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नेहरू बनाम मोदी: एक व्यंग्यात्मक तुलना के 11 दिलचस्प बिंदु

नेहरू और मोदी जी …
बंधुओ ! गत 2-3 दिन से सोशल मीडिया में नेहरू और मोदी जी के कार्यकाल की तुलना की जा रही है। मेरे विचार से यह बिल्कुल अनुचित है । क्योंकि नेहरू जी ने जो काम किए हैं, मोदी जी वह सोच भी नहीं सकते थे। भले ही मोदीजी अब नेहरू जी से भी अधिक कार्यकाल वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री हैं लेकिन निम्नलिखित महत्वपूर्ण 11 बिंदुओं से आप समझ सकते हैं कि नेहरू जी मोदी जी से महान 😀क्यों थे –

1- नेहरू जी वह महान हस्ती थे जिनको कांग्रेस के 15 प्रतिनिधियों में से एक ने भी प्रधानमंत्री बनाने के लायक नहीं समझा । लेकिन उस समय के चुनाव अधिकारी एक महात्मा थे और उन्होंने आंखें बंद कर अपने शिष्य के सिर पर हाथ फेर दिया और नेहरू जी प्रधानमंत्री बन गए । जबकि मोदी जी को प्रधानमंत्री बनने के लिए लगभग 40 वर्ष तक संघर्ष करना पड़ा, तब जाकर वह पूर्ण बहुमत 272 सीटें लेकर प्रधानमंत्री बने।

2- नेहरू जी इतने महान थे कि वह केवल स्वयं ही प्रधानमंत्री नहीं बने बल्कि उन्होंने अपने भाई चिन्ना को भी प्रधानमंत्री बनाकर ही दम लिया । जून 1947 में कांग्रेस के अधिवेशन में यह तय हो गया था कि भारत का बंटवारा नहीं होगा। लेकिन नेहरू जी ने अधिवेशन के तीसरे दिन अपने महात्मा जी को बुलाकर वीटो पावर लगाया और फिर अपने भाई जिन्ना को भी अपने साथ प्रधानमंत्री बनाया। दूसरी ओर मोदी जी हैं जो 12 साल मुख्यमंत्री रहे और 12 साल प्रधानमंत्री। लेकिन उनके भाई आज भी अहमदाबाद में राशन की दुकान चला रहे हैं उनकी अन्य भाई सामान्य लोगों की तरह जी रहे हैं। जबकि नेहरू जी ने अपने भाई को भी प्रधानमंत्री बनाकर एक महान कार्य किया भले ही उसके लिए भारत माता का बंटवारा करना पड़ा।

3- नेहरू जी ने अपने भाई शेख अब्दुल्ला और उनके वंशजों के लिए कश्मीर को अनुच्छेद 370 देकर सुरक्षित कर दिया था । लेकिन मोदी जी ने उस अनुच्छेद 370 को हटाते समय यह भी नहीं सोचा कि इससे नेहरू जी और कांग्रेसियों की आत्माओं को कितना कष्ट हो रहा होगा।

4- स्वतंत्रता के समय भारतीय फुटबॉल खिलाड़ियों के पास पहनने के लिए जूते तक नहीं थे । उस समय नेहरू जी अपनी सिगरेट मंगवाने के लिए भारत सरकार का जहाज तक भेजते थे। जबकि मोदी जी उन खिलाड़ियों को गले लगाकर उन्हें हर तरह की सुविधा देकर नेहरू जी को चिढ़ाते रहते हैं।

5- नेहरू जी भाई भतीजावाद तक सीमित नहीं रहते थे बल्कि वह अपने पड़ोसी देशों का भी ध्यान रखते थे। जब संयुक्त राष्ट्र संघ से भारत को स्थाई सदस्यता मिल रही थी, तो उन्होंने उसे अपने वामपंथी भाई चीन को दे दिया। दूसरी ओर मोदी जी हैं जिनके सिपाही चीन के बॉर्डर में जाकर उनको मुक्का मारकर भगा रहे हैं।

6- नेहरू जी की उदारता के कई उदाहरण है। उन्होंने चीन को अक्साई चिन दे दिया । पाकिस्तान को पीओके दे दिया। तिब्बत, चीन को दे दिया । नेपाल भारत में मिल रहा था लेकिन वह नहीं होने दिया। दूसरी ओर मोदी जी हैं जो चिकन नेक को भी चौड़ा कर रहे हैं और निकोबार में जाकर समुद्र में भी अपनी निगरानी करवा रहे हैं तथा अरुणाचल प्रदेश जहां कांग्रेसी प्रधानमंत्री हेलीकॉप्टर नहीं उतार पाते थे, वहां ब्रहम्मोस्त्र खड़ा कर रहे हैं।

7- नेहरू जी समाजवादी थे। वह चाहते थे कि सड़कों पर सब एक समान चले । इसलिए उन्होंने सड़क निर्माण पर अधिक ध्यान नहीं दिया। जबकि मोदी जी हाईवे और एक्सप्रेस वे बनाकर संपन्न साधन लोगों को गरीबों से अलग कर रहे हैं।

8- नेहरू जी 1961 में चीन से पूरी तरह हार गए थे। लेकिन उन्होंने हार को हार नहीं माना और भारत रत्न का तमगा अपने गले में ही खुद ही लटकाकर दुनिया को दिखा दिया वह हार को कैसे जीत में बदल सकते हैं। दूसरी और मोदी जी हैं जिनको अब तक 32 देशों ने अपने देश का सर्वोच्च नागरिक का सम्मान दिया है । फिर भी वह कभी नेहरू जी की तरह उन तमगों को अपने गले में नहीं लटकाते हैं ।

9- नेहरू जी कभी नहीं चाहते थे कि अयोध्या में भगवान श्री रामलला मंदिर का ताला खुले। लेकिन मोदी जी ने वहां भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनाकर नेहरू जी की आत्मा को कितनी ठेस पहुंचाई होगी।

10- नेहरू जी प्रकृति प्रेमी थे। वह चाहते थे कि हर भारतीय खुले में शौच करे। लेकिन मोदी जी ने घर चर शौचालय बनाकर नेहरू जी की भावनाओं को आहत किया है।

11- नेहरू जी एडबिना सहित अपनी महिला मित्रों को विदेशी शराब और मंहगी सिगरेट दिखाकर बताते थे कि भारत कितना वैभवशाली है। वहीं मोदी जी कवल एक मेलोडी चॉकलेट से नेहरू जी के किए कराए पर पानी फिर देते हैं।

भारत माता की जय

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Author: sssrknews

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