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परमा (कमला) एकादशी 2026: व्रत कथा, महत्व, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और राशिफल

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🌤️ दिनांक – 10 जून 2026
🌤️ दिन – बुधवार
🌤️ विक्रम संवत 2083
🌤️ शक संवत -1948
🌤️ अयन – उत्तरायण
🌤️ ऋतु – ग्रीष्म ॠतु
🌤️ मास – अधिक ज्येष्ठ
🌤️ पक्ष – कृष्ण
🌤️ तिथि – दशमी रात्रि 12:57 तक तत्पश्चात एकादशी
🌤️ नक्षत्र – उत्तरभाद्रपद सुबह 09:21 तक तत्पश्चात रेवती
🌤️ योग – आयुष्मान सुबह 06:30 तक तत्पश्चात सौभाग्य
🌤️*राहुकाल – दोपहर 12:38 से दोपहर 02:19 तक*
🌤️ सूर्योदय – 05:57
🌤️ सूर्यास्त – 07:18
दिशाशूल – उत्तर दिशा मे

परमा(कमला)एकादशी व्रत कथा महत्व पूजा विधि आओ जानें

सनातन धर्म में परमा एकादशी का विशेष महत्व है। यह एकादशी केवल अधिक मास (मलमास) में ही पड़ती है, इसीलिए इसका आध्यात्मिक महत्व सामान्य एकादशियों से कहीं अधिक माना जाता है। अधिक मास में पड़ने के कारण इसे पुरुषोत्तम एकादशी या कमला एकादशी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की आराधना और व्रत रखने से भक्तों को पापों से मुक्ति, मानसिक शांति और शाश्वत आध्यात्मिक पुण्य प्राप्त होता है।
वर्ष 2026 में परमा एकादशी गुरुवार, 11 जून 2026 को मनाई जाएगी। यह एकादशी अधिक मास के कृष्ण पक्ष में पड़ती है और इसे अत्यंत दुर्लभ माना जाता है क्योंकि यह लगभग हर तीन साल में केवल एक बार ही होती है।

परमा एकादशी क्या है?
अधिक मास के शुक्ल पक्ष के दौरान आने वाली एकादशी को “पद्मिनी एकादशी” के नाम से जाना जाता है, जबकि अधिक मास के कृष्ण पक्ष के दौरान आने वाली एकादशी को “परमा एकादशी” या “कमला एकादशी” कहा जाता है। यह एकादशी अत्यंत पवित्र, दुर्लभ और आध्यात्मिक रूप से फलदायक मानी जाती है।

पुराणों के अनुसार, अधिक मास भगवान विष्णु को समर्पित है, इसीलिए इस पवित्र माह में मनाई जाने वाली दोनों एकादशी का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि परम एकादशी का व्रत रखने से जीवन के दुख दूर होते हैं और भगवान विष्णु का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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यह एकादशी आर्थिक समस्याओं, मानसिक तनाव, पारिवारिक कलह या जीवन में लगातार बाधाओं का सामना कर रहे लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धापूर्वक व्रत रखने से सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक विकास प्राप्त होता है।

परमा एकादशी का धार्मिक महत्व
सनातन धर्म में परम एकादशी को मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी माना जाता है। पद्म पुराण के अनुसार, इस दिन उपवास रखना, प्रार्थना करना, तपस्या करना, दान देना और भगवान विष्णु की पूजा करना भक्तों को शाश्वत आध्यात्मिक पुण्य की प्राप्ति में सहायक होता है।
अधिक मास के दौरान पड़ने के कारण यह एकादशी और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से पिछले जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है।
ऐसा माना जाता है कि परम एकादशी का व्रत रखने वाले भक्तों को भगवान विष्णु का आशीर्वाद धन, समृद्धि, सुख, सफलता और मानसिक शांति के रूप में प्राप्त होता है। यह व्रत आध्यात्मिक विकास और मोक्ष प्राप्ति के लिए भी लाभकारी माना जाता है।

परमा एकादशी व्रत पूजा विधि
अधिक मास के कृष्ण पक्ष की शुभ दशमी तिथि पर भक्तों को सुबह जल्दी उठकर श्रद्धापूर्वक स्नान करना चाहिए। दोपहर में केवल एक बार पूर्ण संयम के साथ भोजन करना चाहिए और रात को जमीन पर सोना चाहिए।
एकादशी की सुबह, दैनिक अनुष्ठान पूर्ण करने और स्नान करने के बाद, भक्तों को श्रद्धापूर्वक निम्नलिखित मंत्र का जाप करते हुए उपवास का व्रत लेना चाहिए:

“आद्या स्थित्वा निराहारः सर्व भोग विवर्जितः।

“श्वो भोक्ष्ये पुण्डरीकाक्ष शरणं मे भवच्युत”

अर्थ: “हे कमल नेत्रों वाले भगवान नारायण! आज मैं समस्त सांसारिक सुखों का त्याग करता हूँ और भोजन रहित रहता हूँ। हे अच्युत, कृपया मुझे अपनी शरण प्रदान करें।”

इसके बाद, धूप, सुगंध और अन्य भोगों से भगवान हरिकेश (भगवान विष्णु) की आराधना करें और रात भर जागकर उनका स्मरण और जप करते रहें। अगली सुबह, द्वादशी के दिन, फिर से श्रद्धापूर्वक भगवान विष्णु की आराधना करें। इसके बाद, ब्राह्मणों को भोजन कराएं और फिर परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों के साथ मौन रूप से भोजन करें।

परम एकादशी पर क्या करना चाहिए
* भगवान विष्णु का ध्यान करें और उनकी पूजा करें।

* “ओम नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।

* भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते अर्पित करें।

* गरीब और जरूरतमंद लोगों को दान करें।

* सात्विक भोजन का सेवन करें।

* भजन-कीर्तन करें और रात भर भक्ति भाव से जागते रहें।

परम एकादशी पर क्या नहीं करना चाहिए?

* तामसिक भोजन का सेवन करने से बचें।

* क्रोध और झगड़ों से दूर रहें।

* किसी का अपमान या अनादर न करें।

* नकारात्मक विचारों और व्यवहार से बचें।

परम एकादशी व्रत का पारण समय
परम एकादशी व्रत 12 जून 2026 को सूर्योदय के बाद समाप्त होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वादशी तिथि के दौरान व्रत को विधिपूर्वक संपन्न करने से व्रत के पूर्ण आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।
व्रत का समापन हमेशा सात्विक भोजन से ही करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि उचित पारण समय का पालन करने से भगवान विष्णु का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है और व्रत के आध्यात्मिक पुण्य को बनाए रखने में सहायता मिलती है।

परमा एकादशी व्रत के लाभ
* भक्तों को भगवान विष्णु का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

* यह पापों और नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करने में मदद करता है।

* आर्थिक समस्याएं कम हो जाती हैं।

* मानसिक शांति और सकारात्मकता में वृद्धि होती है।

* परिवार में सुख और समृद्धि का आगमन होता है।

* यह आध्यात्मिक विकास और मुक्ति (मोक्ष) का मार्ग खोलता है।

* जीवन में आने वाली बाधाएं और कठिनाइयां दूर हो जाती हैं।

कामदा एकादशी व्रत कथा

युधिष्ठिर ने पूछा: वासुदेव ! आपको नमस्कार है ! कृपया आप यह बताइये कि चैत्र शुक्लपक्ष में किस नाम की एकादशी होती है ?

भगवान श्रीकृष्ण बोले : राजन् ! एकाग्रचित्त होकर यह पुरातन कथा सुनो, जिसे वशिष्ठजी ने राजा दिलीप के पूछने पर कहा था ।

वशिष्ठजी बोले : राजन् ! चैत्र शुक्लपक्ष में ‘कामदा’ नाम की एकादशी होती है । वह परम पुण्यमयी है । पापरुपी ईँधन के लिए तो वह दावानल ही है ।

प्राचीन काल की बात है: नागपुर नाम का एक सुन्दर नगर था, जहाँ सोने के महल बने हुए थे । उस नगर में पुण्डरीक आदि महा भयंकर नाग निवास करते थे । पुण्डरीक नाम का नाग उन दिनों वहाँ राज्य करता था । गन्धर्व, किन्नर और अप्सराएँ भी उस नगरी का सेवन करती थी । वहाँ एक श्रेष्ठ अप्सरा थी, जिसका नाम ललिता था । उसके साथ ललित नामवाला गन्धर्व भी था । वे दोनों पति पत्नी के रुप में रहते थे । दोनों ही परस्पर काम से पीड़ित रहा करते थे । ललिता के हृदय में सदा पति की ही मूर्ति बसी रहती थी और ललित के हृदय में सुन्दरी ललिता का नित्य निवास था ।

एक दिन की बात है । नागराज पुण्डरीक राजसभा में बैठकर मनोंरंजन कर रहा था । उस समय ललित का गान हो रहा था किन्तु उसके साथ उसकी प्यारी ललिता नहीं थी । गाते गाते उसे ललिता का स्मरण हो आया । अत: उसके पैरों की गति रुक गयी और जीभ लड़खड़ाने लगी ।

नागों में श्रेष्ठ कर्कोटक को ललित के मन का सन्ताप ज्ञात हो गया, अत: उसने राजा पुण्डरीक को उसके पैरों की गति रुकने और गान में त्रुटि होने की बात बता दी । कर्कोटक की बात सुनकर नागराज पुण्डरीक की आँखे क्रोध से लाल हो गयीं । उसने गाते हुए कामातुर ललित को शाप दिया : ‘दुर्बुद्धे ! तू मेरे सामने गान करते समय भी पत्नी के वशीभूत हो गया, इसलिए राक्षस हो जा ।’

महाराज पुण्डरीक के इतना कहते ही वह गन्धर्व राक्षस हो गया । भयंकर मुख, विकराल आँखें और देखनेमात्र से भय उपजानेवाला रुप – ऐसा राक्षस होकर वह कर्म का फल भोगने लगा ।

ललिता अपने पति की विकराल आकृति देख मन ही मन बहुत चिन्तित को प्रणाम करके उनके सामने खड़ी हुई । मुनि बड़े दयालु थे । उस दु:खिनी को देखकर वे इस प्रकार बोले : ‘शुभे ! तुम कौन हो ? कहाँ से यहाँ आयी हो ? मेरे सामने सच सच बताओ ।’

ललिता ने कहा : महामुने ! वीरधन्वा नामवाले एक गन्धर्व हैं । मैं उन्हीं महात्मा की पुत्री हूँ । मेरा नाम ललिता है । मेरे स्वामी अपने पाप दोष के कारण राक्षस हो गये हैं । उनकी यह अवस्था देखकर मुझे चैन नहीं है । ब्रह्मन् ! इस समय मेरा जो कर्त्तव्य हो, वह बताइये । विप्रवर! जिस पुण्य के द्वारा मेरे पति राक्षसभाव से छुटकारा पा जायें, उसका उपदेश कीजिये ।

ॠषि बोले : भद्रे ! इस समय चैत्र मास के शुक्लपक्ष की ‘कामदा’ नामक एकादशी तिथि है, जो सब पापों को हरनेवाली और उत्तम है । तुम उसीका विधिपूर्वक व्रत करो और इस व्रत का जो पुण्य हो, उसे अपने स्वामी को दे डालो । पुण्य देने पर क्षणभर में ही उसके शाप का दोष दूर हो जायेगा ।

राजन् ! मुनि का यह वचन सुनकर ललिता को बड़ा हर्ष हुआ । उसने एकादशी को उपवास करके द्वादशी के दिन उन ब्रह्मर्षि के समीप ही भगवान वासुदेव के (श्रीविग्रह के) समक्ष अपने पति के उद्धार के लिए यह वचन कहा: ‘मैंने जो यह ‘कामदा एकादशी’ का उपवास व्रत किया है, उसके पुण्य के प्रभाव से मेरे पति का राक्षसभाव दूर हो जाय ।’

वशिष्ठजी कहते हैं : ललिता के इतना कहते ही उसी क्षण ललित का पाप दूर हो गया । उसने दिव्य देह धारण कर लिया । राक्षसभाव चला गया और पुन: गन्धर्वत्व की प्राप्ति हुई ।

नृपश्रेष्ठ ! वे दोनों पति पत्नी ‘कामदा’ के प्रभाव से पहले की अपेक्षा भी अधिक सुन्दर रुप धारण करके विमान पर आरुढ़ होकर अत्यन्त शोभा पाने लगे । यह जानकर इस एकादशी के व्रत का यत्नपूर्वक पालन करना चाहिए ।

मैंने लोगों के हित के लिए तुम्हारे सामने इस व्रत का वर्णन किया है । ‘कामदा एकादशी’ ब्रह्महत्या आदि पापों तथा पिशाचत्व आदि दोषों का नाश करनेवाली है । राजन् ! इसके पढ़ने और सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है ।

परमा (कामदा) एकादशी ( समस्त पाप, दुःख और दरिद्रता आदि को नष्ट करनेवाला व्रत | कीर्तन-भजन आदि सहित रात्रि-जागरण करना चाहिए | महादेवजी ने कुबेर को इसी व्रत के करने से धनाध्यक्ष बना दिया है |)

काम-धंधे में बरकत के लिए*

नौकरी या काम-धंधे में बरकत नहीं आती हो तो गाय की धूलि लेकर उसको ललाट पर लगाकर काम-धंधे पर जाएँ l धीरे-धीरे बरकत होने लगेगी और विघ्न हटने लगेंगे l

(कामदा) एकादशी, पंचक (समाप्त: सुबह 08:16 )

हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है l
राम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।। सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।।

एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l

एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए।

जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।

आज का आपका राशिफल

मेष राशि : अच्छा व्यवहार आप के व्यक्तित्व को और निखार सकता है। किसी संत पुरुष के दर्शन संभव है। कारोबार और परिवार में सामंजस्य स्थापित होगा। परिश्रम का फल पूर्ण रूप से मिलेगा। न्याय पक्ष मजबूत होगा।

वृषभ राशि : आज किसी सफेद वस्तु का दान करें, धनलाभ होगा। आत्मसम्मान में वृद्धि होगी। संतान से शुभ समाचार मिलेंगे। परिवारिक कार्य में भागदौड़ रहेगी।

मिथुन राशि : संपति के बड़े सौदे लाभदायक रहेंगे। आप की समझ और अनुभव से भाग्योन्नति के प्रयास सफल रहेंगे। व्यवसायिक यात्रा लाभदायक रहेगी। समय-समय पर घर के बुजुर्गों को समय दें।

कर्क राशि : दिन की शुरुआत में स्वभाव गरम रहेगा। दिनचर्या को बदलें। अपने करीबी लोगों से आज धोखा मिलने की पूरी संभावना है, सतर्क रहें। व्यय वृद्धि संभव है। मांगलिक आयोजनों की तैयारी में लगे रहेंगे।

सिंह राशि : अपने कपड़े रहन सहन इन सब के अलावा अपने व्यवहार पर भी ध्यान दें। कई लोग आप से नाराज हैं। रुका हुआ धन प्रयास करने पर मिलेगा। यात्रा, निवेश व नौकरी लाभ देंगे। तबादला हो सकता है, जो चिंताजनक रहेगा।

कन्या राशि : परिजनों का स्वास्थ्य नरम रह सकता है। लंबे समय से चले आ रहे लंबित कार्यों को आज गती मिलेगी। व्यवसायिक कार्यप्रणाली में परिवर्तन से लाभ बढ़ेगा। प्रतिष्ठा वृद्धि होगी। वाणी पर नियंत्रण अती आवश्यक है।

तुला राशि : अपने काम पर ध्यान दें। दूसरों की निंदा करने से बचें। धार्मिक लाभ मिलेगा। राजकीय सहयोग से कार्यसिद्धि होगी। व्यावसायिक यात्रा व भूमि निवेश लाभदायक रहेंगे। न्यायपक्ष में मजबूती आयेगी।

वृश्चिक राशि : किसी बड़े प्रोजेक्ट की रूपरेखा बनेगी। दुकान मकान के विवाद आपसी समझोते से हल होंगे। वाहन व मशीनरी आदि के प्रयोग में सावधानी रखें। परिजनों से विवाद से बचें। नए दोस्त बनेंगे।

धनु राशि : समय निकाल कर थोड़ा समय अपने परिवार को दें। प्रेम-प्रसंग में सावधानी रखें, अन्यथा मान सम्मान को ठेस लग सकती है। कारोबार की बाधा दूर होकर कार्यसिद्धि होगी।

मकर राशि : परिवार के आयोजनों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेंगे। जीवनसाथी के साथ गलतफहमी के कारण विवाद संभव है। संपत्ति के बड़े सौदे संभव हैं। बड़ा लाभ होगा। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। दिन की शुरुवात में थोड़ा समय धर्म में दें।

कुम्भ राशि : कम समय में काम को पूरा करने की कोशिश कामयाब होगी। आज किसी असहाय की मदद जरूर करें। दूसरों के झगड़ों में न पड़ें उलझ सकते है। पार्टी-पिकनिक का आनंद मिलेगा।

मीन राशि : दिन की शुरुआत नए संकल्पों से होगी। परिवारजनों के साथ किसी आयोजन में शामिल होंगे। जीतना हो सके उतना विवादों को टालें। आज किसी हनुमान मंदिर जाकर सिंदूर अर्पण करें और ध्वज अर्पण करें।

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Author: sssrknews

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