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उमा चतुर्थी व्रत 2026: माता पार्वती की कृपा पाने का पावन पर्व, जानें व्रत कथा, पूजा विधि, तर्पण महत्व और आज का राशिफल

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⛅दिनांक – 18 जून 2026
⛅दिन – गुरुवार
⛅विक्रम संवत् – 2083
⛅अयन – उत्तरायण
⛅ऋतु – ग्रीष्म
⛅मास – ज्येष्ठ
⛅पक्ष – शुक्ल
⛅तिथि – चतुर्थी शाम 06:58 तक तत्पश्चात् पंचमी
⛅नक्षत्र – पुष्य सुबह 11:32 तक तत्पश्चात् अश्लेशा
⛅योग – व्याघात शाम 05:35 तक तत्पश्चात् हर्षण
⛅राहुकाल – दोपहर 02:10 से दोपहर 03:51 तक
⛅सूर्योदय – 05:41
⛅सूर्यास्त – 07:15
⛅दिशा शूल – दक्षिण दिशा में

उमा चतुर्थी व्रत व्रत कथा महत्व पूजा विधि एवं आज का आपका राशिफल आओ जानें

भारत के पूर्वी भाग पश्चिम बंगाल, झारखण्ड़, उडीसा में ज्येष्ठ मास की शुक्लपक्ष की चतुर्थी को उमा चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन देवी पार्वती की पूजा किये जाने का विधान है। यह माँ पार्वती को समर्पित है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार माता सती की मृत्यु के पश्चात् उनके वियोग के कारण भगवान शिव में वैराग्य उत्पन्न हो गया था और उन्होने संसार को त्याग दिया था। संसार की भलाई के लिये देवी सती ने देवी पार्वती के रूप में पुन: जन्म लिया और भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। देवी पार्वती के द्वारा भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिये जो कठिन तप किया गया और जिसके फलस्वरूप देवी पार्वती और भगवान शिव का विवाह हुआ यह व्रत उसी तप और देवी पार्वती के दृढ़ निश्चय को समर्पित है। यह व्रत विवाहित स्त्रियाँ अपने परिवार की सुख-शांति के लिये करती है।

उमा चतुर्थी कब है?
इस वर्ष उमा चतुर्थी व्रत 18 जून 2026 गुरूवार के दिन किया जायेगा।

उमा चतुर्थी व्रत की विधि
उमा चतुर्थी व्रत का अनुष्ठान उत्तर भारत में किये जाने वाले प्रसिद्ध हरतालिका व्रत के समान ही है। इस व्रत की विधि इस प्रकार है –

* प्रात:काल स्नानादि नित्य क्रिया से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

* पूजा स्थान पर पूर्व की ओर मुख करके देवी उमा (पार्वती) का ध्यान करें। उनकी प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उसके आगे दीपक जलायें। एक जल का कलश रखें।

* माता पार्वती को रोली,चावल, हल्दी, मेहंदी इत्यादि श्रृंगार की सामगी चढ़ायें। देवी माँ को गुड़, लवण तथा जौ भी समर्पित करें।

* माता को सफेद पुष्प अधिक प्रिय है इसलिये सफेद रंग के फूल देवी उमा को अर्पित करें। ऐसा माना जाता है कि इससे देवी माँ शीघ्र प्रसन्न होती है और मनोवांछित फल प्रदान करती है।

* पूजन के बाद माता से अपनी त्रुटियों के लिये क्षमा माँगे। उसके बाद देवी माँ से अपना मनोरथ निवेदन करें।

* इस दिन व्रत रखें और एक ही समय भोजन करें। व्रत रखने वाली स्त्री को चाहियें की सुहागिन महिलाओं, ब्राह्मणों तथा गाय का सम्मान करें।

उमा चतुर्थी व्रत के लाभ
इस व्रत को कुंवारी लड़कियाँ और सुहागिन स्त्रियाँ करती है। मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को पूरी श्रद्धा-भक्ति के साथ विधि-विधान से करने से

* सुहागिनों का सुहाग अखण्ड़ रहता है।

* पारिवारिक जीवन सुखमय होता है।

* पति-पत्नी के संबन्ध मधुर होते है। रिश्तों में प्यार बढ़ता है।

* पति की आयु लम्बी होती है।

* कुंवारी कन्याओं को मनपसन्द जीवनसाथी मिलता है।

* धन – धान्य में वृद्धि होती है।

* माता उमा की कृपा प्राप्त होती है।

* साधक की मनोकामना पूर्ण होती है।

* सुख – समृद्धि में बढ़ोत्तरी होती है।

देव,ऋषि और पितृ सम्पूर्ण तर्पण विधि

।।ॐ अर्यमा न त्रिप्य्ताम इदं तिलोदकं तस्मै स्वधा नमः।
ॐ मृत्योर्मा अमृतं गमय।।
पितरों में अर्यमा श्रेष्ठ है। अर्यमा पितरों के देव हैं। अर्यमा को प्रणाम। हे! पिता, पितामह, और प्रपितामह। हे! माता, मातामह और प्रमातामह आपको भी बारंबार प्रणाम। आप हमें मृत्यु से अमृत की ओर ले चलें।

क्या है तर्पण
पितरों के लिए श्रद्धा से किए गए मुक्ति कर्म को श्राद्ध कहते हैं तथा तृप्त करने की क्रिया और देवताओं, ऋषियों या पितरों को तंडुल या तिल मिश्रित जल अर्पित करने की क्रिया को तर्पण कहते हैं।

श्राद्ध पक्ष का माहात्म्य उत्तर व उत्तर-पूर्व भारत में ज्यादा है। तमिलनाडु में आदि अमावसाई, केरल में करिकडा वावुबली और महाराष्ट्र में इसे पितृ पंधरवडा नाम से जानते हैं।

‘हे अग्नि! हमारे श्रेष्ठ सनातन यज्ञ को संपन्न करने वाले पितरों ने जैसे देहांत होने पर श्रेष्ठ ऐश्वर्य वाले स्वर्ग को प्राप्त किया है वैसे ही यज्ञों में इन ऋचाओं का पाठ करते हुए और समस्त साधनों से यज्ञ करते हुए हम भी उसी ऐश्वर्यवान स्वर्ग को प्राप्त करें।’- यजुर्वेद

ऋषि और पितृ तर्पण विधि
तर्पण के प्रकार
पितृतर्पण, मनुष्यतर्पण, देवतर्पण,
भीष्मतर्पण, मनुष्यपितृतर्पण, यमतर्पण

तर्पण विधि

सर्वप्रथम पूर्व दिशा की और मुँह कर,दाहिना घुटना जमीन पर लगाकर,सव्य होकर(जनेऊ व् अंगोछे को बांया कंधे पर रखें) गायत्री मंत्र से शिखा बांध कर, तिलक लगाकर, दोनों हाथ की अनामिका अँगुली में कुशों का पवित्री (पैंती) धारण करें । फिर हाथ में त्रिकुशा ,जौ, अक्षत और जल लेकर संकल्प पढें—

ॐ विष्णवे नम: ३। हरि: ॐ तत्सदद्यैतस्य श्रीब्रह्मणो द्वितीयपरार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे जम्बूद्वीपे भरतखण्डे भारतवर्षे आर्यावर्तैकदेशे अमुकसंवत्सरे अमुकमासे अमुकपक्षे अमुकतिथौ अमुकवासरे अमुकगोत्रोत्पन्न: अमुकशर्मा (वर्मा, गुप्त:) अहं श्रीपरमेश्वरप्रीत्यर्थं देवर्पिमनुष्यपितृतर्पणं करिष्ये ।

तीन कुश ग्रहण कर निम्न मंत्र को तीन बार कहें-

ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।
नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमोनमः।

तदनन्तर एक ताँवे अथवा चाँदी के पात्र में श्वेत चन्दन, जौ, तिल, चावल, सुगन्धित पुष्प और तुलसीदल रखें, फिर उस पात्र में तर्पण के लिये जल भर दें । फिर उसमें रखे हुए त्रिकुशा को तुलसी सहित सम्पुटाकार दायें हाथ में लेकर बायें हाथ से उसे ढँक लें और देवताओं का आवाहन करें ।

आवाहन मंत्र
ॐ विश्वेदेवास ऽआगत श्रृणुता म ऽइम, हवम्।एदं वर्हिनिषीदत॥

‘हे विश्वेदेवगण ! आप लोग यहाँ पदार्पण करें, हमारे प्रेमपूर्वक किये हुए इस आवाहन को सुनें और इस कुश के आसन पर विराजे ।

इस प्रकार आवाहन कर कुश का आसन दें और त्रिकुशा द्वारा दायें हाथ की समस्त अङ्गुलियों के अग्रभाग अर्थात् देवतीर्थ से ब्रह्मादि देवताओं के लिये पूर्वोक्त पात्र में से एक-एक अञ्जलि तिल चावल-मिश्रित जल लेकर दूसरे पात्र में गिरावें और निम्नाङ्कित रूप से उन-उन देवताओं के नाममन्त्र पढते रहें—

1.देव तर्पण

ॐ ब्रह्मास्तृप्यताम् ।
ॐ विष्णुस्तृप्यताम् ।
ॐ रुद्रस्तृप्यताम् ।
ॐ प्रजापतिस्तृप्यताम् ।
ॐ देवास्तृप्यन्ताम् ।
ॐ छन्दांसि तृप्यन्ताम् ।
ॐ वेदास्तृप्यन्ताम् ।
ॐ ऋषयस्तृप्यन्ताम् ।
ॐ पुराणाचार्यास्तृप्यन्ताम् ।
ॐ गन्धर्वास्तृप्यन्ताम् ।
ॐ इतराचार्यास्तृप्यन्ताम् ।
ॐ संवत्सररू सावयवस्तृप्यताम् ।
ॐ देव्यस्तृप्यन्ताम् ।
ॐ अप्सरसस्तृप्यन्ताम् ।
ॐ देवानुगास्तृप्यन्ताम् ।
ॐ नागास्तृप्यन्ताम् ।
ॐ सागरास्तृप्यन्ताम् ।
ॐ पर्वतास्तृप्यन्ताम् ।
ॐ सरितस्तृप्यन्ताम् ।
ॐ मनुष्यास्तृप्यन्ताम् ।
ॐ यक्षास्तृप्यन्ताम् ।
ॐ रक्षांसि तृप्यन्ताम् ।
ॐ पिशाचास्तृप्यन्ताम् ।
ॐ सुपर्णास्तृप्यन्ताम् ।
ॐ भूतानि तृप्यन्ताम् ।
ॐ पशवस्तृप्यन्ताम् ।
ॐ वनस्पतयस्तृप्यन्ताम् ।
ॐ ओषधयस्तृप्यन्ताम् ।
ॐ भूतग्रामश्चतुर्विधस्तृप्यताम् ।

2.ऋषि तर्पण
इसी प्रकार निम्नाङ्कित मन्त्रवाक्यों से मरीचि आदि ऋषियों को भी एक-एक अञ्जलि जल दें—
ॐ मरीचिस्तृप्यताम् ।
ॐ अत्रिस्तृप्यताम् ।
ॐ अङ्गिरास्तृप्यताम् ।
ॐ पुलस्त्यस्तृप्यताम् ।
ॐ पुलहस्तृप्यताम् ।
ॐ क्रतुस्तृप्यताम् ।
ॐ वसिष्ठस्तृप्यताम् ।
ॐ प्रचेतास्तृप्यताम् ।
ॐ भृगुस्तृप्यताम् ।
ॐ नारदस्तृप्यताम् ॥

3.मनुष्य तर्पण

उत्तर दिशा की ओर मुँह कर, जनेऊ व् गमछे को माला की भाँति गले में धारण कर, सीधा बैठ कर निम्नाङ्कित मन्त्रों को दो-दो बार पढते हुए दिव्य मनुष्यों के लिये प्रत्येक को दो-दो अञ्जलि जौ सहित जल प्राजापत्यतीर्थ (कनिष्ठिका के मूला-भाग) से अर्पण करें—

ॐ सनकस्तृप्यताम् -2
ॐ सनन्दनस्तृप्यताम् – 2
ॐ सनातनस्तृप्यताम् -2
ॐ कपिलस्तृप्यताम् -2
ॐ आसुरिस्तृप्यताम् -2
ॐ वोढुस्तृप्यताम् -2
ॐ पञ्चशिखस्तृप्यताम् -2

4.पितृ तर्पण

दोनों हाथ के अनामिका में धारण किये पवित्री व त्रिकुशा को निकाल कर रख दे ,

अब दोनों हाथ की तर्जनी अंगुली में नया पवित्री धारण कर मोटक नाम के कुशा के मूल और अग्रभाग को दक्षिण की ओर करके अंगूठे और तर्जनी के बीच में रखे, स्वयं दक्षिण की ओर मुँह करे, बायें घुटने को जमीन पर लगाकर अपसव्यभाव से (जनेऊ को दायें कंधेपर रखकर बाँये हाथ जे नीचे ले जायें ) पात्रस्थ जल में काला तिल मिलाकर पितृतीर्थ से (अंगुठा और तर्जनी के मध्यभाग से ) दिव्य पितरों के लिये निम्नाङ्कित मन्त्र-वाक्यों को पढते हुए तीन-तीन अञ्जलि जल दें—

ॐ कव्यवाडनलस्तृप्यताम् इदं सतिलं जलं गङ्गाजलं वा) तस्मै स्वधा नम: – 3

ॐ सोमस्तृप्यताम् इदं सतिलं जलं गङ्गाजलं वा) तस्मै स्वधा नम: – 3

ॐ यमस्तृप्यताम् इदं सतिलं जलं गङ्गाजलं वा) तस्मै स्वधा नम: – 3

ॐ अर्यमा तृप्यताम् इदं सतिलं जलं गङ्गाजलं वा) तस्मै स्वधा नम: – 3

ॐ अग्निष्वात्ता: पितरस्तृप्यन्ताम् इदं सतिलं जलं गङ्गाजलं वा) तेभ्य: स्वधा नम: – 3

ॐ सोमपा: पितरस्तृप्यन्ताम् इदं सतिलं जलं गङ्गाजलं वा) तेभ्य: स्वधा नम: – 3

ॐ बर्हिषद: पितरस्तृप्यन्ताम् इदं सतिलं जलं गङ्गाजलं वा) तेभ्य: स्वधा नम: – 3

5.यमतर्पण

इसी प्रकार निम्नलिखित मन्त्रो को पढते हुए चौदह यमों के लिये भी पितृतीर्थ से ही तीन-तीन अञ्जलि तिल सहित जल दें—
ॐ यमाय नम: – 3
ॐ धर्मराजाय नम: – 3
ॐ मृत्यवे नम: – 3
ॐ अन्तकाय नम: – 3
ॐ वैवस्वताय नमः – 3
ॐ कालाय नम: – 3
ॐ सर्वभूतक्षयाय नम: – 3
ॐ औदुम्बराय नम: – 3
ॐ दध्नाय नम: – 3
ॐ नीलाय नम: – 3
ॐ परमेष्ठिने नम: – 3
ॐ वृकोदराय नम: – 3
ॐ चित्राय नम: – 3
ॐ चित्रगुप्ताय नम: – 3

6.मनुष्यपितृतर्पण
इसके पश्चात् निम्नाङ्कित मन्त्र से पितरों का आवाहन करें—

👉ॐ आगच्छन्तु मे पितर एवं ग्रहन्तु जलान्जलिम’
ॐ हे पितरों! पधारिये तथा जलांजलि ग्रहण कीजिए।

‘हे अग्ने ! तुम्हारे यजन की कामना करते हुए हम तुम्हें स्थापित करते हैं । यजन की ही इच्छा रखते हुए तुम्हें प्रज्वलित करते हैं । हविष्य की इच्छा रखते हुए तुम भी तृप्ति की कामनावाले हमारे पितरों को हविष्य भोजन करने के लिये बुलाओ ।’

तदनन्तर अपने पितृगणों का नाम-गोत्र आदि उच्चारण करते हुए प्रत्येक के लिये पूर्वोक्त विधि से ही तीन-तीन अञ्जलि तिल-सहित जल इस प्रकार दें—

अस्मत्पिता अमुकशर्मा वसुरूपस्तृप्यतांम् इदं सतिलं जलं (गङ्गाजलं वा) तस्मै स्वधा नम: – 3

अस्मत्पितामह: (दादा) अमुकशर्मा रुद्ररूपस्तृप्यताम् इदं सतिलं जलं (गङ्गाजलं वा) तस्मै स्वधा नम: – 3

अस्मत्प्रपितामह: (परदादा) अमुकशर्मा आदित्यरूपस्तृप्यताम् इदं सतिलं जलं (गङ्गाजलं वा) तस्मै स्वधा नम: – 3

अस्मन्माता अमुकी देवी वसुरूपा तृप्यताम् इदं सतिलं जलं तस्यै स्वधा नम: – 3

अस्मत्पितामही (दादी) अमुकी देवी रुद्ररूपा तृप्यताम् इदं सतिलं जलं तस्यै स्वधा नम: – 3

अस्मत्प्रपितामही परदादी अमुकी देवी आदित्यरूपा तृप्यताम् इदं सतिलं जल तस्यै स्वधा नम: – 3

इसके बाद नौ बार पितृतीर्थ से जल छोड़े।

इसके बाद सव्य होकर पूर्वाभिमुख हो नीचे लिखे श्लोकों को पढते हुए जल गिरावे—

देवासुरास्तथा यक्षा नागा गन्धर्वराक्षसा: ।
पिशाचा गुह्यका: सिद्धा: कूष्माण्डास्तरव: खगा: ॥
जलेचरा भूमिचराः वाय्वाधाराश्च जन्तव: ।
प्रीतिमेते प्रयान्त्वाशु मद्दत्तेनाम्बुनाखिला: ॥

नरकेषु समस्तेपु यातनासु च ये स्थिता: । तेषामाप्ययनायैतद्दीयते सलिलं मया ॥
येऽबान्धवा बान्धवा वा येऽन्यजन्मनि बान्धवा: ।
ते सर्वे तृप्तिमायान्तु ये चास्मत्तोयकाङ्क्षिण: ॥

अर्थ : ‘देवता, असुर , यक्ष, नाग, गन्धर्व, राक्षस, पिशाच, गुह्मक, सिद्ध, कूष्माण्ड, वृक्षवर्ग, पक्षी, जलचर जीव और वायु के आधार पर रहनेवाले जन्तु-ये सभी मेरे दिये हुए जल से भीघ्र तृप्त हों । जो समस्त नरकों तथा वहाँ की यातनाओं में पङेपडे दुरूख भोग रहे हैं, उनको पुष्ट तथा शान्त करने की इच्छा से मैं यह जल देता हूँ । जो मेरे बान्धव न रहे हों, जो इस जन्म में बान्धव रहे हों, अथवा किसी दूसरे जन्म में मेरे बान्धव रहे हों, वे सब तथा इनके अतिरिक्त भी जो मुम्कसे जल पाने की इच्छा रखते हों, वे भी मेरे दिये हुए जल से तृप्त हों ।’

ॐ आब्रह्मस्तम्बपर्यन्तं देवषिंपितृमानवा: ।
तृप्यन्तु पितर: सर्वे मातृमातामहादय: ॥

अतीतकुलकोटीनां सप्तद्वीपनिवासिनाम् ।
आ ब्रह्मभुवनाल्लोकादिदमस्तु तिलोदकम् ॥

येऽबान्धवा बान्धवा वा येऽन्यजन्मनि बान्धवा:।
ते सर्वे तृप्तिमायान्तु मया दत्तेन वारिणा ॥

अर्थ : ‘ब्रह्माजी से लेकर कीटों तक जितने जीव हैं, वे तथा देवता, ऋषि, पितर, मनुष्य और माता, नाना आदि पितृगण-ये सभी तृप्त हों मेरे कुल की बीती हुई करोडों पीढियों में उत्पन्न हुए जो-जो पितर ब्रह्मलोकपर्यम्त सात द्वीपों के भीतर कहीं भी निवास करते हों, उनकी तृप्ति के लिये मेरा दिया हुआ यह तिलमिश्रित जल उन्हें प्राप्त हो जो मेरे बान्धव न रहे हों, जो इस जन्म में या किसी दूसरे जन्म में मेरे बान्धव रहे हों, वे सभी मेरे दिये हुए जल से तृप्त हो जायँ ।

वस्त्र-निष्पीडन करे तत्पश्चात् वस्त्र को चार आवृत्ति लपेटकर जल में डुबावे और बाहर ले आकर निम्नाङ्कित मन्त्र : “ये के चास्मत्कुले जाता अपुत्रा गोत्रिणो मृतारू । ते गृह्णन्तु मया दत्तं वस्त्रनिष्पीडनोदकम् ” को पढते हुए अपसव्य होकर अपने बाएँ भाग में भूमिपर उस वस्त्र को निचोड़े । पवित्रक को तर्पण किये हुए जल मे छोड दे । यदि घर में किसी मृत पुरुष का वार्षिक श्राद्ध आदि कर्म हो तो वस्त्र-निष्पीडन नहीं करना चाहिये ।

7.भीष्मतर्पण
इसके बाद दक्षिणाभिमुख हो पितृतर्पण के समान ही अनेऊ अपसव्य करके हाथ में कुश धारण किये हुए ही बालब्रह्मचारी भक्तप्रवर भीष्म के लिये पितृतीर्थ से तिलमिश्रित जल के द्वारा तर्पण करे । उनके लिये तर्पण का मन्त्र निम्नाङ्कित श्लोक है–

“वैयाघ्रपदगोत्राय साङ्कृतिप्रवराय च । गङ्गापुत्राय भीष्माय प्रदास्येऽहं तिलोदकम् । अपुत्राय ददाम्येतत्सलिलं भीष्मवर्मणे ॥”

अर्घ्य दान
फिर शुद्ध जल से आचमन करके प्राणायाम करे । तदनन्तर यज्ञोपवीत सव्य कर एक पात्र में शुद्ध जल भरकर उसमे श्वेत चन्दन, अक्षत, पुष्प तथा तुलसीदल छोड दे । फिर दूसरे पात्र में चन्दन् से षडदल-कमल बनाकर उसमें पूर्वादि दिशा के क्रम से ब्रह्मादि देवताओं का आवाहन-पूजन करे तथा पहले पात्र के जल से उन पूजित देवताओं के लिये अर्ध्य अर्पण करे ।

अर्ध्यदान के मन्त्र निम्नाङ्कित हैं—

ॐ ब्रह्म जज्ञानं प्रथमं पुरस्ताद्वि सीमत: सुरुचो व्वेन ऽआव:।
स बुध्न्या ऽउपमा ऽअस्य व्विष्ठा: सतश्च योनिमसतश्व व्विव:॥ ॐ ब्रह्मणे नम:। ब्रह्माणं पूजयामि ॥

ॐ इदं विष्णुर्विचक्रमे त्रेधा निदधे पदम् । समूढमस्यपा,
सुरे स्वाहा ॥ ॐ विष्णवे नम: । विष्णुं पूजयामि ॥

ॐ नमस्ते रुद्र मन्यव ऽउतो त ऽइषवे नम: ।
वाहुब्यामुत ते नम: ॥ ॐ रुद्राय नम: । रुद्रं पूजयामि ॥

ॐ तत्सवितुर्व रेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो न: प्रचोदयात् ॥ ॐ सवित्रे नम: । सवितारं पूजयामि ॥

ॐ मित्रस्य चर्षणीधृतोऽवो देवस्य सानसि । द्युम्नं चित्रश्रवस्तमम् ॥ ॐ मित्राय नम:। मित्रं पूजयामि ॥

ॐ इमं मे व्वरूण श्रुधी हवमद्या च मृडय ।
त्वामवस्युराचके ॥ ॐ वरुणाय नम: । वरूणं पूजयामि ॥

फिर भगवान सूर्य को अघ्र्य दें –
एहि सूर्य सहस्त्राशों तेजो राशिं जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणाघ्र्य दिवाकरः।
हाथों को उपर कर उपस्थान मंत्र पढ़ें –

चित्रं देवाना मुदगादनीकं चक्षुर्मित्रस्य वरूणस्याग्नेः।
आप्राद्यावा पृथ्वी अन्तरिक्ष सूर्यआत्माजगतस्तस्थुशश्च।

फिर परिक्रमा करते हुए दशों दिशाओं को नमस्कार करें।

ॐ प्राच्यै इन्द्राय नमः। ॐ आग्नयै अग्नयै नमः।
ॐ दक्षिणायै यमाय नमः। ॐ नैऋत्यै नैऋतये नमः।
ॐ पश्चिमायै वरूणाय नमः। ॐ वायव्यै वायवे नमः।
ॐ उदीच्यै कुवेराय नमः। ॐ ऐशान्यै ईशानाय नमः।
ॐ ऊध्र्वायै ब्रह्मणै नमः। ॐ अवाच्यै अनन्ताय नमः।

इस तरह दिशाओं और देवताओं को नमस्कार कर बैठकर नीचे लिखे मन्त्र से पुनः देवतीर्थ से तर्पण करें।

ॐ ब्रह्मणै नमः। ॐ अग्नयै नमः। ॐ पृथिव्यै नमः।
ॐ औषधिभ्यो नमः। ॐ वाचे नमः। ॐ वाचस्पतये नमः।
ॐ महद्भ्यो नमः। ॐ विष्णवे नमः। ॐ अद्भ्यो नमः।
ॐ अपांपतये नमः। ॐ वरूणाय नमः।

फिर तर्पण के जल को मुख पर लगायें और तीन बार ॐ अच्युताय नमः मंत्र का जप करें।

समर्पण- उपरोक्त समस्त तर्पण कर्म भगवान को समर्पित करें।
ॐ तत्सद् कृष्णार्पण मस्तु।
नोट- यदि नदी में तर्पण किया जाय तो दोनों हाथों को मिलाकर जल से भरकर गौ माता की सींग जितना ऊँचा उठाकर जल में ही अंजलि डाल दें।

आज का आपका राशिफल
मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आपका दिन सामान्य रहेगा। आपका वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा, जीवनसाथी के साथ मधुरता बनी रहेगी। स्टूडेंट्स की पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ेगी। आज के लिए जो कार्य विचार कर रखा है वह न भूले। आज आप पर कार्यभार का हल्का असर रहेगा। जिसके कारण आपको अन्य अतिरिक्त कार्य करना पड़ सकता है। थकान महसूस करेंगे। आपको अपने काम के प्रति सचेत रहना चाहिए। आध्यात्मिक विचार और अधिक प्रबल होंगे। किसी परिजन की चिन्ता रहेगी। धार्मिक कार्य संपन्न होंगे। स्वास्थ्य में लाभ होगा।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी ,वु , वे, वो)
आपका दिन उत्तम रहेगा। कोई ऐसा काम आपके पास आएगा, जिससे आपको धन लाभ हो सकता है। इससे आपकी आर्थिक स्थिति पहले से और बेहतर हो जायेगी। आपके रूके हुए काम किसी रिशतेदार की मदद से जल्द पूरे हो जाएंगे। कुछ लोग आपसे दोस्ती के लिए हाथ आगे बढ़ा सकते हैं। जीवनसाथी आपकी कोई इच्छा पूरी कर सकता है, जिससे आपको बहुत खुशी महसूस होगी आपके आसपास के कुछ लोग आपसे मदद मांग सकते हैं। घर-परिवार का वातावरण खुशनुमा बना रहेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आपका दिन बेहतरीन रहेगा। किसी निजी काम को पूरा करने के लिए बड़े-बुजुर्ग की राय मानना आपके लिए कारगर साबित होगा। घर में बच्चों की बर्थडे पार्टी का आयोजन कर सकते हैं। घर पर कुछ मेहमान आ सकते हैं, जिससे घर में रौनक बनी रहेगी। काम के प्रति आपकी मेहनत रंग लायेगी। आपको एक्स्ट्रा इनकम के नए मौके मिलेंगे। दोस्तों से मन की बात शेयर करेंगे, इससे परेशानी का हल निकलेगा। परिवारिक रिश्ते मजबूत होंगे। सेहत अच्छी बनी रहेगी।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आपका दिन शानदार रहेगा। किसी जरूरी काम से की गई यात्रा लाभदायक हो सकती है। आपका व्यवहार दूसरों को प्रभावित कर सकता है। हर तरह के मामलों में आप शांत मन से विचार करेंगे। भविष्य में होने वाले किसी काम की तैयारी शुरू कर सकते हैं। अपनों का साथ मिलने से आप खुश रहेंगे। आपको जीवनसाथी का पूरा साथ मिलेगा। किसी रिश्तेदार से आर्थिक सहायता मिल सकती है। जीवन में लोगों का सहयोग मिलता रहेगा।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आपका दिन मनोनुकूल रहेगा। कार्यक्षेत्र में कोई महत्वपूर्ण फैसला लेने से आपको फायदा होगा। किसी अनुभवी की मदद से आपको धन लाभ की प्राप्ति होगी। पहले किए गये कामों से आपको लाभ होगा। साथ ही आपको संतान सुख की प्राप्ति भी होगी। दिन आपके फेवर में होने के कारण आप खुश रहेंगे। छात्रों को पढ़ाई पर ज्यादा धयान देने की जरूरत है। वह पढा हुआ भूल सकते हैं या फिर ध्यान भटक सकता है।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आपका दिन ठीक-ठाक रहेगा। कोई काम पूरा होने में थोड़ी परेशानी आ सकती है। किसी अनुभवी की मदद आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। समाज के लोग आपके पक्ष में रहेंगे। दोस्तों का भी आपको भरपूर सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य के प्रति आपको थोड़ा जागरूक रहने की जरूरत है। पारिवारिक माहौल मधुर बनाने में ध्यान करें। अगर आप पार्टनरशिप में कोई कार्य कर रहे हैं, तो आपको धैर्य बनाये रखना चाहिए। आपकी मेहनत रंग लायेगी।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आपका दिन पहले की अपेक्षा अच्छा रहेगा। किसी सहकर्मी से जरूरी काम पर रोचक चर्चा हो सकती है। दूसरों की राय आपके लिए कारगर साबित होगी। जीवनसाथी के साथ आपके संबंध मजबूत होंगे। कारोबार को बढ़ाने के लिए आपको कुछ खास लोगों से मदद मिल सकती है। बड़े भाई-बहन से कोई अच्छा सा गिफ्ट भी मिल सकता है। कार्यस्थल पर उच्च अधिकारी आपके काम की तारीफ कर सकते हैं। आपको अचानक धन लाभ के मौके मिल सकते हैं। जीवन में लाभ के अवसर प्राप्त होंगे।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आपका दिन शानदार रहेगा। बच्चों के साथ घर पर समय बिताएंगे जिससे आपका मन प्रसन्न रहेगा। परिवार में खुशी का माहौल बना रहेगा। इसके अलावा ऑफिस में सहयोगी आपके काम से काफी प्रभावित होंगे। कुछ लोग आपसे काम सीखने की चाह रखेंगे। आपको अपने सभी काम में सफलता मिलेगी। आपके अंदर भरपूर एनर्जी रहेगी। घर में आपको सबका साथ मिलेगा। संतान पक्ष की किसी सफलता से आप बहुत खुश रहेंगे। आपकी सभी समस्याओं का निवारण होगा।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आपका दिन ठीक-ठाक रहेगा। इस राशि के नौकरी करने वालों के लिए दिन सामान्य रहने वाला है। ऑफिस में काम ज्यादा हो सकता है। आर्थिक स्थिति में कुछ सुधार हो सकता है। किसी दोस्त की समस्या सुलझाने में आप खुद भी उलझ सकते हैं। आपको थकावट महसूस हो सकती है। इसका असर आपकी दिनचर्या पर पड़ सकता है। परिवार में आर्थिक रूप से आपकी कुछ जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। अंततः आपकी सभी समस्याएं सुलझ जायेगी और आपका दिन बेहतर रहेगा।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आपका दिन सामान्य रहेगा। परिवार के सभी सदस्य आपसे खुश रहेंगे। आपकी सेहत सुधार के प्रयास थोड़े उतार-चढ़ाव के साथ सफल होंगे। ऑफिस में टीम मेंबरों से मधुरता बनाए रखें ।गुस्से पर कंट्रोल रखें। किसी काम को लेकर आपका नजरिया दूसरों से अलग हो सकता है। जीवनसाथी के साथ बात करने से गलतफ़हमी दूर होंगी। इसके अलावा दूसरों की बातों में दखल देने से आपको बचना चाहिए। आपको किस्मत का सहयोग मिलेगा।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आपका दिन फायदेमंद रहेगा। धन लाभ के नये रास्ते खुले नजर आएंगे। ऑफिस में कोई ऐसा काम आपको मिल सकता है, जिसके लिए आप बहुत दिनों से उत्सुक थे। इस राशि के विवाहितों के लिए दिन यादगार रहने वाला है। आप फ्यूचर प्लानिंग कर सकते हैं। नौकरी कर रहे लोगों को उन्नति के अवसर प्राप्त हो सकते हैं। किसी काम के सिलसिले में यात्रा हो सकती है। दोस्तों के साथ आपके संबंध मजबूत होंगे।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आर्थिक रूप से आपकी प्रगति होना तय है। जीवन में धन लाभ के नये अवसर आयेंगे। रूके हुये काम पूरे होने पर आपको खुशी का अनुभव होगा। सामाजिक कार्यों में आप बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेंगे। घर पर अचानक कुछ रिश्तेदार आ सकते हैं। बड़े-बुजुर्गों के आशीर्वाद से जीवन में शांति और सद्भाव बना रहेगा। आपके दाम्पत्य संबंध में नई खुशियों का संचार होगा। सरकारी क्षेत्र में अगर आप अपना करियर बनाने के लिये कदम बढ़ायेंगे, तो आपको सफलता अवश्य मिलेगी। धन धान्य की वृद्धि होती है।

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Author: sssrknews

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