सुमन कल्याणपुर नहीं रही। कल 31 मई को 89 साल की उम्र में सुमन कल्याणपुर जी का निधन हो गया। सुमन जी के बहारे में कुछ जानकारियां पढ़िए।
सुमन कल्याणपुर जी की पहली हिंदी फ़िल्म साल 1954 में आई मंगू थी। ये फ़िल्म अभिनेता व फिल्ममेकर शेख मुख्तार ने प्रोड्यूस की थी। इस फ़िल्म के लिए सुमन कल्याणपुूर जी ने तीन गाने रिकॉर्ड किए थे।
‘बीते हुए दिन’ ब्लॉग के संचालक श्री शिशिर कृष्ण शर्मा जी को बहुत साल पहले सुन कल्याणपुर जी ने एक इंटरव्यू दिया था। उस इंटरव्यू में सुमन जी ने बताया था कि शेख मुख्तार जी ने शुक्राची चांदनी नामक मराठी फ़िल्म के लिए गाए उनके गीत सुने थे।
शेख मुख्तार सुमन कल्याणपुर जी की गायकी से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने अपनी फ़िल्म मंगू के लिए उन्हें गाने का मौका दिया। उस वक्त मंगू फ़िल्म का संगीत मोहम्मद शफ़ी नाम के संगीतकार कंपोज़ कर रहे थे। उन्होंने सुमन जी से तीन गीत रिकॉर्ड कराए थे।
मगर फिर जाने क्या हुआ, मोहम्मद शफ़ी उस फ़िल्म से हट गए और ओ.पी.नय्यर को मंगू का संगीत तैयार करने की ज़िम्मेदारी मिली। और फिर सुमन कल्याणपुर जी की गाई सिर्फ़ एक लोरी ही उस फ़िल्म में बची। उस लोरी के बोल थे “कोई पुकारे धीमे से तुझे।” इस तरह मंगू फ़िल्म से सुमन कल्याणपुर जी का हिंदी फ़िल्मों में गायकी का सफ़र शुरू हो गया।
28 जनवरी 1937 को कलकत्ता में सुमन कल्याणपुर जी का जन्म हुआ था। अधिकतकर जगहों पर दावा किया जाता है कि सुमन कल्याणपुर ढाका में जन्मी थी। लेकिन ये बात सही नहीं है। हां, उनके पिता का काफ़ी समय ढाका में ज़रूर गुज़रा था सैंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की नौकरी के दौरान। मगर सुमन जी का जन्म ढाका में नहीं हुआ था। वो कोलकाता में ही जन्मी थी।
एक और बात, सुमन कल्याणपुर जी ने भले ही पहली दफ़ा शेख मुख्तार की फ़िल्म मंगू में कोई हिंदी गीत गाया हो। लेकिन उनकी पहली रिलीज़्ड फ़िल्म थी 1954 की ही दरवाज़ा जिसे उस दौर की बहुत बड़ी लेखिका इस्मत चुगताई ने प्रोड्यूस व उनके पति शाहिद लतीफ़ ने डायरेक्ट किया था।
उस फ़िल्म में संगीतकार नाशाद के निर्देशन में सुमन कल्याणपुर जी ने 5 गीत गाए थे। दरवाज़ा नाम की वो फ़िल्म सुमन जी को मंगू के फौरन बाद ही मिल गई थी। चूंकि दरवाज़ा पहले रिलीज़ हो गई थी तो इसे ही सुमन कल्याणपुर जी की पहली हिंदी फ़िल्म माना जाता है। सुमन कल्याणपुर जी को क़िस्सा टीवी का नमन। शत शत नमन।
#Swatantra@Sagar






