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12 जून को प्रदोष व्रत: जानिए व्रत कथा, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व

प्रदोष व्रत 12 जून को करें व्रत कथा महत्व क्या है आओ जानें

हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महिने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। ये व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। इस बार 12 जून, शुक्रवार को प्रदोष व्रत है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। प्रदोष पर व्रत व पूजा कैसे करें और इस दिन क्या उपाय करने से आपका भाग्योदय हो सकता है, जानिए…*
ऐसे करें व्रत व पूजा
– प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शंकर, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराएं।
– इसके बाद बेल पत्र, गंध, चावल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची भगवान को चढ़ाएं।
– पूरे दिन निराहार (संभव न हो तो एक समय फलाहार) कर सकते हैं) रहें और शाम को दुबारा इसी तरह से शिव परिवार की पूजा करें।
– भगवान शिवजी को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं। आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं।
– भगवान शिवजी की आरती करें। भगवान को प्रसाद चढ़ाएं और उसीसे अपना व्रत भी तोड़ें।उस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।
ये उपाय करें
सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद तांबे के लोटे से सूर्यदेव को अर्ध्य देें। पानी में आकड़े के फूल जरूर मिलाएं। आंकड़े के फूल भगवान शिवजी को विशेष प्रिय हैं । ये उपाय करने से सूर्यदेव सहित भगवान शिवजी की कृपा भी बनी रहती है और भाग्योदय भी हो सकता है।
ह्रदय बलवान बनाने
पीपल की कोमल पत्तियों का रस १० ग्राम और थोड़ी मिश्री मिलाकर सुबह-शाम पियो l ह्रदय बलवान होगा, कितना भी Heart Attack का भय हो अथवा मस्तिस्क की कमजोरी हो, अपने आप ठीक हो जायेगा l मूर्छा आती हो, मिर्गी आती हो, उन्माद चड़ता हो, जुकाम और नजले की तकलीफ हो ……… बस ! यह उपाय करो

प्रदोष व्रत के दिन विधि-विधान से व्रत रखने और प्रदोष काल में शिव आराधना करने से सभी पापों का नाश होता है, जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि व आरोग्य की प्राप्ति होती है।
धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस व्रत का विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।
वैवाहिक सुख और धन-संपदा: शुक्र प्रदोष व्रत शुक्रवार (शुक्र ग्रह का दिन) के दिन पड़ने से प्रेम, वैवाहिक जीवन में मधुरता और भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति होती है।
कष्टों से मुक्ति: सूर्यास्त के 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद (प्रदोष काल) में भगवान शिव की पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
पापों का नाश स्कंद पुराण के अनुसार, इस दिन व्रत रखने से मनुष्य से अनजाने में हुए पाप (कर्म दोष) भी धुल जाते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
इस दिन की पूजा विधि और उपाय:
प्रदोष काल मुहूर्त: प्रदोष व्रत पूजा का शुभ समय शाम 07:36 बजे से रात 09:20 बजे तक है।
महादेव का अभिषेक शिवलिंग का जल, दूध, और गंगाजल से अभिषेक करें।
अर्पण शिवलिंग पर बेलपत्र,धतूरा और सफेद चंदन अर्पित करें।
मंत्र जाप: पूजा के दौरान 108 बार “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।

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Author: sssrknews

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