भारतीय समाज में बढ़ रही तलाक (जो हमारे हिन्दू समाज में कभी थी ही नही) की प्रवृत्ति :
भारत दुनिया का एकमात्र देश जिसमें शादी के पवित्र बंधन को सात जन्मों के संबंध माना और निभाया जाता था।
आजकल के कुछ युवाओं ने इस पवित्र रिश्ते का मज़ाक बना कर रख दिया प्रतीत होता है।
इसके पीछे की कहानी संतान के जन्म के तुरंत बाद उसके पालन पोषण के तरीके से शुरु हो जाती है-
1. माता पिता दोनों का काम काज़ी होना, और बच्चों को समय ना दे पाना।
2. संयुक्त परिवार की कमी।
3. बच्चों की परवरिश नौकर के हाथ।
4. बच्चों को ना सुनने की आदत नहीं होना।
5. बच्चों की हर जायज़ नाजायज़ मांग एक बार में पूरी होना।
6. आज के नए युग में बेटों को उचित शिक्षा एवं संस्कार का अभाव।
7. आज बेटियों का आत्मनिर्भर होना, किन्तु बेटों का अभी भी पत्नी को दासी समझने की भूल।
8. देरी अर्थात बड़ी उम्र से शादी करने से बच्चों की आदतें पकने के कारण, आपसी सामंजस्य बिठाने में दिक्कत।
9. कुछ बच्चों का शादी से पहले दोस्तों के साथ शारीरिक संबंध बनाना और इसे एक खेल के रूप में लेना।
10. मोबाइल – हर छोटी-बड़ी बात, दिन में कई बार और लंबे समय तक बेटी का अपने माता पिता से डिस्कस करना और नासमझी में उनका अनावश्य हस्तक्षेप।
यदि हर बच्चे के माता पिता इन छोटी, किंतु जीवन की अहम बातों का ध्यान रखें, तो युवाओं में बढ़ रहे तलाक़ प्रथा पर अंकुश लगाया जा सकता है।






