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आज का दिव्य पंचांग, गौमाता का महात्म्य, 108 का रहस्य, राशिफल एवं वास्तु उपाय

Daily panchang,गऊ माताजी पूज्यनीय क्यों हैं एवं क्या है 108 का रहस्य,आज का आपका राशिफल क्या है,वास्तुदोष निवारण उपाय बिना किसी तोड़फोड़ के

🌤️ दिनांक – 04 जून 2026
🌤️ दिन – गुरूवार
🌤️ विक्रम संवत – 2083
🌤️ शक संवत – 1948
🌤️ अयन – उत्तरायण
🌤️ ऋतु – ग्रीष्म ऋतु
🌤️ मास – अधिक ज्येष्ठ
🌤️ पक्ष – कृष्ण
🌤️ तिथि – चतुर्थी रात्रि 11:30 तक तत्पश्चात पंचमी
🌤️ नक्षत्र – उत्तराषाढा 05 जून रात्रि 03:41 तक तत्पश्चात श्रवण
🌤️ योग – शुक्ल सुबह 09:03 तक तत्पश्चात ब्रह्म
🌤️*राहुकाल – दोपहर 02:17 से शाम 03:58 तक*
🌤️ सूर्योदय – 05:57
🌤️ सूर्यास्त – 07:16
दिशाशूल – दक्षिण दिशामें

गऊ माताजी पूज्यनीय क्यों हैं एवं 108 का रहस्य,आज का आपका राशिफल क्या है,वास्तुदोष निवारण उपाय बिना किसी तोड़फोड़ आओ जानें

भारतीय सनातन संस्कृति में गाय को केवल एक पशु नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि की माता और पृथ्वी का जीवंत स्वरूप माना गया है। प्रस्तुत चित्र इसी दिव्य भाव को दर्शाता है, जहाँ गौमाता के शरीर पर सम्पूर्ण विश्व अंकित है। यह केवल कलात्मक कल्पना नहीं, बल्कि उस प्राचीन वैदिक चेतना का प्रतीक है जिसमें प्रकृति, जीव-जंतु, मानव और ब्रह्मांड सभी एक ही चेतना से जुड़े माने गए हैं।

वेदों और पुराणों में कहा गया है कि गौमाता में तैंतीस कोटि (श्रेणी) देवी-देवताओं का निवास होता है। गावो विश्वस्य मातरः अर्थात गाय सम्पूर्ण विश्व की माता है। जिस प्रकार पृथ्वी हमें अन्न, जल, वायु और जीवन प्रदान करती है, उसी प्रकार गौमाता भी दूध, औषधि, कृषि, ऊर्जा और करुणा का स्रोत है। इसलिए भारतीय ऋषियों ने गाय को पृथ्वी का प्रत्यक्ष स्वरूप माना।

गाय केवल भारत की संस्कृति का हिस्सा नहीं, बल्कि पर्यावरण संतुलन, जैव विविधता और मानव कल्याण की आधारशिला है। गौ आधारित कृषि, पंचगव्य चिकित्सा और प्राकृतिक जीवनशैली आज पूरे विश्व में पुनः महत्व प्राप्त कर रही है।

गाय के आसपास दिखाए गए वन, पर्वत, जलधारा, पशु-पक्षी और कमल यह संकेत देते हैं कि जब तक प्रकृति सुरक्षित है, तब तक मानव सभ्यता सुरक्षित है। गौसंरक्षण वास्तव में पृथ्वी संरक्षण का ही एक रूप है। यदि गाय बचेगी तो खेत बचेंगे, अन्न बचेगा, जल बचेगा और मानवता का संतुलन भी बना रहेगा।

जन्मकुंडली में अष्टम स्थान में राहु हो तो जीवन साथी से मतभेद व ससुराल से अनबन रहती है
जन्मकुंडली के आठवें स्थान में राहु हो तो वाणी से ही अपना बना बनाया कार्य बिगड़ता है । कुटुंब से दूरी होती है
उपाय:- शनिवार को नारियल पर काले धागे की सात गठान बांधकर व अपने ऊपर सात बार उसार कर पानी मे ठंडा करे।
जन्मकुंडली परामर्श व वास्तु समाधान हेतु सम्पर्क करें

सनातन धर्म में गौसेवा को केवल धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि करुणा, सहअस्तित्व और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भाव माना गया है। आज जब विश्व पर्यावरण संकट, प्रदूषण और मानसिक अशांति से जूझ रहा है, तब भारतीय संस्कृति का यह संदेश अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है कि मानव केवल उपभोगकर्ता नहीं, बल्कि सृष्टि का संरक्षक भी है।

गाय हमें त्याग, सेवा और मातृत्व की प्रेरणा देती है। वह बिना किसी भेदभाव के मानवता का पालन करती है। यही कारण है कि भारतभूमि में गौमाता को “धर्म की आधारशिला” कहा गया है।

अंततः यह चित्र हमें स्मरण कराता है कि पृथ्वी केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि एक जीवंत चेतना है — और उस चेतना का साकार रूप है गौमाता।
“गौ रक्षा” ही प्रकृति रक्षा है, और प्रकृति रक्षा ही मानवता की रक्षा है.. जय गौमाता।

108″ का रहस्य क्या होता है

॥ॐ॥ का जप करते समय 108 प्रकार की विशेष भेदक ध्वनी तरंगे उत्पन्न होती है जो किसी भी प्रकार के शारीरिक व मानसिक घातक रोगों के कारण का समूल विनाश व शारीरिक व मानसिक विकास का मूल कारण है। बौद्धिक विकास व स्मरण शक्ति के विकास में अत्यन्त प्रबल कारण है।।

॥ 108 ॥
यह अद्भुत व चमत्कारी अंक बहुत समय काल से हमारे ऋषि -मुनियों के नाम के साथ प्रयोग होता रहा है।

संख्या 108 का रहस्य क्या है
अ→1 … आ→2 … इ→3 … ई→4 … उ→5 … ऊ→6. … ए→7 … ऐ→8 ओ→9 … औ→10 … ऋ→11 … लृ→12 अं→13 … अ:→14.. ऋॄ →15… लॄ →16

क→1 … ख→2 … ग→3 … घ→4 …
ङ→5 … च→6 … छ→7 … ज→8 …
झ→9 … ञ→10 … ट→11 … ठ→12 … ड→13 … ढ→14 … ण→15… त→16…थ→17 … द→18 … ध→19 … न→20 …
प→21 … फ→22 … ब→23 … भ→24 … म→25 … य→26 … र→27 … ल→28 … व→29 … श→30 … ष→31 … स→32 …
ह→33 … क्ष→34 … त्र→35 … ज्ञ→36 … ड़ … ढ़ …

ओ अहं = ब्रह्म
ब्रह्म = ब+र+ह+म =23+27+33+25=108

(01) — यह मात्रिकाएँ (18 स्वर +36 व्यंजन=54) नाभि से आरम्भ होकर ओष्टों तक आती है, इनका एक बार चढ़ाव, दूसरी बार उतार होता है, दोनों बार में वे 108 की संख्या बन जाती हैं। इस प्रकार 108 मंत्र जप से नाभि चक्र से लेकर जिव्हाग्र तक की 108 सूक्ष्म तन्मात्राओं का प्रस्फुरण हो जाता है। अधिक जितना हो सके उतना उत्तम है पर नित्य कम से कम 108 मंत्रों का जप तो करना ही चाहिए ।

(02) — मनुष्य शरीर की ऊँचाई
= यज्ञोपवीत(जनेउ) की परिधि
= (4 अँगुलियों) का 27 गुणा होती है।
= 4 × 27 = 108

(03) नक्षत्रों की कुल संख्या = 27
प्रत्येक नक्षत्र के चरण = 4
जप की विशिष्ट संख्या = 108

अर्थात ॐ मंत्र जप कम से कम 108 बार करना चाहिये ।

(04) — एक अद्भुत अनुपातिक रहस्य
★ पृथ्वी से सूर्य की दूरी/ सूर्य का व्यास= 108

★ पृथ्वी से चन्द्र की दूरी/ चन्द्र का व्यास= 108

अर्थात मन्त्र जप 108 से कम नहीं करना चाहिये।

(05) हिंसात्मक पापों की संख्या 36 मानी गई है जो मन, वचन व कर्म ३ प्रकार से होते है। अर्थात 36×3=108 अत: पाप कर्म संस्कार निवृत्ति हेतु किये गये मंत्र जप को कम से कम 108 अवश्य ही करना चाहिये।

(06) सामान्यत: 24 घंटे में एक व्यक्ति 21600 बार सांस लेता है। दिन-रात के 24 घंटों में से 12 घंटे सोने व गृहस्थ कर्त्तव्य में व्यतीत हो जाते हैं और शेष 12 घंटों में व्यक्ति जो सांस लेता है वह है 10800 बार। इस समय में ईश्वर का ध्यान करना चाहिए । शास्त्रों के अनुसार व्यक्ति को हर सांस पर ईश्वर का ध्यान करना चाहिये । इसीलिए 10800 की इसी संख्या के आधार पर जप के लिये 108 की संख्या निर्धारित करते हैं।

(07) एक वर्ष में सूर्य 21600 कलाएं बदलता है। सूर्य वर्ष में दो बार अपनी स्थिति भी बदलता है। छःमाह उत्तरायण में रहता है और छः माह दक्षिणायन में। अत: सूर्य छः माह की एक स्थिति
में 108000 बार कलाएं बदलता है।

(08) ब्रह्मांड को 12 भागों में विभाजित किया गया है। इन 12 भागों के नाम – मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन हैं। इन 12 राशियों में नौ ग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु विचरण करते हैं। अत: ग्रहों की संख्या 9 में राशियों की संख्या 12 से गुणा करें तो संख्या 108 प्राप्त हो जाती है।

(09) 108 में तीन अंक हैं, 1+0+8. इनमें एक “1″ ईश्वर का प्रतीक है। ईश्वर का एक सत्ता है अर्थात ईश्वर 1 है और मन भी एक है, शून्य “0″ प्रकृति को दर्शाता है। आठ “8″ जीवात्मा को दर्शाता है क्योकि योग के अष्टांग नियमों से ही जीव प्रभु से मिल सकता है । जो व्यक्ति अष्टांग योग द्वारा प्रकृति के आठो मूल से विरक्त हो कर ईश्वर का साक्षात्कार कर लेता है उसे सिद्ध पुरुष कहते हैं। जीव “8″ को परमपिता परमात्मा से मिलने के लिए प्रकृति “0″ का सहारा लेना पड़ता है। ईश्वर और जीव के बीच में प्रकृति है। आत्मा जब प्रकृति को शून्य समझता है तभी ईश्वर “1″ का साक्षात्कार कर सकता है। प्रकृति “0″ में क्षणिक सुख है और परमात्मा में अनंत और असीम। जब तक जीव प्रकृति “0″ को जो कि जड़ है उसका त्याग नहीं करेगा , अर्थात शून्य नही करेगा, मोह माया को नहीं त्यागेगा तब तक जीव “8″ ईश्वर “1″ से नहीं मिल पायेगा पूर्णता (1+8=9) को नहीं प्राप्त कर पायेगा । 9 पूर्णता का सूचक है।

(10)
1- ईश्वर और मन
2- द्वैत, दुनिया, संसार
3- गुण प्रकृति (माया)
4- अवस्था भेद (वर्ण)
5- इन्द्रियाँ
6- विकार
7- सप्तऋषि, सप्तसोपान
8- आष्टांग योग
9- नवधा भक्ति (पूर्णता)

(11) वैदिक विचार धारा में मनुस्मृति के अनुसार
अहंकार के गुण = 2
बुद्धि के गुण = 3
मन के गुण = 4
आकाश के गुण = 5
वायु के गुण = 6
अग्नि के गुण = 7
जल के गुण = 8
पॄथ्वी के गुण = 9
2+3+4+5+6+7+8+9 =
अत: प्रकॄति के कुल गुण = 44
जीव के गुण = 10
इस प्रकार संख्या का योग = 54
अत: सृष्टि उत्पत्ति की संख्या = 54
एवं सृष्टि प्रलय की संख्या = 54
दोंनों संख्याओं का योग = 108

(12)
संख्या “1″ एक ईश्वर का संकेत है।
संख्या “0″ जड़ प्रकृति का संकेत है।
संख्या “8″ बहुआयामी जीवात्मा का संकेत है।
[ यह तीन अनादि परम वैदिक सत्य हैं ]
[ यही पवित्र त्रेतवाद है ]

संख्या “2″ से “9″ तक एक बात सत्य है कि इन्हीं आठ अंकों में “0″ रूपी स्थान पर जीवन है। इसलिये यदि “0″ न हो तो कोई क्रम गणना आदि नहीं हो सकती। “1″ की चेतना से “8″ का खेल । “8″ यानी “2″ से “9″ । यह “8″ क्या है ? मन के “8″ वर्ग या भाव । ये आठ भाव ये हैं – 1. काम ( विभिन्न इच्छायें / वासनायें ) । 2. क्रोध । 3. लोभ । 4. मोह । 5. मद ( घमण्ड ) । 6. मत्सर ( जलन ) । 7. ज्ञान । 8. वैराग ।

एक सामान्य आत्मा से महानात्मा तक की यात्रा का प्रतीक है ★ ॥ 108 ॥ ★
इन आठ भावों में जीवन का ये खेल चल रहा है ।

(13) सौर परिवार के प्रमुख सूर्य के एक ओर से नौ रश्मियां निकलती हैं और ये चारो ओर से अलग-अलग निकलती है। इस तरह कुल 36 रश्मियां हो गई। *इन 36 रश्मियों के ध्वनियों पर संस्कृत के 36 स्वर बनें ।

इस तरह सूर्य की जब नौ रश्मियां पृथ्वी पर आती हैं तो उनका पृथ्वी के आठ बसुओं से टक्कर होती हैं। *सूर्य की नौ रश्मियां और पृथ्वी के आठ बसुओं की आपस में टकराने से जो 72 प्रकार की ध्वनियां उत्पन्न हुई वे संस्कृत के 72 व्यंजन बन गई। इस प्रकार ब्रह्मांड में निकलने वाली कुल 108 ध्वनियां पर संस्कृत की वर्ण माला आधारित है।

रहस्यमय संख्या 108 का हिन्दू- वैदिक संस्कृति के साथ हजारों सम्बन्ध हैं जिनमें से कुछ का संग्रह है।

आज का आपका राशिफल

मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज आपकी सामाजिक क्षेत्र में मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। आप कोई नया व्यापार शुरू करने का मन बना सकते हैं। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल होंगे। नौकरी पेशा वाले लोगों को पदोन्नति या सम्मान मिलने के योग हैं। यात्रा योग बन रहा है। घर परिवार की परेशानियों का समाधान निकलेगा । आप कहीं पर पूंजी निवेश करने की योजना बना सकते हैं, जो आपके लिए लाभदायक सिद्ध होगा। कानूनी मामलों में लापरवाही मत कीजिए। स्वास्थ्य सुधार रहेगा।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी ,वु , वे, वो)
आज आपको रचनात्मक कार्यों का प्रतिफल प्राप्त होगा। व्यापार में उन्नति मिलने के योग हैं। कानूनी मामलों में सफलता मिल सकती है। पति-पत्नी के बीच बेहतर तालमेल बने रहेंगे। मानसिक रूप से थोड़े परेशान नजर आ रहे हैं तो आप अपने ऊपर नकारात्मक विचारों को हावी मत होने दीजिए। पारिवारिक जिम्मेदारियों का पूर्ण ध्यान रखें। जीवनसाथी आपकी भावनाओं को समझेगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आपकी आज अचानक धन लाभ मिलने की संभावना नजर आ रही है। सामाजिक दायरा बढ़ेगा। आपका दिन भागदौड़ भरा रहेगा। गुप्त शत्रुओं से सतर्क रहने की आवश्यकता है क्योंकि यह आपके कामकाज बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं। संतान की तरफ से हल्की चिंता रहेगी। नए-नए लोगों से दोस्ती हो सकती है लेकिन आप अनजान लोगों के ऊपर जरूरत से ज्यादा भरोसा मत कीजिए। स्वास्थ्य सही रहेगा।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज आप अपने प्रयासों से उन्नति पथ प्रशस्त करेंगे। जरूरतमंद लोगों की मदद करने का मौका मिल सकता है। नौकरी के क्षेत्र में बड़े अधिकारियों के साथ बेहतर तालमेल बने रहेंगे । मेहनत का फल मिलेगा। आप अपनी अधूरी इच्छाओं को पूरा करने की हर संभव कोशिश करेंगे। पारिवारिक माहौल अच्छा रहेगा। परिवार के सभी सदस्य आपका पूरा सपोर्ट करेंगे। व्यापार के सिलसिले में आप यात्रा पर जा सकते हैं, आपके द्वारा की गई यात्रा सफल रहेगी। स्वास्थ्य लाभ होगा।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज का दिन आपके लिए मिलाजुला रहने वाला है। शादीशुदा जिंदगी में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है फिर भी जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा । घर में किसी मांगलिक कार्यक्रम के आयोजन की चर्चा हो सकती है। माता-पिता के स्वास्थ्य में सुधार आएगा। विवाह योग्य लोगों को विवाह का रिश्ता मिल सकता है। आमदनी के अनुसार खर्चों पर कंट्रोल रखने की आवश्यकता है। आप अपने विरोधियों को परास्त करेंगे। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज आप किसी लाभदायक यात्रा पर जा सकते हैं। नौकरी के क्षेत्र में लाभ मिलने की संभावना है। निवेश में फायदा मिल सकता है। किस्मत आपका पूरा साथ देगी। घरेलू सुख साधनों में बढ़ोतरी होगी। जीवनसाथी के साथ रोमांटिक समय व्यतीत करने का मौका मिल सकता है। गुप्त शत्रु आपको हानि पहुंचाने की कोशिश करेंगे परंतु यह सफल नहीं हो पाएंगे। धार्मिक कार्यों में आपका अधिक मन लगेगा। माता-पिता के साथ किसी मंदिर में दर्शन करने के लिए जा सकते हैं। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आपका आज का दिन मिलाजुला नजर आ रहा है। बड़े अधिकारियों को प्रसन्न करना काफी कठिन हो सकता है। दोस्तों के साथ मिलकर आप कोई नया व्यापार शुरू करने का मन बना सकते हैं। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। घर-परिवार के लोगों के साथ अच्छा समय व्यतीत करेंगे। व्यापार की समस्याओं का हल निकल सकता है। दूसरों के कार्यों में हस्तक्षेप मत कीजिए। नौकरी के क्षेत्र में कार्यभार अधिक रहेगा।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आपको आज धन से जुड़े हुए मामलों में काफी सतर्क रहना होगा। आप किसी को भी पैसा उधार मत दीजिए। आप किसी यात्रा पर जा सकते हैं। पुराने मित्रों से मिलना-जुलना हो सकता है। व्यवहार कुशलता से समस्या का समाधान संभव है। पारिवारिक वातावरण सामान्य रहेगा। अचानक आप किसी महत्वपूर्ण मामले में निर्णय ले सकते हैं। लाभ के मार्ग प्रशस्त होंगे। स्वास्थ्य सही रहेगा।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज आप अपने प्रयासों से सफलता हासिल करेंगे। प्रभावशाली लोगों का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। आपका मन प्रसन्न रहने वाला है। कार्यप्रणाली में सुधार आएगा। काफी लंबे समय से अधूरे पड़े कार्य पूरे हो सकते हैं, जिससे आपका मन हर्षित होगा। जीवनसाथी के साथ संबंधों में मधुरता आएगा। पिताजी से व्यापार के विषय में बातचीत कर सकते हैं । स्वास्थ्य सुधार होगा।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आपका आज का दिन पहले के दिनों की अपेक्षा अच्छा रहेगा। आपका मन धर्म-कर्म के कामों में अधिक लगेगा। सत्संग से लाभ मिल सकता है। व्यापार अच्छा चलेगा। आपका मन प्रसन्न रहने वाला है। दोस्तों की मदद से रुके हुए काम पूरे होंगे। आप किसी सुखद यात्रा पर जा सकते हैं। रचनात्मक कामों में सफलता हासिल होगी। आपका मन कार्यों में लगेगा। आपके अधूरे सपने पूरे हो सकते हैं। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज आपका दिन मिला जुला रहेगा । वाहन और मशीनरी के प्रयोग में सावधानी बरतने की आवश्यकता है। आप अपनी कीमती चीजों को संभाल कर रखें। कोई भी जोखिम लेने से बचना होगा। आमदनी के अनुसार खर्चा पर कंट्रोल रखने की आवश्यकता है। पारिवारिक जीवन सुखद रहने वाला है। परिवार में विवाद खत्म होगा और शांति एवं सुख बढ़ेगा। व्यापार में अच्छा मुनाफा मिलने के योग हैं। सवास्थ्य सही रहेगा।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज आपको प्रेम संबंधित मामलों में सफलता हासिल होगी। कानूनी बाधा दूर हो सकती है। परोपकारी स्वभाव होने से दूसरों की मदद करेंगे। कामकाज के प्रति आप लापरवाही मत कीजिए। कुछ जरूरी कामों को लेकर आपको अधिक भागदौड़ और मेहनत करनी पड़ सकती है परंतु आखिर में आपको सफलता मिलने के योग हैं। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।

व्रत की तिथि का समय
व्रत की तिथि हमेशा सूर्योदय से लेकर यानी की आज के सूर्योदय से अगले दिन के सूर्योदय तक व्रत की तिथि मानी जाती है |

लक्ष्मी की बरकत के लिए
ईशान कोण में तुलसी का पौधा लगाने से,गंगा जल रखने से या भगवान की मूर्ति मंदिर बनाने से घर में लक्ष्मी की बरकत होती है ।
घर के आँगन में बेल का पौधा लगाने से…..वो घर पाप नाशक व यशस्वी होता है । अगर उत्तर-पश्चिम में है तो यश बढेगा,उत्तर-दक्षिण में हो तो सुख-शांति बढेगा और बीच में है तो मधुर जीवन होगा l रविवार और द्वादश को बेल के पौधे की परिक्रमा करें तो बड़े-बड़े ब्रह्महत्या जैसे पाप ठीक हो जाते हैं।
घर में पीपल का पेड़ ठीक नहीं ….लेकिन खेत-खली में पश्चिम की तरफ पीपल का पेड़ बड़ा सम्पत्तिकारक है।
अमावस्या, शुक्रवार व रविवार छोड़कर आंवले का रस रगड़ के स्नान करने से भी लक्ष्मी स्थायी होती है ….ऐसा पद्म पुराण में आता है ।
गौझरण (गौ मूत्र) से शरीर को रगड़ के स्नान करने से पाप नाशक उर्जा पैदा होती है ।
गाय के दूध की दही …..वह रगड़ के थोड़ी देर “लक्ष्मी नारायण….लक्ष्मी नारायण” जप करें तो घर में लक्ष्मी स्थिर होती है।

स्मृतिशक्ति बढ़ाने के लिए
स्मृतिशक्ति बढ़ाने हेतु सिर में नित्य बादाम का तेल अल्प मात्रा में अथवा बादाम तेल व नारियल तेल मिलाकर लगाना लाभप्रद है |

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परिवार में सुख समृद्धि के लिए श्री मदभागवत कथा वृन्दावन धाम में

हमारे द्वारा विशेष पुण्यशाली पवित्र अधिकमास के महीने में अपने पित्रों क़ो श्री मदभागवत कथा मूल पाठ श्रवण कराने का पुण्य फल करोड़ों गुणा मिलता है,पितृ प्रसन्न होकर हमें अपना आशीर्वाद देकर जाते हैं,अपने घर परिवार में सुख समृद्धि कारोबार वृद्धि पितृदोष निवारण के लिए पूर्वजों पित्रों के निमित्त श्रीमदभागवत मूल पाठ सप्ताह परायण श्री धाम वृन्दावन में 5 जून से 11 जून तक।
स्थान श्री जी निवास वृन्दावन धाम में आप भी इस पावन विशाल यज्ञ महोत्सव में अपने पित्रों के नाम से भागवत जी की पोथी विराजमान करा सकते है यजमान बनने के लिए आप हमें अति शीघ्र सम्पर्क करें। हमें आप अपने घर से संकल्प स्वरूप अपने पितरों की फोटो और परिवाऱ के नाम गोत्र भेजकर,मूल भागवत पोथी के यजमान बन सकते हैं

आपके पितरों लिए एक ब्राह्मण देवता द्वारा रोजाना श्रीमदभागवत मूल पाठ और पूजन करेंगे,आपके द्वारा दी हुई सेवा दक्षिणा से उनका सुबह का फलाहार दोपहर और शाम का भोजन प्रसादी,ब्राह्मण वस्त्र और अंतिम दिवस में उनको पाठ करने की दक्षिणा और अधिकमास की वस्तुए देकर विदाई करेंगे।

कथा में रोजाना भंडारा प्रसादी ठंडाई की सेवा चलती रहेगी और साधु संत ब्राह्मणों की नित्य सेवा चलती रहेगी, इस पुण्यकाल महीना पुरुषोत्तम मास में अपने घर बैठे आप भी इन सभी सेवाओं या किसी एक सेवा के सहयोगी बन सकते हैं

भागवत कथा प्रवक्ता मूल परम् पूज्य आचार्य श्री रमेश कृष्ण बाबाजी महाराज के श्री मुख से रसपान करेंगे।

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Author: sssrknews

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