राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: SIT रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा की भूमिका पर सवाल, कई अहम खुलासों का दावा
राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की रिपोर्ट में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में कहा गया है कि 27 अप्रैल से 5 जून के बीच की सीसीटीवी फुटेज की जांच में करीब 40 दिनों के दौरान 70 बार चढ़ावे की रकम में कथित चोरी की घटनाएं सामने आईं।
सूत्रों के अनुसार, जांच में यह भी दावा किया गया है कि इस मामले में गिरफ्तार किए गए कई लोगों की नियुक्ति चंपत राय और अनिल मिश्रा की सिफारिश पर हुई थी। रिपोर्ट में आरोप है कि अनिल मिश्रा ने पर्याप्त जांच-पड़ताल के बिना अपने करीबी लोगों को चढ़ावे की गिनती से जुड़े कार्यों में लगाया।
गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव ट्रस्ट के कर्मचारी बताए गए हैं, जबकि अन्य लोग भारतीय स्टेट बैंक के पेरोल पर कार्यरत थे। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि ट्रस्टी बनने के बाद अनिल मिश्रा की संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि होने के आरोपों की भी जांच की जा रही है।
टिन्नू यादव की भूमिका पर गंभीर आरोप
SIT रिपोर्ट के अनुसार, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव चढ़ावे की गिनती व्यवस्था में सबसे प्रभावशाली व्यक्ति था। आरोप है कि चढ़ावे के बॉक्स की चाबियां उसी के पास रहती थीं और कर्मचारियों की नियुक्ति से लेकर गिनती के कार्य में किसे लगाया जाएगा, इसका निर्णय भी वही करता था। मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कुछ निर्णयों में भी उसकी भूमिका होने का दावा किया गया है।
रमाशंकर मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा पर भी आरोप
रिपोर्ट के मुताबिक, रमाशंकर मिश्रा को टिन्नू यादव की सिफारिश पर पहले फैसिलिटेशन सेंटर में नियुक्त किया गया और बाद में चढ़ावे की गिनती का कार्य भी सौंपा गया। SIT का दावा है कि सीसीटीवी फुटेज में वह भी कई बार चढ़ावे की रकम निकालते हुए दिखाई दिया।
रमाशंकर की सिफारिश पर नियुक्त अनुकल्प मिश्रा पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच में कथित तौर पर पाया गया कि वह वाउचर तैयार करते समय चढ़ावे की रकम कम दर्ज करता था, जिससे अतिरिक्त राशि का हिसाब नहीं रहता था। रिपोर्ट के अनुसार, नौकरी मिलने के बाद अनुकल्प ने लगभग 65 लाख रुपये का मकान खरीदा और एक फार्महाउस भी बनवाया। भागवत कथा के आयोजन में चंपत राय और अनिल मिश्रा के उसके घर जाने का भी रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है।
हिडन कैमरे से खुला पूरा मामला
रिपोर्ट के अनुसार, मई के अंतिम सप्ताह में ट्रस्ट को चढ़ावे में गड़बड़ी का संदेह हुआ, जिसके बाद गिनती कक्ष में गुप्त कैमरे लगाए गए। इन्हीं कैमरों में कथित चोरी की घटनाएं रिकॉर्ड हुईं। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों को पहले से पता था कि सामान्य सीसीटीवी कैमरे कहां लगे हैं और किन स्थानों पर ब्लाइंड स्पॉट मौजूद हैं। आरोप है कि कई बार कैमरे बंद किए गए या कैमरों के सामने खड़े होकर चोरी को छिपाने की कोशिश की गई, लेकिन गुप्त कैमरों में पूरी गतिविधि रिकॉर्ड हो गई।
लवकुश मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव समेत अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच जारी है। रिपोर्ट में निगरानी व्यवस्था में लापरवाही और चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया में कई अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।
नोट: इस मामले में SIT की रिपोर्ट और सूत्रों के हवाले से ये दावे सामने आए हैं। संबंधित पक्षों की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।






