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राज्यसभा चुनाव: मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस, जल्द सुनवाई की मांग

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र को रद्द किए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। नटराजन ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देते हुए इसे पक्षपातपूर्ण, कानून-विरुद्ध और मनमाना करार दिया है। उन्होंने कोर्ट से इस आदेश को तत्काल निरस्त करने और मामले की शीघ्र सुनवाई करने की मांग की है। राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 18 जून को होना है।

गौरतलब है कि 9 जून को मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रधान सचिव एवं रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त कर दिया था। भाजपा का आरोप है कि नटराजन ने अपने नामांकन के साथ दाखिल हलफनामे में तेलंगाना से जुड़े एक कानूनी मामले की जानकारी नहीं दी थी। हालांकि, कांग्रेस नेता ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है और जिस मामले का उल्लेख किया जा रहा है, वह केवल एक निजी शिकायत तक सीमित था, जिस पर किसी अदालत ने संज्ञान तक नहीं लिया है।

इससे पहले कांग्रेस ने चुनाव आयोग से भी हस्तक्षेप की मांग की थी। पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों से मुलाकात कर रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश को रद्द करने की मांग उठाई। कांग्रेस का कहना है कि जब किसी निजी शिकायत पर अदालत ने संज्ञान ही नहीं लिया, तो उम्मीदवार को अयोग्य ठहराने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता।

कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33A के तहत केवल उन मामलों की जानकारी देना अनिवार्य है, जिनमें दो वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो और जिन पर अदालत संज्ञान ले चुकी हो। उन्होंने आरोप लगाया कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन “संज्ञान न लिए गए” मामले के आधार पर रद्द किया गया, जो कानून की मंशा के विपरीत है।

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Author: sssrknews

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