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सोशल मीडिया पर न्यायपालिका की छवि धूमिल करने की कोशिश न करें: दिल्ली हाई कोर्ट

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि सोशल मीडिया का उपयोग न्यायपालिका को बदनाम करने या उसकी कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप करने के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म केवल मूक दर्शक बनकर नहीं रह सकते, बल्कि उन्हें आपत्तिजनक सामग्री के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करनी होगी।

यह टिप्पणी दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) द्वारा दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान की गई। याचिका में सोशल मीडिया उपयोगकर्ता डॉ. कपिल काकर के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई थी। आरोप है कि काकर ने सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो साझा किए, जिनमें साकेत क्षेत्र में हुई बहुमंजिला इमारत दुर्घटना के लिए हाई कोर्ट के एक न्यायाधीश को जिम्मेदार ठहराया गया था। इस हादसे में छह लोगों की जान गई थी।

न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा और न्यायमूर्ति मधु जैन की अवकाशकालीन पीठ ने 8 जून को दिए अपने आदेश में कहा कि वीडियो में लगाए गए आरोप न केवल न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में सीधा हस्तक्षेप भी हैं। अदालत ने इन टिप्पणियों को “अत्यंत अपमानजनक” और अदालत की अवमानना की श्रेणी में माना।

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायिक आदेशों या संस्थाओं की तर्कसंगत और तथ्यात्मक आलोचना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन बिना किसी आधार के न्यायाधीशों की नीयत पर सवाल उठाना या उन पर आरोप लगाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में नहीं आता।

मामले में अदालत ने इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब और एक्स (पूर्व में ट्विटर) सहित विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया कि वे संबंधित आपत्तिजनक लिंक हटाएं और डॉ. कपिल काकर के अकाउंट तथा हैंडल को ब्लॉक करें। अदालत ने कहा कि किसी भी ऑनलाइन मंच को जैसे ही गैरकानूनी सामग्री की जानकारी मिलती है, उसका दायित्व बनता है कि वह तत्काल उस सामग्री को हटाए और उसकी पहुंच को प्रतिबंधित करे।

अपने आदेश में हाई कोर्ट ने कहा कि कानून के शासन और संविधान के सिद्धांतों पर आधारित देश में न्यायपालिका की स्वतंत्रता को प्रभावित करने, संस्थाओं की साख को नुकसान पहुंचाने या समाज में भ्रम फैलाने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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Author: sssrknews

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