रैपिडो (Rapido) के को-फाउंडर पवन गुंटुपल्ली की सफलता की कहानी संघर्ष और दृढ़ निश्चय की मिसाल है। आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur) से ग्रेजुएट पवन को रैपिडो खड़ा करने से पहले 7 अलग-अलग स्टार्टअप्स में असफलता का सामना करना पड़ा था।
जब उन्होंने रैपिडो का आइडिया निवेशकों (investors) के सामने रखा, तो उन्हें 75 बार रिजेक्शन झेलना पड़ा। अधिकतर निवेशकों का मानना था कि ओला (Ola) और उबर (Uber) जैसे दिग्गजों के सामने बाइक टैक्सी का बिजनेस टिक नहीं पाएगा। लेकिन पवन ने हार नहीं मानी।
कंपनी के लिए बड़ा टर्निंग पॉइंट 2016 में आया, जब हीरो मोटोकॉर्प के चेयरमैन पवन मुंजाल ने इसमें निवेश किया। इसके बाद रैपिडो ने मेट्रो शहरों के बजाय टियर-1 और टियर-2 शहरों पर फोकस किया और सस्ती राइड्स उपलब्ध कराईं। आज रैपिडो 100 से ज्यादा शहरों में मौजूद है और इसकी वैल्यूएशन 9350 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है।






