिर पर कर्जा ज्यादा हो, वो शिवजी के मंदिर में जाकर दिया जलाकर ये 17 मंत्र बोले।इससे कर्जा से मुक्ति मिलेगी
🌷 1).ॐ शिवाय नम:
🌷 2).ॐ सर्वात्मने नम:
🌷 3).ॐ त्रिनेत्राय नम:
🌷 4).ॐ हराय नम:
🌷 5).ॐ इन्द्र्मुखाय नम:
🌷 6).ॐ श्रीकंठाय नम:
🌷 7).ॐ सद्योजाताय नम:
🌷 8).ॐ वामदेवाय नम:
🌷 9).ॐ अघोरह्र्द्याय नम:
🌷 10).ॐ तत्पुरुषाय नम:
🌷 11).ॐ ईशानाय नम:
🌷 12).ॐ अनंतधर्माय नम:
🌷 13).ॐ ज्ञानभूताय नम:
🌷 14). ॐ अनंतवैराग्यसिंघाय नम:
🌷 15).ॐ प्रधानाय नम:
🌷 16).ॐ व्योमात्मने नम:
🌷 17).ॐ युक्तकेशात्मरूपाय नम:
आर्थिक परेशानी से बचने हेतु
हर महीने में शिवरात्रि (मासिक शिवरात्रि – कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी) को आती है | तो उस दिन जिसके घर में आर्थिक कष्ट रहते हैं वो शाम के समय या संध्या के समय जप-प्रार्थना करें एवं शिवमंदिर में दीप-दान करें ।
और रात को जब 12 बज जायें तो थोड़ी देर जाग कर जप और एक श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें।तो आर्थिक परेशानी दूर हो जायेगी।
प्रति वर्ष में एक महाशिवरात्रि आती है और हर महीने में एक मासिक शिवरात्रि आती है। उस दिन शाम को बराबर सूर्यास्त हो रहा हो उस समय एक दिया पर पाँच लंबी बत्तियाँ अलग-अलग उस एक में हो शिवलिंग के आगे जला के रखना |बैठ कर भगवान शिवजी के नाम का जप करना प्रार्थना करना, | इससे व्यक्ति के सिर पे कर्जा हो तो जल्दी उतरता है, आर्थिक परेशानियाँ दूर होती है ।

धन-धान्य व सुख-संम्पदा के लिए

14 जून 2026 रविवार को दर्श अमावस्या एवं 15 जून, सोमवार को अधिक ज्येष्ठ अमावस्या है।
हर अमावस्या को घर में एक छोटा सा आहुति प्रयोग करें।
सामग्री : १. काले तिल, २. जौं, ३. चावल, ४. गाय का घी, ५. चंदन पाउडर, ६. गूगल, ७. गुड़, ८. देशी कर्पूर, गौ चंदन या कण्डा।
विधि: गौ चंदन या कण्डे को किसी बर्तन में डालकर हवनकुंड बना लें, फिर उपरोक्त ८ वस्तुओं के मिश्रण से तैयार सामग्री से, घर के सभी सदस्य एकत्रित होकर नीचे दिये गये देवताओं की १-१ आहुति दें।
आहुति मंत्र
🌷 १. ॐ कुल देवताभ्यो नमः
🌷 २. ॐ ग्राम देवताभ्यो नमः
🌷 ३. ॐ ग्रह देवताभ्यो नमः
🌷 ४. ॐ लक्ष्मीपति देवताभ्यो नमः
🌷 ५. ॐ विघ्नविनाशक देवताभ्यो नमः
आर्थिक लाभ,बुद्धिलाभ और पुण्यलाभ एक साथ
15 जून 2026 सोमवार को सूर्योदय से सुबह 08:23 तक सोमवती अमावस्या है।
दरिद्रता मिटाने हेतु
जिनको रोजी – रोटी में बरकत न पड़ती हो वे सोमवती अमावस्या के दिन मौन रहकर प्रात: स्नान करें तो १००० गोदान का फल मिलेगा और पीपल देवता की १०८ परिक्रमा करें तथा प्रार्थना करें : ‘हे वृक्षराज ! आपकी जड़ में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और शिखर में शिव तत्व हैं, आपको मेरा नमस्कार है | आप मेरे द्वारा की हुई पूजा को स्वीकार करें और मेरे पापों का हरण करें |’ इससे आरोग्य भी प्राप्त होगा |
ऐसे ही तुलसी की १०८ परिक्रमा करें और प्रार्थना करें : ‘हे तुलसी माँ ! आप मेरे घर की दरिद्रता – दीनता नष्ट करें |’
दरिद्रता मिटाने के लिए तथा जो नौकरीवाले लोग हैं या जो काम-धंदे में विफल हुए हैं अथवा जिनको किसीसे कुछ लेना बनता है और रुका हुआ है उनके लिए यह बहुत जरूरी है |
➡️ पायें जप का दस लाख गुना लाभ
सोमवती अमावस्या को किया हुआ जप सूर्यग्रहण के समान १० लाख गुना फलदायी होता है | चौदस की रात्रि को जप करते-करते सोना और सुबह उठकर थोडा शांतमय जप में बैठना | जप की संख्या बढ़ाना नहीं, जप के अर्थ में शांत होते जाना |
करोड़ काम छोड़कर सोमवती अमावस्या को हरि का भजन और तुलसी की परिक्रमा तुम्हे करनी ही चाहिए | कोई महिला मासिक धर्म में हो तो उसको छुट है , बाकी के लोग यह जरुर करना | इससे आपको बहुत लाभ होगा | आर्थिक लाभ होगा, बुद्धिलाभ होगा और पुण्यलाभ भी होगा |

मोरपंख का महत्त्व
ज्योतिष में मोरपंख को सभी नौ ग्रहों का प्रतिनिधि माना गया है, विशेष तौर पर मोरपंख के कुछ ऐसे उपाय बताए गए हैं जिन्हें किसी शुभ मुहूर्त में करने से सभी समस्याओं से तुरंत छुटकारा मिल जाता है।

श्रीकृष्ण का श्रृंगार मोर पंख के बिना अधूरा ही लगता है। वे अपने मुकुट में मोर पंख भी विशेष रूप से धारण करते हैं।

मोर पंख का संबंध केवल श्रीकृष्ण से नहीं, बल्कि अन्य देवी-देवताओं से भी है। शास्त्रों के अनुसार मोर के पंखों में सभी देवी-देवताओं और सभी नौ ग्रहों का वास होता है।

प्राचीन काल में एक मोर के माध्यम से देवताओं ने संध्या नाम के असुर का वध किया था। पक्षी शास्त्र में मोर और गरुड़ के पंखों का विशेष महत्व बताया गया है।

आइये जानते हैं मोर पंख आपके जीवन को किस तरह सुख- समृद्धि से भर देता है-
* मोर का शत्रु सर्प है. अत: ज्योतिष में जिन लोगों को राहू की स्थिति शुभ नहीं हो उन्हें मोर पंख सदैव अपने साथ रखना चाहिए।

* आयुर्वेद में मोर पंख से तपेदिक, दमा, लकवा, नजला और बांझपन जैसे दुसाध्य रोगों में सफलता पूर्वक चिकित्सा बताई गई है।

* जीवन में मोर पंख से कई तरह के संकट दूर किये जा सकते हैं. अचानक कष्ट या विपत्ति आने पर घर अथवा शयनकक्ष के अग्नि कोण में मोर पंख लगाना चाहिए. थोड़े ही समय में सकारात्मक असर होगा।

* धन-वैभव में वृद्धि की कामना से निवेदन पूर्वक नित्य पूजित मन्दिर में श्रीराधा-कृष्ण के मुकुट में मोर पंख की स्थापना करके/करवाकर 40वें दिन उस मोर पंख को लाकर अपनी तिजोरी या लॉकर में रख दें. धन-संपत्ति में वृद्धि होना प्रारम्भ हो जायेगी। सभी प्रकार के रुके हुए कार्य भी इस प्रयोग से बन जाते हैं।

* जिन लोगों की कुण्डली में राहू-केतु कालसर्प योग का निर्माण कर रहे हों उन्हें अपने तकिये के खोल में 7 मोर पंख सोमवार की रात्रि में डालकर उस तकिये का उपयोग करना चाहिए साथ ही शयनकक्ष की पश्चिम दिशा की दीवार पर मोर पंखों का पंखा जिसमें कम से कम 11 मोर पंख लगे हों लगा देना चाहिए।

इससे कुण्डली में अच्छे ग्रह अपनी शुभ प्रभाव देने लगेंगे और राहू-केतु का अशुभत्व कम हो जायेगा।

* अगर बच्चा जिद्दी होता जा रहा हो तो उसे नित्य मोर पंखों से बने पंखे से हवा करनी चाहिए या अपने सीलिंग फैन पर ही मोर पंख पंखुड़ियों पर चिपका देना चाहिए।

* नवजात शिशु के सिरहाने चांदी के तावीज में एक मोर पंख भरकर रखने शिशु को डर नहीं लगेगा नजर इत्यादि का डर भी नहीं रहेगा।

* कोई शत्रु ज्यादा तंग कर रहा हो मोर के पंख पर हनुमान जी के मस्तक के सिंदूर से मंगलवार या शनिवार रात्रि में उस शत्रु का नाम लिखकर के अपने घर के मन्दिर में रात भर रखें।

प्रात:काल उठकर बिना नहाये-धोये बहते पानी में बहा देने से शत्रु-शत्रुता छोड़कर मित्रवत् व्यवहार करने लगता है. इस तरह मोर पंख से हम अपने जीवन के अमंगलों को हटाकर मंगलमय स्थिति को ला सकते हैं।

माता-पिता व बुजुर्गों की सेवा क्यों करनी चाहिये

अपने माता-पिता की सेवा न करने वाला, अपने माता-पिता को परेशान करने वाला, उन्हें दुःखी करने वाला कभी महान नहीं बन सकता है।
ऐसा व्यक्ति आध्यात्मिक मार्ग में तो कभी भी तरक्की नहीं कर सकता। श्रीमद् भागवतम् के अनुसार गोकर्ण जब काफी लम्बी तपस्या के बाद घर आये तो उन्होंने देखा कि उनका घर तो सुनसान पड़ा है। एक दम विरानी छायी हुई है।

उन्होंने जब भीतर प्रवेश किया तो एक दम खाली था, उनका घर। किसी प्रकार से रात रुकने की व्यवस्था की। रात को बहुत डरावनी आवाज़ें उन्हें आने लगीं। जैसे अचानक कोई जंगली सूयर उनके कमरे के अन्दर भागा आ रहा हो। फिर उल्लू व बिल्ली के रोने की आवाज़ें आने लगीं।
गोकर्ण समझ गये की यह क्या है? वे कड़कती आवाज़ में बोले – कौन हो तुम? क्या बात है?
गोकर्ण की कड़कड़ती आवाज़ सुन कर, अचानक रोने की आवाज़ आने लगी। दिख कुछ नहीं रहा था, बस आवाज़ आ रही थी।
फिर वो आवाज़ बोली – भाई! मैं धुंधकारी हूँ। मैं आपका भाई धुंधकारी। मैं बहुत कष्ट में हूँ। मैं बहुत परेशान हूँ। मुझे भूख लगती है, मैं कुछ खा नहीं सकता हूँ। प्यास लगती है तो भी मैं पी नहीं पाता हूँ। हालांकि मेरा शरीर नहीं है किन्तु मुझे ऐसा ही लगता रहता है जैसे मैं जल रहा हूँ। हवा के थपेड़ों से मैं कभी इधर होता हूँ तो कभी उधर। मैं एक स्थान पर टिक भी नहीं पाता हूँ। मेरे भाई! मैं बहुत कष्ट में हूँ। मैं एक प्रेत बन गया हूँ।
गोकर्ण जी कहते हैं — धुंधकारी! तुम प्रेत कैसे हो सकते हो? तुम्हारा तो गया तीर्थ में, पिण्ड दान किया है, मैंने।

धुंधकारी – मैंने पिताजी को इतना परेशान किया की वे सह नहीं पाये, और मेरी वजह से जंगलों में चले गये। उनके जाने के बाद मैं शराब के लिये, मीट इत्यादि खाने के लिये, माँ से पैसे लेता था। माँ, जब मना करती थी तो मैं माँ को मारता था। माँ मेरे अत्याचारों से, मेरे खराब व्यवहार से, इतना दुःखी हुई की उसने कुएँ में छलांग लगा कर आत्म-हत्या कर ली।
भैया! जिसने अपने माता-पिता को इतना कष्ट दिया हो, उसका पिण्ड दान से कल्याण कैसे हो सकता है? भैया! आप कुछ और उपाय सोचें।
धुंधकारी का कैसे भला हो सकता है, उसके लिये गोकर्णजी ने सूर्य देव से

सलाह की। सूर्य देव जी ने कहा – गोकर्ण! भगवद्- भक्ति ही, श्रीमद् भागवतम् कथा अथवा श्रीकृष्ण की कथा ही धुंधकारी का कल्याण कर सकते हैं, और अन्य कोई उपाय नहीं है।
उसके उपरान्त श्रीगोकर्ण जी ने गाँव के सभी लोगों को इकट्ठा कर, श्रीमद् भागवतम् कथा का आयोजन किया। भगवान श्रीकृष्ण की महिमा कीर्तन का अयोजन किया। वहीं पर एक बांस गाढ़ दिया, ताकि उसमें धुंधकारी रह सके। हवा के थपेड़ों की वजह से वो हरिकथा से वंचित न हो।
इस तरह श्रीकृष्ण महिमा श्रवण करके, श्रीमद् भागवतम् की कथा सुनकर धुंधकारी का कल्याण हुआ।
अन्यथा उसने तो जीवन में इतने पाप किया थे, कि उनसे मुक्त होना उसके लिये असम्भव था। क्योंकि जिन माता-पिता ने हमें जन्म दिया, जिन माता-पिता ने इतने कष्टों के साथ हमें पढ़ाया-लिखाया, बड़ा किया, जिन माता-पिता ने हमारे सुख के लिये अपने सुखों को छोड़ा, उन माता-पिता की अगर कोई सेवा न करे, उन माता-पिता को कोई कष्ट दे अथवा परेशान करे तो भगवान कैसे सहन करेंगे?
इसलिये माता-पिता की सेवा न करने वाला, माता-पिता को परेशान करने वाला, अपने माता-पिता को कष्ट देने वाला कभी भी महान नहीं बन सकता।

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Author: sssrknews

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