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16 जून 2026 का पंचांग: चंद्र दर्शन का शुभ मुहूर्त, जानें आज का राशिफल और वास्तु टिप्स

Daily panchang,घर के दरबाजे पर दोनों साइडों में पत्थर के हाथी लगाने से घर में आती हैं सुख समृद्धि

🌤️ दिनांक – 16 जून 2026
🌤️ दिन – मंगलवार
🌤️ विक्रम संवत 2083
🌤️ शक संवत -1948
🌤️ अयन – उत्तरायण
🌤️ ऋतु – ग्रीष्म ॠतु
🌤️ मास – ज्येष्ठ
🌤️ पक्ष – शुक्ल
🌤️ तिथि – द्वितीया रात्रि 12:52 तक तत्पश्चात तृतीया
🌤️ नक्षत्र – आर्द्रा शाम 04:12 तक तत्पश्चात पुनर्वसु
🌤️ योग – वृद्धि रात्रि 12:35 तक तत्पश्चात ध्रुव
🌤️*राहुकाल – शाम 04:01 से शाम 05:41 तक*
🌤️ सूर्योदय – 05:58
🌤️ सूर्यास्त – 07:20
दिशाशूल – उत्तर दिशा मे

घर के दरबाजे पर दोनों साइडों में पत्थर के हाथी लगाने से घर में आती हैं सुख समृद्धि कैसे आओ जानें

वास्तु शास्त्र और फेंगशुई के अनुसार, घर के मुख्य द्वार पर दोनों ओर पत्थर के हाथी रखना अत्यधिक शुभ माना जाता है। ये मुख्य रूप से सौभाग्य, सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह,और सुरक्षा के प्रतीक होते हैं।घर के दरवाजे पर हाथियों की मूर्ति लगाने के मुख्य कारण और लाभ निम्नलिखित हैं रक्षा और नकारात्मक ऊर्जा का निवारण मुख्य द्वार को ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना जाता है। बाहर की ओर मुख किए हुए हाथियों का जोड़ा एक मजबूत सुरक्षा कवच बनाता है, जो बुरी नजर,दुर्भाग्य और नकारात्मक ऊर्जा को घर के अंदर आने से रोकता है।
सुख समृद्धि और धन का आगमन
भारतीय संस्कृति और वास्तु में हाथी देवी लक्ष्मी और ऐश्वर्य का प्रतीक हैं। सूंड ऊपर उठाए हुए हाथी घर में धन, सफलता और बरकत आकर्षित करते हैं।
शक्ति और ज्ञान हाथी को ज्ञान,धैर्य और असीम शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इन्हें द्वार पर रखने से घर में स्थिरता और पारिवारिक सौहार्द बना रहता है।
सम्मान और स्वागत ये मेहमानों के लिए गर्मजोशी और सकारात्मक स्वागत का भाव प्रदर्शित करते हैं।रख-रखाव के महत्वपूर्ण वास्तु टिप्स
हाथियों की सूंड हमेशा ऊपर की दिशा में होनी चाहिए (यह विजय और समृद्धि का संकेत है)।
यदि आप उन्हें बाहर से घर के अंदर आते हुए लगाना चाहते हैं, तो उनका मुख घर के केंद्र की ओर होना चाहिए।यदि आप अपने घर के प्रवेश द्वार के लिए हाथियों का जोड़ा चुनने और उनकी सटीक दिशा तय करने के बारे में और अधिक जानकारी चाहते हैं,तो मुझे बता सकते हैं।

ज्योतिष और स्त्रियों के कुछ महत्त्वपूर्ण योग

महिलाओं से सम्बंधित कछ महत्त्वपूर्ण योग, कुंडली के विभिन्न योग, विधवा योग, तलाक योग, पति से सम्बंधित कुछ योग, सुख योग, दुखी जीवन योग, बंध्यापन के योग, संतति योग

स्त्री का पुरुष के जीवन में बहुत ही मुख्य स्थान है, इसी कारण ज्योतिष में स्त्री वर्ग पर भी पर्याप्त विचार किया जाता है।
जहां तक पुरुष और नारी के सहज सनातन संबंधों का प्रश्न है, ज्योतिष उन्हें अभिन्न अंग मानकर विचार करता है. कुंडली का सातवा स्थान एक दुसरे का सूचक है अर्थान स्त्री और पुरुष के कुंडली में सातवाँ स्थान एक दुसरे का प्रतिनिधित्व करता है।

यहाँ हम स्त्री की कुंडली में स्थित ग्रहों को थोडा समझने का प्रयास करे –

1. लग्न और चन्द्रमा , मेष , मिथुन , सिंह तुला धनु, कुम्भ, राशियों में स्थित हो तो स्त्री में पुरुषोचित गुण जैसे बलिष्ट देह, मुछों की रेखा, क्रूरता, कठोर स्व, आदि होते हैं. चरित्र की दृष्टि से इनकी प्रशंसा नहीं की जा सकती है . क्रोध और अहंकार भी इनके प्रकृति में होता है।
2. लग्न और चन्द्रमा के सम राशियों में जैसे वृषभ , कर्क, कण, वृश्चिक, मकर, मीन में हो तो स्त्रियोंचित गुण पर्याप्त मात्रा में होते है . अच्छी देह, लज्जा, पति के प्रति निष्ठा , कुल मर्यादा के प्रति आस्था, आदि प्रकृति में रहते है।
3. स्त्री के कुंडली में सातवे स्थान में शनि हो और उस पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो तो उसका विवाह नहीं होता।
4. सप्तम स्थान का स्वामी शनि के साथ स्थित हो या शनि से देखा जा रहा हो तो बड़ी उम्र में विवाह होता है।

विधवा योग :
1. जन्म कुंडली में सातवे स्थान में मंगल हो और उस पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो तो विधवा योग बनता है। ऐसी लड़कियों का विवाह बड़ी उम्र में करने पर दोष कम हो जाता है।
2. आयु भाव में या चंद्रमा से सातवे स्थान में या आठवे स्थान में कई पाप गृह हो तो विधवा योग होता है।
3. 8 या 12 स्थान में मेष या वृश्चिक राशि हो और उसमे पाप गृह के साथ राहू हो तो विधवा योग होता है।
4. लग्न और सातवे स्थान में पाप गृह होने से भी विधवा योग बनता है।
5. चन्द्रमा से सातवे , आठवे, और बारहवे स्थान में शनि , मंगल हो और उन्पर भी पाप ग्रहों की दृष्टि हो तो विधवा योग अबंता है।
6. क्षीण या नीच का चन्द्र 6 या 8 स्थान में हो तो भी विधवा योग बनता है
7. 6 और 8 स्थान का स्वामी एक दुसरे के स्थान में हो और उन पर पाप ग्रहों की दिष्टि हो तो विधवा योग बनता है।
8. सप्तम का स्वामी अष्टम में और अष्टम का स्वामी सप्तम में हो और इनमे से किसी को पाप गृह देख रहा हो तो विधवा योग बनता है।

तलाक योग :
1. सूर्य का सातवे स्थान में होना तलाक की संभावनाए बनता है।
2. सातवे स्थान में निर्बल ग्रहों के होने से और उनपर शुभ ग्रहों के होने से एक पति स्वर तलाक देने पर दुसरे विवाह के योग बनते है।
3. सातवे स्थान में शुभ और पाप दोनों गृह होने से पुनर्विवाह के योग बनते है।

पति से सम्बंधित कुछ योग :
1. लग्न में अगर मेष ,कर्क,तुला ,मकर राशि हो तो पति परदेश में रहने वाला होता हो या घुमने फिरने वाला होता हो।
2. सातवे स्थान में अगर बुध और शनि स्थित हो तो पति पुरुश्त्वहीन होता हो।
3. सातवे स्थान खाली हो और उस पर किसी गृह की दृष्टि भी न हो तो पति नीच प्रकृति का होता है।

सुख योग :
1. बुध और शुक्र लग्न में हो तो कमनीय देह वाली , कला युक्त, बुध्हिमान और पति प्रिय होती है।
2. लग्न में बुध और चन्द्र के होने से चतुर, गुणवान, सुखी और सौभाग्यवती होती है।
3. लग्न में चन्द्र और शुक्र के होने से रूपवती , सुखी परन्तु ईर्ष्यालु होती है।
4. केंद्र स्थान के बलवान होने पर या फिर चन्द्र,, गुरु और बुध इनमे से कोई 2 गृह के उच्च होने पर तथा लग्न, में वरिश, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर, मीन, होतो समाज्पूज्य स्त्री होती है।
5. सातवे स्थान में शुभ ग्रहों के होने से गुणवती, पति का स्नेह प्राप्त करने वाली और सौभाग्य शाली स्त्री होती है।

बंध्यापन के योग :
1. सूर्य और शनि के आठवे स्थान में होने से बंध्या होती है।
2. आठवे स्थान में बुध के होने से एक बार संतान होकर बंद हो जाती है।

संतति योग :
1. सातवे स्थान में चन्द्र या बुध हो तो कन्याये अधिक होंगी।
2. सातवे स्थान में राहू हो तो अधिक से अधिक 2 पुत्रियाँ होंगी पुत्र होने में बढ़ा हो।
3. नवे स्थान में शुक्र होने से कन्या का योग बनता है।
4. सातवे स्थान में मंगल हो और उसपर शनि की दृष्टि हो अथवा सातवे स्थान में शनि , मंगल, एकत्र हो तो गर्भपात होता रहता है।

आज का आपका राशिफल

मेष राशि : मन लगाकर काम करें। व्यापार-व्यवसाय उत्तम रहेगा। निजी समस्या का समाधान होगा। परिजनों में असंतोष का वातावरण रहेगा। भूमि-आवास की समस्याओं से परेशान रहेंगे। आर्थिक चिंता रहेगी। महमानों का आवागमन बना रहेगा।

वृषभ राशि : कर्म के प्रति पूर्ण समर्पण व उत्साह आप को महत्वपूर्ण पद दिलवा सकता है। बुद्धि एवं तर्क से कार्यस्थल पर अपना वर्चस्व स्थापित करेंगे। व्यापार में नई योजनाओं से लाभ होगा।

मिथुन राशि : आज वाणी पर नियंत्रण रखें। सकारात्मक विचारों के कारण प्रगति के योग बनेंगे। कार्यपद्धति में बदलाव होगा। नौकरी में आपके विरुद्ध षड्यंत्र होगा।

कर्क राशि : आजीविका में नए प्रस्ताव मिलेंगे जो आपके लिए शुभ रहेंगे। मित्रों में वर्चस्व बढ़ेगा। साहस, पराक्रम में वृद्धि संभव है। व्यापार में नए प्रस्तावों से लाभ की संभावना बनती है। अनाज, तेल, पोहा और किराना व्यापारियों के लिए समय उतार-चढ़ाव वाला है।

सिंह राशि : दिन उपयुक्त है। किसी विशेष कार्य के होने से ईश्वर पर आस्था बढ़ेगी। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। पूर्व में किए कार्यों के शुभ परिणाम देखने को मिलेंगे। वाणी पर संयम रखते हुए कार्य करें।

कन्या राशि : अपनी आदतों से जीवनसाथी से तालमेल स्थापित नहीं हो सकेगा। आजीविका के क्षेत्र में प्रगति के योग बन रहे हैं। प्रसन्नता व आशाजनक वातावरण के कारण प्रयास सार्थक होंगे। आज भेंट-उपहार आदि की प्राप्ति संभव है।

तुला राशि : वाहन सुख मिलेगा। आर्थिक निवेश में सावधानी रखें। शीत से संबंधी विकार हो सकते हैं। कार्यस्थल पर सही निर्णय ले पाएंगे। मित्रों से आर्थिक मदद प्राप्त होगी।

वृश्चिक राशि : आज आपके प्रयासों से आजीविका में परिवर्तन अथवा नवीन अवसर प्राप्त हो सकेंगे। जोखिम के कार्यों से दूर रहना चाहिए। शिक्षा के क्षेत्र में सफलता मिलेगी। प्रशासनिक लोगों से मेल-जोल बढ़ेगा।

धनु राशि : अपने काम करने के तरीकों को बदलें भाइयों से विवाद होंगे। दिन मिश्रित फलदायी रहेगा। निजी जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ेगी। आकस्मिक लाभ होने के योग बन रहे हैं। सत्कर्म में रुचि रहेगी।

मकर राशि : आजीविका के नए साधन मिलेंगे। वाणी संयम रखें। यात्रा संभव है। दाम्पत्य जीवन सुखद रहेगा। आर्थिक तंगी से जरूरी काम बाधित होंगे। संतान के व्यवहार से दु:ख होगा।

कुम्भ राशि : मन की बात कहने से शांति मिलेगी। वाहन खरीदने का मन सार्थक होगा। आलस हावी रहेगा। मन में किसी निर्णय को लेकर दुविधा रहेगी। माता- पिता से जरूरी वार्तालाप होगी।

मीन राशि : धन प्राप्ति के स्रोत स्थापित होने के योग हैं। किसी विशेष वस्तु की प्राप्ति के लिए धैर्य एवं संयम बना रहेगा। स्वास्थ्य के प्रति सावधानी रखें। कार्यस्थल के विरोधी परास्त होंगे। यात्रा निरस्त होगी।

चार बच्चे पैदा करने के २७ सबसे बड़े लाभ

१– पारिवारिक रिश्ते काका- काकी, ताऊ-ताईजी, मौसी-मौसाजी, जेठजी जेठानी जी, मामा-मामी जी, नाना-नानीजी बुआ-फूफाजी, देवर-देवरानी, भतीजा-भतीजी, भाणजा-भाणजी, दोहिता-दोहित्री आदि बने रहेंगे।

२– घर में आए दिन कोई ना कोई उत्सव होते रहेंगे।

३– घर में जब भी कोई बड़ा काम होगा तो घर में उसे करने के लिए पर्याप्त लोग होंगे।

४– कोई एक बच्चा यदि गलत काम करेगा तो बाकी तीन बच्चों की उस पर नजर रहेगी।

५– बुढ़ापे में मां बाप को किसी काम के लिए इधर उधर नहीं भागना पडेगा।

६– ४ बच्चे होंगे तो कोई भी उनसे लड़ने से पहले ४ बार सोचेगा।

७– ४ बच्चे होंगे तो मां बाप की ज़िम्मेदारी बढ़ जाएगी और वे फालतू का खर्च नहीं करेंगे।

८– ४ बच्चे होने से सरकारी स्कूलों की अहमियत बढ़ेगी और प्राईवेट संस्थाओं की लूट बंद होगी।

९– ४ बच्चे होने से मां बाप चारों बच्चों के लिए भविष्य में घर बनाने के लिए चार जगह चार भूमि के टुकड़े खोजेंगे और समय पर घर बनाएंगे।

१०– चार बच्चे होने से पैतृक संपत्ति बची रहेगी।

११– चार बच्चे होने से यदि दो बच्चों की मृत्यु २४ साल से पहले आकस्मिक हो जाती है, तो दो बच्चे बचें रहेंगे।

१२– चार बच्चे होंगे तो बूढ़े मां-बाप को कंधे पर उठाकर श्मशान घाट तक ले जाने के लिए चार कंधे होंगे।

१३– चार बच्चे होने से कोई भी आपके घर की महिलाओं पर कु दृष्टि नहीं रखेगा।

१४– चार बच्चे होंगे तो आपके गांव में आप सभी की अच्छी खासी जनसंख्या रहेगी और आप संगठित होकर लड़ सकते हैं।

१५– इकलौते बच्चे के बिगड़ने के चांस ८०% होते हैं और चार बच्चे होने पर यह संभावनाएं केवल १०% रह जाती है, क्योंकि चारों बच्चे आपस में एक दूसरे की कमियां गिनाते रहते हैं।

१६– चार बच्चों में यदि चारों राम – लक्ष्मण – शत्रुघ्न और भरत की तरह निकल गये तो रावण की लंका जलनी तय है।

१७– यदि नो लड़कियां नव दुर्गा की तरह हो गयी तो महिषासुर और अधर्मी राक्षसों का अन्त तय है।

१८– लड़कियां भी दो तीन रहेंगी तो मां को आराम मिलेगा और परिवार में साफ सफाई और शांति रहेगी।

१९– बिना लड़की के परिवार में रौनक नहीं होती।

२०– बच्चे खूब होंगे तो हर दो तीन वर्ष बाद घर में कोई ना कोई विवाह और शुभ कार्य होते रहेंगे और देश की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

२१– चारों बच्चे संगठित रहेंगे तो वंश‌ वृद्धि भी होगी और समाज भी संगठित बना रहेगा।

२२– एक बच्चा यदि गलत करेगा तो बाकी के तीन उसे थप्पड़ मारकर सही दिशा में लाएंगे।

२३– अधिक बच्चे होने पर बड़े बच्चे को अपनी जिम्मेदारी का अनुभव होगा।

२४– अधिक बच्चे होने पर महिलाएं जल्दी बीमार नहीं होगी और उन्हें ना ही गर्भ का कैंसर और ना ही स्तन कैंसर होगा।

२५– अधिक बच्चे होने पर नवरात्रि में कन्या जिमाते समय पूरी नो कन्याएं उपलब्ध होंगी और माता की कृपा भी बनी रहेगी।

२६– चार बच्चे होंगे तो एक बच्चा यदि मानसिक रूप से अपंग होगा तो तीन बच्चों में बारी बारी से जिम्मेदारी बंट जाएगी।

२७– चार बच्चे पैदा करने पर ही दो मंजिला कोठी और आठ कमरे बनाने का लाभ है अन्यथा इकलौता बच्चा पैदा करने पर आलीशान कोठी यदि आप बनाते हैं, तो आप धरती के सबसे बड़े मूर्ख हैं।
पुरानी कहावत है
चार भाई चौधरी
पांच भाई पंच
सात भाई ना तो चौधरी को मानते हैं और ना ही पंच को मानते हैं।

बाकी आपकी इच्छा ।

वेद कहतें हैं कि, हे देवताओं हमारी संतानों की वृद्धि हो और सनातन कुल परम्परा बनी रहे , और हम सभी ऋषि शक्ति सम्पन्न और बलिष्ठ सैकड़ों संतानों की वृद्धि करें।

यह संदेश सभी सनातनी तक पहुंचे
योग वासिष्ठ पढ़ें।
योग वासिष्ठ पढ़ने के लिए सबको प्रेरित करें।

चन्द्रदर्शन

चंद्र दर्शन अमावस्या के उपरांत चंद्र देव के पुनः आगमन एवं उनके दर्शन की परंपरा है। हिंदू धर्म में सूर्य दर्शन की ही तरह चंद्र दर्शन का भी अत्यधिक धार्मिक महत्व है। इस दिन श्रद्धालु चंद्र देव की पूजा एवं विशेष प्रार्थना करते हैं। अमावस्या के तुरंत बाद चंद्रमा का दर्शन करना अत्यंत शुभ माना गया है।

चंद्र दर्शन का समय कब है?
ज्येष्ठ चन्द्र दर्शन 2026 :
मंगलवार, 16 जून 2026, 07:21 PM से 08:54 PM

चंद्र दर्शन उत्सव
अमावस्या के कारण चंद्र देव के दर्शन दुर्लभ हो जाते हैं अतः चंद्र देव के पुनः दर्शन के रूप में चंद्र दर्शन मनाया जाता है। चंद्रमा के दर्शन के लिए सबसे अनुकूल समय सूर्यास्त के ठीक बाद माना गया है। चंद्र दर्शन के लिए सबसे उपयुक्त समय की भविष्यवाणी करना पंचांग निर्माताओं के लिए भी एक कठिन कार्य है। चंद्र दर्शन की गणना देश के अलग अलग स्थानो पर अलग-अलग हो सकती है। चंद्र दर्शन को देश के विभिन्न हिस्सों में बड़े उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन भक्त भगवान चंद्र की पूजा करते हैं, तथा इस दिन चंद्रमा के दर्शन करना सौभाग्यशाली माना जाता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इससे समृद्धि एवं खुशियां आती हैं।

चंद्र दर्शन के दौरान पूजा विधि

❀ चंद्र दर्शन के दिन, भक्त चंद्रमा देव की पूजा करते हैं। चंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए भक्त इस दिन कठोर व्रत रखते हैं। वे पूरे दिन कुछ भी नहीं खाते-पीते हैं। सूर्यास्त के तुरंत बाद चंद्रमा को देखने के बाद व्रत खोला जाता है।
❀ ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति चंद्र दर्शन के दिन चंद्र देव की सभी अनुष्ठान पूजा करता है, उसे अनंत सौभाग्य और समृद्धि प्रदान की जाती है।
❀ चंद्र दर्शन पर दान देना भी एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। इस दिन लोग ब्राह्मणों को कपड़े, चावल और चीनी सहित अन्य चीजें दान करते हैं।

चंद्र दर्शन का महत्व
पौराणिक कथाओं में, चंद्र देव को सबसे प्रतिष्ठित देवताओं में से एक माना जाता है। वह ‘नवग्रह’ के एक महत्वपूर्ण ग्रह भी है, जो पृथ्वी पर जीवन को प्रभावित करते हैं। चंद्रमा को एक अनुकूल ग्रह एवं ज्ञान, पवित्रता और अच्छे इरादों से जुड़ा देव मन गया है। ऐसा माना जाता है कि जिस व्यक्ति के ग्रह में चंद्रमा अनुकूल स्थिति में है, वह अधिक सफल और समृद्ध जीवन जीएगा। इसके अलावा चंद्रमा हिंदू धर्म में और भी अधिक प्रभावशाली है क्योंकि चंद्र कैलेंडर की गणनायें चन्द्रमा की गति के आधार पर की जाती हैं।

हिंदू पौराणिक कथाओं में, चंद्र देव या चंद्रमा भगवान को पशु और पौधों के जीवन का पोषणकर्ता भी माना गया है। उनका विवाह 27 नक्षत्रों से हुआ है, जो राजा प्रजापति दक्ष की बेटियाँ हैं और बुद्ध या बुध ग्रह के पिता भी हैं। इसलिए भक्त सफलता और सौभाग्य की प्राप्ति हेतु चंद्र दर्शन के दिन चंद्र देव की पूजा करते हैं।

sssrknews
Author: sssrknews

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