Home » ताजा खबर » कुछ चेहरों की भाषा पूरी पीढ़ी की पहचान नहीं हो सकती

कुछ चेहरों की भाषा पूरी पीढ़ी की पहचान नहीं हो सकती

प्रोटेस्ट खत्म हुआ… इस्तीफा भी मिल गया शिक्षा मंत्री का!

सोनम वांगचुक की सुध लेने डिप्के और सौरव दास गए या नहीं… इसमें अब शायद किसी की कोई दिलचस्पी नहीं बची है। यह खबर भी मुख्य खबरों से गायब है कि सोनम लद्दाख लौट गए या अब दिल्ली के बाद पंजाब के पेपर लीक के लिए भूख हड़ताल पर जाने वाले हैं?

फिलहाल पंजाब के पेपर लीक को मुद्दा न कॉकरोच बना रहे हैं, न सोनम। कांग्रेस तो वैसे भी ‘मांडे पर टीकी’ लगाने का काम करती है।

‘मांडे पर टीकी’ एक मारवाड़ी कहावत है, जिसके अनुसार मेहनत कोई और कर रहा होता है, मांडने यानी चित्रकारी में… पर जब भीड़ आती है तो एक दूसरा बंदा हाथ में खड़िया गेरू लेकर टीकी यानी बिंदी लगा देता है… जिससे यह लगे कि वह भी इस मेहनत में शामिल था।

राहुल गांधी का प्रधानमंत्री जी के आवास के बाहर प्रदर्शन और उसके बाद पुलिस या सुरक्षाकर्मियों का उन्हें ‘टांगा टोली’ करते हुए ले जाना, मेरे लिए ‘मांडे पर टीकी’ लगाने के बराबर था।

खैर…

यह सब बातें अब इतिहास में दर्ज होकर भूतकाल बनने वाली हैं।

काफिला गुजर गया है… पीछे रह गया है धूल का गुबार।

और सच कहूँ तो इस गुबार में भी धुंधले नहीं पड़ रहे प्रोटेस्ट के वो पोस्टर्स… वो तमाम गालियाँ और गंदी, अभद्र भाषा की टिप्पणियाँ! और न ही ख्याल से जा रहे उन युवाओं के स्टेटमेंट और गर्वोक्तियाँ, जिनको एक पैराग्राफ बोलने के लिए दस बार ‘एफ’ शब्द का सहारा लेना होता है। F * के बिना न उनकी गालियाँ सामने आ रही हैं, न जुझारूपन, न हिम्मत और न ही निराशा।

ऐसे में देख रही हूँ कुछ लोगों को इन गालियों पर गर्व करते हुए। और देख रही हूँ, वे इसे सारे युवाओं की भाषा बताकर जनरलाइज कर रहे हैं। उन्हें बहुत मजा आ रहा है कि कैसे अब लड़कियाँ भी स्वयं के अंगों पर बनाई गई विक्षिप्त गालियों को चिल्ला-चिल्लाकर बोल रही हैं।

और एक जमात, जो अपनी जवानी को खो चुकी है और अधेड़ावस्था को खोने के निकट है… वह उल्लसित होकर, खुश होकर स्वयं को मॉडर्न बताते हुए, इसे जेन ज़ी के बोलचाल, हावभाव, आदत और स्टाइल से जोड़ रही है।

और बाकी लोग हतप्रभ हैं कि युवा ऐसे कब हुए?

सच कहूँ तो सबसे पहले यह समझ लीजिए कि दिल्ली के प्रोटेस्ट में लगने वाले नारे और गालियाँ हर जेन ज़ी के बोलने का तरीका हैं?

जी नहीं… नहीं हैं।

कुछ हजार छात्रों के संस्कार आप लाखों बच्चों पर नहीं थोप सकते।

मेरे घर में मेरे चार नेफ्यू जेन ज़ी हैं और मेरा बेटा जेन अल्फा है। मेरे दोस्त और परिवार के बच्चों में भी इतने अभद्र बच्चे कहीं नहीं हैं।

हाँ, यह बीमारी बड़े मेट्रो सिटी के कुछ हिस्सों में जरूर फैल गई है। सोशल मीडिया ने इसे सामान्य बनाने में अपनी भूमिका निभाई है। लेकिन भारत सिर्फ दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु नहीं है।

देश के बी टाउन, सी टाउन और छोटे-छोटे शहरों से लेकर गाँवों तक आज भी तहज़ीब बरकरार है। आज भी लाखों बच्चे ऐसे हैं, जो अपनी बात बेबाकी से रखते हैं, सवाल करते हैं, विरोध करते हैं… लेकिन हर बात के लिए गाली को अपनी भाषा नहीं बनाते।

और दिल्ली में भी हर घर में लड़के-लड़कियाँ एफ… और माँ-बहन की गालियाँ देते हुए नहीं मिलते। यहाँ भी लाखों परिवार हैं, जहाँ बच्चे आधुनिक हैं, आत्मनिर्भर हैं, अपनी बात खुलकर रखते हैं, लेकिन अपनी भाषा और संस्कारों को अपनी आधुनिकता की राह में बाधा नहीं मानते।

इसलिए मेरी आपत्ति उन युवाओं से नहीं है जो सवाल पूछते हैं, विरोध करते हैं या सत्ता से असहमति रखते हैं। विरोध होना चाहिए, असहमति भी होनी चाहिए और युवा पीढ़ी का अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना भी जरूरी है।

मेरी आपत्ति सिर्फ इस बात से है कि कुछ लोगों की अभद्र भाषा को पूरी पीढ़ी की पहचान बना दिया जाए। और उससे भी ज्यादा आपत्ति इस बात से है कि कुछ लोग इस अभद्रता को देखकर खुश हों, उसे आधुनिकता का प्रमाणपत्र दें और फिर गर्व से कहें… देखिए, आज का युवा ऐसा है!

नहीं… आज का युवा ऐसा नहीं है।

आज का युवा बहुत बड़ा है, बहुत विविध है। वह महानगरों की सड़कों पर भी है, छोटे शहरों की गलियों में भी है और गाँवों की पगडंडियों पर भी। वह तकनीक जानता है, वह आधुनिक है, दुनिया से जुड़ा है, अपनी बात रखना जानता है… लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि उसने अपनी तहज़ीब और संस्कार छोड़ दिए हैं।

कुछ हजार बच्चों की भाषा को करोड़ों युवाओं की भाषा मत बनाइए। और कुछ युवाओं की गालियों को देखकर पूरे भारत की नई पीढ़ी के संस्कारों पर सवाल मत उठाइए।

कुछ चेहरों की भाषा को पूरी पीढ़ी का आईना नहीं घोषित किया जा सकता!
भारत की नई पीढ़ी में आज भी तहज़ीब बाकी है… बस उसे कैमरे के सामने चीखना नहीं आता।

बाकी तो…

साभार : टीशा अग्रवाल की फेसबुक वॉल से

चित्र इंटरनेट और अन्य सोशल मीडिया

Diclaimer : इसका हमारी The भारत SSSRK News24x7 समाचार और राष्ट्र दर्शन (सबसे तेज़, सबसे आगे…),
यह एक आंकलन मात्र है…

sssrknews
Author: sssrknews

इस खबर पर अपनी प्रतिक्रिया जारी करें

Leave a Comment

Share This