Daily panchang,पितृ दोष क्या होता और उसका निवारण उपाय क्या है
⛅दिनांक – 20 जून 2026
⛅दिन – शनिवार
⛅विक्रम संवत् – 2083
⛅अयन – उत्तरायण
⛅ऋतु – ग्रीष्म
⛅मास – ज्येष्ठ
⛅पक्ष – शुक्ल
⛅तिथि – षष्ठी दोपहर 03:46 तक तत्पश्चात् सप्तमी
⛅नक्षत्र – मघा सुबह 09:25 तक तत्पश्चात् पूर्वाफाल्गुनी
⛅योग – वज्र दोपहर 12:48 तक तत्पश्चात् सिद्धि
⛅राहुकाल – सुबह 09:05 से सुबह 10:47 तक
⛅सूर्योदय – 05:42
⛅सूर्यास्त – 07:15
दिशा शूल – पूर्व दिशा में
पितृ दोष क्या होता और उसका निवारण क्या है आओ जानें
यदि घर में पितृ दोष होगा तो घर के बच्चे की शिक्षा,दिमाग,बाल,व्यवहार पर अच्छा प्रभाव नहीं पड़ता,जिन जातकों को पितृ दोष होता है उनके बहुत से कारण होते है की हमारे अपने पितरों से सम्बन्ध अच्छे नहीं हो पाते,कारण,आपके जीवन में रुकावटें परेशानियाँ और क्या नहीं होता,पितृ दोष कही न कही अनेको दोषों को उत्पन्न करने वाला होता है जैसे की वंश न बढ़ने का दोष,असफलता मिलने का दोष,बाधा दोष और भी बहुत कुछ। तो पित्र पक्ष में की गयी पूजा और तर्पण अगर विधि विधान और मन लगाकर किया जाए तो अच्छे फल देने वाली सिद्ध होती है।
बालो पर सबसे पहले प्रभाव पड़ता है जैसे की,समय से पहले बालों का सफ़ेद हो जाना,सिर के बीच के हिस्से से बालों का कम होना,हर कार्य में नाकामी हाथ लगाना,घर में हमेशा कलह रहना,बीमारी घर के सदस्यों को चाहे छोटी हो या बड़ी घेरे रखती है,यह सब लक्षण पितृ दोष घर में है इसको बताते है । और अगर घर में पितृ दोष है तो किसी भी सदस्य को सफलता आसानी से हाथ नहीं लगती।
पितृ दोष कुंडली में है अगर तो कुंडली के अच्छे गृह उतना अच्छा फल जितना उन्हें देना चाहिए
घर के सभी लोग आपस में झगड़ते है,घर के बच्चों के विवाह देरी से होते है,और विवाह दो होना या उम्र मै काफी अन्तर होना या अन्तर जातिये होना या प्रेम विवाह होना या दोनो मै मतभेद होना और काफी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ता है विवाह करने में,घर में धन ना के बराबर रुकेगा अगर पितृ दोष हावी है तो,बीमारी या फिर क़र्ज़ देने में धन चला जायेगा जुडा हुआ धन, पुरानी चीजे ठीक कराने में धन निकल जायेगा पर रुकेगा नहीं।
परिवार की मान और प्रतिष्ठा में गिरावट आती है,पितृ दोष के कारण घर में पेड़-पौधे या फिर जानवर नहीं पनप पाते। घर में शाम आते आते अजीब सा सूनापन हो जायेगा जैसे की उदासी भरा माहौल,घर का कोई हिसा बनते बनते रह जायेगा या फिर बने हुए हिस्से में टूट-फुट होगी,उस हिस्से में दरारे आ जाती है।
घर का मुखिया बीमार रहता है,रसोई घर के आस पास वाली दीवारों में दरार आ जाते है। जिस घर में पितृ दोष हावी होता है उस घर से कभी भी मेहमान संतुष्ट होकर नहीं जायेंगे चाहे आप कुछ भी क्यूँ न कर ले या फिर कितनी ही खातिरदारी कर ले,मेहमान हमेशा नुक्स निकाल कर रख देंगे यानी की मोटे तौर पर आपकी इज्ज़त नहीं करेंगे।
घर में चीजे और साधन होते हुए भी घर के लोग खुश नहीं रहते। जब पैसे की जरुरत पड़ती है तो पैसा मिल नहीं पाता। ऐसे घर के बच्चों को उनकी नौकरी या फिर कारोबार में स्थायित्व लम्बे समय बाद ही हो पाता है,बच्चा तेज़ होते हुए भी कुछ जल्दी से हासिल नहीं कर पायेगा ऐसी परिस्थितियाँ हो जायेंगी ।
जिस घर में पितृ दोष होता है उस घर में भाई-बहन में मन-मुटाव रहता ही रहता है,कभी कभी तो परिस्थितियाँ ऐसी हो जाती है की कोई एक दूसरे की शकल तक देखना पसंद नहीं करता। पति-पत्नी में बिना बात के झगडा होना भी ऐसे घर में स्वाभाविक है जिस घर में पितृ दोष हो।
ऐसे घर के लोग जब एक दूसरे के साथ रहेंगे तो हमेशा कलेश करके रखेंगे परन्तु जैसे ही एक दुसरे से दूर जायेंगे तो प्रेम से बात करेंगे।
घर में स्त्रियों के साथ दुराचार करना, उन्हें नीचा दिखाना,उनका सम्मान न करने से शुक्र गृह बहुत बुरा फल देता है जिसका असर आने वाली चार पीड़ियों तक रहता है। तो शुक्र गृह भी पित्र दोष लगाता है कुंडली में।
जिस घर में जानवरों के साथ बुरा सुलूक किया जाता है उस घर में पितृ दोष आना स्वाभाविक है। और जो जानवरों के साथ बुरा सुलूक करते है वह ही नहीं अपितु उनका पूरा परिवार और उनकी संतान पर पितृ दोष के बुरे प्रभाव के हिस्सेदार जाने-अनजाने में बन जाते है।
जिस घर में विनम्र रहने वाले व्यक्ति का अपमान होता है वह घर पितृ दोष से पीड़ित होगा,साथ में जो लोग कमजोर व्यक्ति का अपमान करेंगे वह भी पितृ दोष से प्रभावित होंगे।
जमीन हथियाने से,हत्या करने से पित्र दोष लगेगा ।
जो लोग समाज-विरॊधि काम काम करेंगे उनका बृहस्पति खराब होकर उनकी कई पीड़ियों तक पितृ दोष देता रहता है।
बुजुर्गों का अपमान जहा हुआ वह समझिये पितृ दोष आया ही आया।
सीड़ियों के निचे रसोई या फिर सामान इक्कठा करने का स्टोर बनाने से पितृ दोष लगता है।
मित्र या प्रेमी को धोखा देने से पितृ दोष लगता है,शेर-मुखी घर में रहने वाले लोगो को पितृ दोष के दुष्प्रभाव झेलने पड़ते है।{शेर-मुखी ऐसा घर होता है जो शुरू शुरू में चौड़ा होता है परन्तु जैसे जैसे आप घर के अंदर जाते जायेंगे वह पतला होता चला जाता है }
पितृदोष की शांति के 11 सरल और सस्ते उपाय करने से पितृ दोष में शान्ति मिलती है पहले हमें अपनी जन्मकुंडली दिखाए या घर कैसे बना हुआ है आप पितृ पूजन कैसे करते हैं या नहीं करते हैं तभी समाधान होगा।
ज्योतिष में पितृदोष का बहुत महत्व माना जाता है। प्राचीन ज्योतिष ग्रंथों में पितृदोष सबसे बड़ा दोष माना गया है। इससे पीड़ित व्यक्ति का जीवन अत्यंत कष्टमय हो जाता है। जिस जातक की कुंडली में यह दोष होता है उसे धन अभाव से लेकर मानसिक क्लेश तक का सामना करना पड़ता है। पितृदोष से पीड़ित जातक की उन्नति में बाधा रहती है। आमतौर पर पितृदोष के लिए खर्चीले उपाय बताए जाते हैं लेकिन यदि किसी जातक की कुंडली में पितृ दोष बन रहा है और वह महंगे उपाय करने में असमर्थ है तो भी परेशान होने की कोई बात नहीं। पितृदोष का प्रभाव कम करने के लिए ऐसे कई आसान, सस्ते व सरल उपाय भी हैं जिनसे इसका प्रभाव कम हो सकता है।
1. कुंडली में पितृ दोष बन रहा हो तब जातक को घर की दक्षिण दिशा की दीवार पर अपने स्वर्गीय परिजनों का फोटो लगाकर उस पर हार चढ़ाकर रोजाना उनकी पूजा स्तुति करना चाहिए। उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है।
2. अपने स्वर्गीय परिजनों की निर्वाण तिथि पर जरूरतमंदों अथवा गुणी ब्राह्मणों को भोजन कराए। भोजन में मृतात्मा की कम से कम एक पसंद की वस्तु अवश्य बनाएं।
3. इसी दिन अगर हो सके तो अपनी सामर्थ्यानुसार गरीबों को वस्त्र और अन्न आदि दान करने से भी यह दोष मिटता है।
4. पीपल के वृक्ष पर दोपहर में जल, पुष्प, अक्षत, दूध, गंगाजल, काले तिल चढ़ाएं और स्वर्गीय परिजनों का स्मरण कर उनसे आशीर्वाद मांगें।
5. शाम के समय में दीप जलाएं और नाग स्तोत्र, महामृत्युंजय मंत्र या रुद्र सूक्त या पितृ स्तोत्र व नवग्रह स्तोत्र का पाठ करें। इससे भी पितृ दोष की शांति होती है।
6. सोमवार प्रात:काल में स्नान कर नंगे पैर शिव मंदिर में जाकर आक के 21 पुष्प, कच्ची लस्सी, बिल्वपत्र के साथ शिवजी की पूजा करें। 21 सोमवार करने से पितृदोष का प्रभाव कम होता है।
7. प्रतिदिन इष्ट देवता व कुल देवता की पूजा करने से भी पितृ दोष का शमन होता है।
8. कुंडली में पितृदोष होने से किसी गरीब कन्या का विवाह या उसकी बीमारी में सहायता करने पर भी लाभ मिलता है।
9. ब्राह्मणों को प्रतीकात्मक गोदान, गर्मी में पानी पिलाने के लिए कुंए खुदवाएं या राहगीरों को शीतल जल पिलाने से भी पितृदोष से छुटकारा मिलता है।
10. पवित्र पीपल तथा बरगद के पेड़ लगाएं। विष्णु भगवान के मंत्र जाप, श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करने से भी पित्तरों को शांति मिलती है और दोष में कमी आती है।
11. पितरों के नाम पर गरीब विद्यार्थियों की मदद करने तथा दिवंगत परिजनों के नाम से अस्पताल, मंदिर, विद्यालय, धर्मशाला आदि का निर्माण करवाने से भी अत्यंत लाभ मिलता है।
पित्र दोष निवारण मन्त्र
मन्त्र 1 — ॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः ।
मन्त्र २– ॐ प्रथम पितृ नारायणाय नमः ।।
एक माला रोज अगर घर का मुखिया या अन्य सदस्य करें तो बहुत लाभ होता।
गोचर कुंडली मे जिस वर्ष शनि और गुरु दोनों सप्तम भाव या लग्न को देखते हों,तब विवाह के योग बनते हैं।
राहु, केतु और शनि जैसे ग्रहों की दृष्टि या युति विवाह में बाधा डालती है।
शनि का प्रभाव सातवे स्थान पर हो तो विवाह में देरी होती है
उपाय :-*सोमवार से शुरू करके प्रतिदिन तुलसी जी व शालीग्राम जी की पूजा कर 7 परिक्रमा करे।
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आत्मा के सात गुण कौन से हैं आओ जानें
आत्मा को संचालित करने के लिए जीवन में सात गुण (सुख, शांति, प्रेम, आनंद, ज्ञान, शक्ति व पवित्रता) की आवश्यकता होती है क्योंकि आत्मा इन्हीं सात गुणों से मिलकर बनी है इसलिए आत्मा को सतोगुणी आत्मा कहा जाता है और इन सातों गुणों का मुख्य स्त्रोत है परमात्मा।
1. पवित्रता
पवित्रता,आत्मा का पहला गुण भी है और सुख – शांति की जननी भी है। पवित्रता का अर्थ केवल ब्रह्मचर्य नहीं है क्योंकि ब्रह्मचर्य सिर्फ शरीर से सम्बंधित है किन्तु पवित्रता का वास्तविक अर्थ है मन – वचन – कर्म से पवित्र रहना जिसे संपूर्ण पवित्रता कहते हैं। हम अधिकतर पवित्रता को शारीरिक रूप से आंकते हैं लेकिन आत्मा को पवित्र तब कहेंगे जब उसके संकल्प भी पवित्र हों। संकल्प हमारे मन की रचना होते हैं इसलिये यदि संकल्प शुद्ध हों तो वचन भी सार्थक निकलेंगे और कर्म भी अच्छा होगा। संकल्प में पवित्रता अर्थात सभी को आत्मा रूपी भाई जान सुख देना, दुःख न देना। मन, वचन और शरीर से पवित्र होने का विषय आध्यात्मिकता की ओर पहला कदम है।
2. शांति
“शांति आपके गले का हार है” – शिव बाबा (स्त्रोत : मुरली) आज प्रत्येक मनुष्य शांति की तलाश में है परन्तु शांति की तलाश कहाँ से कर सकते हैं ? वास्तव में शांति आत्मा का स्वधर्म है। जरा सोचिये – जब आपके मन में किसी प्रकार के प्रश्न या व्यर्थ संकल्प न हों, किसी प्रकार का भार न हो ,तब वहां एक स्थिति होती है जिसमें सब कुछ स्पष्ट हो जाता है। यही शांति है यही आत्मा की स्वस्थिति है और इसे प्राप्त करने के लिये हमें अपने संकल्पों को सही दिशा देनी होगी। हम मन को न सोचने के लिए नहीं दबा सकते। विचारों का निर्माण करना हमारे मन का मुख्य काम है। इसलिए हम केवल अपने विचारों को सकारात्मक होने का मार्गदर्शन कर सकते हैं। मन का यह सही प्रशिक्षण राजयोग का मुख्य भाग है।
अभ्यास: मैं एक शांत आत्मा हूं। शांति मेरा मूल स्वरूप है। मैं सभी को शांति की तरंगें भेज रहा हूं, जो सभी आत्माओं तक पहुंच रहे हैं, उन्हें शांत कर रही हैं और उन्हें आराम दे रही हैं।
3. प्रेम
माना जाता है कि ईश्वर प्यार का सागर है। प्रेम आत्मा की मौलिक अनुभूति है। हम हर उस व्यक्ति से प्रेम करते हैं जो हमारे समान होता हैं या हमें प्रभावित करता हैं। जब हम इस शरीर, धर्म, जाति, रंग-भेद को भूल जाते हैं तब स्वयं व अन्य सभी को एक ज्योति बिंदु (आत्मा) के रूप में देख पाते हैं। तब हमें सभी एक समान व विशिष्ठ अनुभव होते हैं। एक आत्मा किसी अन्य आत्मा को बिना शरीर हानि नहीं पहुंचा सकती। स्वानुभूति द्वारा ही हम सभी अन्य जीवात्माओं से जुड़ सकते हैं और एक परिवार के रूप में अनुभव कर सकते हैं – यही प्रेम है।
4. सुख
सुख, प्राप्तियों व स्वतंत्रता का एक मिश्रित अनुभव है। सुख का आधार प्राप्तियां हैं। बहुत से लोग भौतिक उपलब्धियों जैसे कि धन, प्रसिद्धि, अच्छे परिवार, सम्मान आदि मिलने पर खुशी महसूस करते हैं। फिर भी सच्चा आनंद मिलता है आध्यात्मिक प्राप्ति से। तो जरा सोचिये – क्या आप सदा सुखी हैं? जब किसी के जीवन में शांति व प्रेम की प्राप्ति होती है तो उसे सुखी कहा जाता है। वास्तव में सुख और कुछ नहीं बल्कि जीवन में शांति व प्रेमपूर्ण संबंधों की उपस्थिति है। सुख वास्तव में स्वयं की इस संसार में उपस्थिति का एक गहरा अनुभव है जरा सोचिये यह अनुभव तभी हो सकता है जब आप इस संसार में उपस्थित हों।
अभ्यास: मैं एक सुख चित आत्मा हूं। मैं जो कुछ भी करता हूं, ख़ुशी से करता हूं। यह मेरी जीने की स्वाभाविक स्थिति बन गई है। मेरा हर कर्म मेरी आंतरिक खुशी को दर्शाता है।
5. आनंद
आनंद , सुख की सर्वोच्च अवस्था है। यह सुख – दुःख से परे अवस्था का अनुभव है और यही आत्मा की सतयुगी अवस्था है। आनंद का अर्थ है शरीर की 5 कर्मइंद्रियों के अनुभवों से ‘मुक्त’ हो जाना। सत्य अर्थ में आत्मा, परमात्मा के संग में आनंद का अनुभव करती है और यही राजयोग है। आनंद की झलक पाने के लिए मन – बुद्धि परमात्मा को समर्पित कर एक परमात्मा से ही सर्व संबंधों का अनुभव करना होगा।
अभ्यास: मैं आत्मा इस शरीर से अलग हूँ । शारीरिक कर्मइंद्रियों से अलग, मैं आकाश में उड़ रही हूँ।मैं अंतरिक्ष से इस खूबसूरत दुनिया (पृथ्वी) को देख रही हूँ। मैं अपने सबसे प्यारे आध्यात्मिक पिता शिव बाबा की कंपनी में हूँ। मुझे मुक्त, मुझे प्यार, मेरी रक्षा, मुझे सशक्त एवं मेरी पालना स्वयं भगवान करते हैं।
6. शक्ति
ये आत्मा की आध्यात्मिक शक्तियाँ हैं, जिनका उपयोग हम जीवन की कई परिस्थितियों में करते हैं। अष्ट शक्तियां आत्मा का गुण है। कभी गुप्त, कभी जागृत अवस्था में यह शक्तियाँ हम सभी में है। जब इन शक्तियों का दैनिक जीवन में उपयोग किया जाता है तो यह जाग्रत एवं जब उपयोग नहीं किया जाता तब यह सुप्त अवस्था में होती हैं। राजयोग के अभ्यास द्वारा इन शक्तियों को जाग्रत किया जा सकता है। समाने की शक्ति, सहन शक्ति, समेटने की शक्ति, सामना करने की शक्ति, परखने की शक्ति, निर्णय करने की शक्ति, सहयोग करने की शक्ति और विस्तार को संकीर्ण करने की शक्ति।
7. ज्ञान
परमात्मा ही इस पूरी कहानी को जानता है एवं इसका गुह्य राज बता सकता है। हमारे अस्तित्व के बारे में सच्चाई जानना (मैं कौन हूं?) – रचैता और उसकी रचना, अर्थात्, भगवान और विश्व चक्र के ज्ञान को आध्यात्मिक ज्ञान कहा जाता है। अब हम ज्ञान मुरली के द्वारा यह जानते हैं कि जैसे जैसे आत्मा ज्ञान से परिपूर्ण होती जाती है वैसे ही वह अधिक निर्विकारी (पवित्र) व शक्तिशाली होती जाती है। हम सभी ऐसे पवित्र, शांत, हर्षित, प्यारे और शक्तिशाली आत्माएं हैं, जो परम आत्मा (शिव बाबा) के बच्चे हैं। तो आईये अपने नेत्रों से अज्ञानता के परदे को हटा इस सत्य ज्ञान प्रकाश को आने दें l
बाकी हर दार्शनिक इसे अपने अपने हिसाब से परिभाषित करता है इसलिए अंतर आ जाता है नहीं तो सत्यता में आत्मा , इसे प्राप्त किए बिना आप इसके गुण के बारे में नहीं जान सकते हैं l न्याय दर्शन में महर्षि गौतम ने आत्मा के छः गुण बताए हैं l
आत्मा के चार रूप कौन से हैं ? उनके बीच क्या संबंध है?
आत्मा के चार रुप है—
निर्गुण-निराकार — ब्रह्म का स्वरुप I
निर्गुण-साकार — पुरुष का स्वरुप I
सगुण-निराकार — प्रकृति का गुणमयी स्वरुप।
सगुण-साकार — गुण स्वरुप में देवता का रुप I
समस्त सृष्टि एक आत्मा है I जो इसी चार रुप द्वारा चलायी जाती हैंI
मेष से मीन तक कल का हाल
1. मेष – Aries
दिन सामान्य रहेगा। बिजनेस में छोटी बाधाएं आ सकती हैं, लेकिन सामाजिक कामों में भाग लेने से मान-सम्मान बढ़ेगा। पारिवारिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी, व्यवहार विनम्र रखें। प्रशासनिक कामों में सुधार होगा। भाग्यशाली रंग: चमकीला लाल, अंक: 7
2. वृषभ – Taurus
धार्मिक-आध्यात्मिक कामों की ओर रुझान बढ़ेगा। बिजनेस मध्यम रहेगा, सफलता तुरंत नहीं मिलेगी। परिवार में कलह संभव, ईश्वर भक्ति से शांति मिलेगी। आर्थिक लक्ष्यों पर फोकस बढ़ेगा। भाग्यशाली रंग: बादामी, अंक: 4
3. मिथुन – Gemini
धन खर्च ज्यादा होगा। स्वभाव में उग्रता-क्रोध रह सकता है, व्यवहार संभालें। वाहन चलाते समय सावधानी। निवेश/नया काम शुरू न करें। पुरानी योजनाओं को बढ़ावा मिलेगा। भाग्यशाली रंग: हरा, अंक: 3
4. कर्क – Cancer
दिन मिला-जुला रहेगा। ऑफिस में काम की अधिकता + कड़ी मेहनत। राजनीति में सफलता नहीं मिलने से मन उदास। जरूरी योजनाओं को बेहतर ढंग से आगे बढ़ाएंगे, साख बढ़ेगी। भाग्यशाली रंग: भूरा, अंक: 2
5. सिंह – Leo
क्रोध और वाणी पर संयम रखें। बिजनेस के लिए यात्रा हो सकती है। परिवार में सुख-शांति, सेहत का ध्यान रखें। कारोबार विस्तार पर फोकस, बजट न भूलें। भाग्यशाली रंग: नारंगी, अंक: 9
6. कन्या – Virgo
चंद्रमा आपकी राशि में आएगा। मन थोड़ा भटक सकता है, जरूरी फैसले टालें। खर्चे ज्यादा रहेंगे, बजट बनाकर चलें। विदेश/दूर के कामों में प्रगति।
7. तुला – Libra
इस हफ्ते नए अवसर + सकारात्मक प्रगति के संकेत। वरिष्ठ अधिकारियों से दिशा-निर्देश/नया मौका मिल सकता है। संबंधों में पारदर्शिता रखें। प्रेम में मिठास।
8. वृश्चिक – Scorpio
बड़े बदलाव के लिए तैयार रहें, सफलता इंतजार कर रही है। करियर में बड़ी सफलता, नई जिम्मेदारी/नेतृत्व का मौका। साझेदारी के फैसले सोच-समझकर लें।
9. धनु – Sagittarius
20-30 जून तक बड़ा संकेत! गुरु की कृपा से सफलता के नए द्वार खुलेंगे। धन लाभ + आर्थिक उन्नति के योग। करियर/व्यवसाय में बड़ी उपलब्धि संभव। प्रेम-पारिवारिक जीवन में सुखद समाचार।
10. मकर – Capricorn
इस हफ्ते छोटे फैसले आगे बड़ा फायदा देंगे। प्रेजेंटेशन/मीटिंग में नया सीखने का मौका। पैसों के मामले में हाथ अच्छा, फिजूलखर्ची से बचें।
11. कुंभ – Aquarius
करियर, मान-सम्मान, आर्थिक मामलों में अच्छे अवसर। इस हफ्ते मिथुन + कुंभ वालों को सावधान रहने की सलाह। वाणी पर संयम रखें।
12. मीन – Pisces
करियर, मान-सम्मान, आर्थिक मामलों में अच्छे अवसर मिल सकते हैं। इस सप्ताह बदलाव, आत्ममंथन और नए अवसरों के संकेत। भावनात्मक संतुलन बनाए रखें।
आज की खास बातें
1. शनिवार का असर: शनि का दिन – कर्म के अनुसार फल। मेहनत का परिणाम मिलेगा।
2. सावधानी: मिथुन को गुस्सा-खर्च से बचना है, सिंह को वाणी पर कंट्रोल।
3. लाभ: धनु को 20-30 जून तक बड़ा लाभ योग। वृश्चिक को करियर में उड़ान।
उपाय: शनिवार को शनि देव को सरसों का तेल चढ़ाएं, गरीबों को काला तिल/कंबल दान करें।



