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गौसेवा से बढ़ेगा सौभाग्य, जानिए विपरीत राजयोग कैसे बदल सकता है आपकी किस्मत

शुभ अवसरों पर गौसेवा कर कैसे उन्हें और भी शुभ-मंगलमय बनाएं एवं जन्मकुण्डली मे विपरीत राजयोग क्या क्या दे सकता है आपको आओ जानें

-जन्मदिन: गायों को गुड़-रोटी, केला, हरा चारा खिलाएँ। गोशाला में बच्चों को भी साथ ले जाएँ – संस्कार बचपन से पड़ते हैं।
– विवाह/वर्षगांठ: नवदंपति पहले गौशाला जाकर गौपूजन करें। जो खर्च डेकोरेशन में होता है उसका 10% गौग्रास में लगाएँ।
– गृह प्रवेश: नई गाड़ी या घर लेने पर सबसे पहले गाय को हरा चारा खिलाएँ। शास्त्र कहते हैं इससे नजर-दोष नहीं लगता।
– त्यौहार: गोबर के दीपक, होली पर रासायनिक रंग की जगह गौमूत्र से बने हर्बल रंग। गौशाला को दान।
– श्राद्ध: पितरों के नाम से गौशाला में 1 दिन का चारा दान करें। कहा जाता है गाय को दिया अन्न सीधे पितरों तक पहुँचता है।

:- गीता में श्रीकृष्ण ने कहा – “धेनुनामस्मि कामधुक” यानी गायों में मैं कामधेनु हूँ। गौसेवा सीधे गोपाल की सेवा है। इससे घर में बरकत, बच्चों में संस्कार, और मन में शांति आती है। ये अंधविश्वास नहीं, लाखों परिवारों का अनुभव है।
अगला कौन सा शुभ अवसर आ रहा है? उस दिन के लिए गौसेवा का संकल्प अभी से ले लें – मन को अलग ही सुकून मिलेगा।

गौशाला में अपने हाथों से सेवा करनी चाहिए जैसे हरा चारा गुड़ नमक खल चुनी भूसा पानी जो भी जरूरत हो उसे स्वयं अपने आँखों के सामने हाथों से करें जिससे सीधा सीधा गऊ माता ज़ी को मिलेगा आशीर्वाद देंगी

* जय गौमाता। जय श्रीकृष्ण।

जन्मकुण्डली मे विपरीत राजयोग क्या क्या दे सकता है आपको

विपरीत राजयोग 6, 8, 12 भाव मतलब विपरीत परिस्थितियों में भी राजा समान जीवन रहना आदि विपरीत राजयोग होने पर विपरीत राजयोग की दशाएँ आपको वह सब कुछ दे देंगी जो आपकी कुण्डली मे होगा
यदि मकान योग है तब मकान भी, जॉब या व्यापार होगा तब उसमें अच्छी सफलताएं, विवाह योग होने पर विवाह भी हो जाएगा, धन योग या आर्थिक स्थिति अच्छी होने पर कुंण्डली मे आर्थिक लाभ काफी होने लगेगा मतलब जो जो सुख आपकी कुण्डली मे लिखे है वह विपरीत राजयोग के प्रभाव से कई गुना आपको मिलेंगे,
जैसे सुख है एक मकान का तब विपरीत राजयोग कुंण्डली मे होने पर सुख एक से ज्यादा मकान का मिल जाता है, आगे जैसे व्यापार में लगाया है कम पैसा तो फायदा कई गुना होकर मिलेगा,मिलेगा तब ही जब विपरीत राजयोग कुंण्डली मे होगा और मुख्य रूप से जब विपरीत राजयोग की दशाएँ आएगी अब पहले यह समझते है विपरीत राजयोग बनता कैसे है।
6, 8,12 भाव के स्वामी विपरीत राजयोग बनाते है।
जब इन्ही 6 8, 12 भाव के स्वामी इन्ही 6, 8,12 भाव मे बैठे होंगे तब ही विपरीत राजयोग बनेगा,जैसे मेष लग्न में बुध छठे घर का स्वामी बनता है अब बुध आठवे घर मे बैठ जाये तब विपरीत राजयोग बन जायेगा इसी तरह जब भी 6 भाव का स्वामी 8वे या 12वे में होगा या 8वे भाव का स्वामी 6 या 12वे भाव मे होगा, या 12 वे भाव का स्वामी छठे या 8 वे भाव मे बैठेगा तब विपरीत राजयोग बनेगा, जो बहुत लाभकारी देगा और विपरीत जब बहुत शक्तिशाली हो जाता है जब 6, 8,12 भाव के स्वामी एक साथ सबंध इन्ही 6, 8, 12 भाव मे बैठते है और विपरीत राजयोग आपकी कुण्डली मे जिस भी शुभ फल प्राप्ति के योग शुभ स्थिति में होंगे उन फलो को बहुत ज्यादा मात्रा में देगा जबकि विपरीत राजयोग न होने पर योग होने पर भी जितना मिलना चाहिए शुभ फल उतना ही मिलता है।
विपरीत राजयोग कुंण्डली मे होगा तब सामान्य से फल भी कई गुना होकर विपरीत राजयोग के प्रभाव से मिलेगा, कैसे? अब कुछ उदाहरणो से समझते है।

उदाहरण अनुसार
वृषभ लग्न की कुण्डली मे बृहस्पति जैसे आठवे भाव का स्वामी बनता है अब बृहस्पति यहाँ छठे या बारहवे भाव मे जाकर बैठ जाएगा तब विपरीत राजयोग बन जायेगा अब विपरीत राजयोग तो यहाँ बन गया लेकिन फल क्या क्या मिलेगा कई गुना मात्रा में वह कुण्डली के योग बताएंगे, जैसे यहां गुरु से विपरीत राजयोग बना साथ ही कुण्डली मे धन योग हो तब यहाँ गुरु से बनने वाला विपरीत राजयोग कई गुना धन देगा अपनी महादशा-अन्तरदशा और बहुत कम समय में।

उदाहरण अनुसार
सिंह लग्न की कुण्डली मे चन्द्रमा 12वे घर का स्वामी बनता है अब चन्द्रमा यहाँ छठे या आठवें घर मे बैठे तब विपरीत राजयोग बन जायेगा, अब यहाँ जो भी फल शुभ फल मिलेगा वह कई ज्यादा गुना मात्राय में मिलेगा जैसे, सिंह लग्न में यही मकान बनाने के सामान्य योग हो तब ऐसी स्थिति में विपरीत योग होने के कारण सामान्य मकान योग होने पर भी बहुत बढ़िया स्तर का मकान बनेगा , एक से अधिक मकान भी विपरीत राजयोग के प्रभाव से जातक बना लेता है क्योंकि जातक की कुण्डली मे विपरीत राजयोग है जो कई गुना फायदा दे रहा है सामान्य योगों के फलों को भी बहुत ज्यादा बड़ा चढ़ाकर देगा जैसे इसी उदाहरण में एक या साधारण मकान योग होने पर भी असाधारण और बड़े आलीशान मकान का सुख मिलेगा।
उदाहरण अनुसार
कुंभ लग्न में बुध जैसे 8वे घर का स्वामी बनता है अब बुध यहाँ छठे या बारहवें भाव मे जाकर बैठे तब विपरीत राजयोग बुध से बन जायेगा, अब ऐसी स्थिति में जातक को विपरीत राजयोग से बहुत ज्यादा शुभ परिणाम प्राप्त होंगे, जैसे छोटा सा व्यवसाय शुरू करने पर भी विपरीत राजयोग के प्रभाव से छोटा सा व्यवसाय भी बड़ा रूप ले लेगा विपरीत राजयोग के प्रभाव से, यही विपरीत राजयोग का फर्क और कमाल होता है।

नोट : एक साथ एक कुण्डली मे 2 से 3 विपरीत राजयोग एक साथ बन सकते है जैसे छठे भाव का स्वामी आठवे भाव मे और आठवे भाव का स्वामी बारहवे भाव मे होगा तब यह दो ग्रहों से विपरीत राजयोग बन जायेंगे जो ज्यादा से ज्यादा शुभ शक्तिशाली फल जातक को देंगे।

नोट : विपरीत राजयोग वाले ग्रह बलवान होने पर ज्यादा से ज्यादा लाभ देगे, विपरीत राजयोग वाले ग्रह अस्त नीच के होने पर विपरीत राजयोग के फल नही दे पाएंगे,फल तब ही दे पायेंगे ऐसी स्थिति में जब उपाय से ग्रह को ठीक किया जाए, इसके साथ ही विपरीत राजयोग वाले ग्रह के साथ किसी भी केंद्र 1,4,7,10 या त्रिकोण 1,5,9 भाव के स्वामी का सबंध होना विपरीत राजयोग के फल में दिक्कत करेगा लेकिन केंद्र या त्रिकोण का स्वामी 6, 8,12 भाव का भी स्वामी होगा तब कोई दिक्कत नही करता है।
इस तरह विपरीत राजयोग जिस जातक या जातिका की कुण्डली मे है तब उसका कई ज्यादा गुना मात्रा में लाभ मिलेगा कुण्डली के शुभ योगों के फलों का, क्या क्या लाभ मिलेगा और किस फल में यह कुंण्डली मे जो योग होंगे जैसे संपत्ति ,मकान, रोजगार, वाहन आदि उन फलो पर निर्भर करेगा।

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Author: sssrknews

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